नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान के बाद सोना और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली है। 2 अप्रैल 2026 को व्यापारिक दिन के दौरान चांदी 8% टूटकर 2,24,500 रुपये प्रति किलो और सोना 4% गिरकर 1,47,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। निवेशकों के लिए यह अचानक आई गिरावट चिंता का विषय बन गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप के बयान से दुनियाभर में महंगाई की चिंताओं ने निवेशकों के भरोसे को हिला दिया और इससे सोने-चांदी में बिकवाली तेज हुई।
ट्रंप के बयान और शेयर बाजार पर असर
सोने-चांदी की गिरावट के दिन भारतीय शेयर बाजार में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआत में बाजार में दबाव आया, लेकिन दिन ढलते-ढलते सेंसेक्स 185 अंक चढ़कर सकारात्मक बंद हुआ।
हालांकि शेयर बाजार में रिकवरी आई, लेकिन सोने-चांदी की कीमतें गिरती रहीं, जो दर्शाता है कि निवेशक अब इन धातुओं को सुरक्षित निवेश के बजाय महंगाई और वैश्विक अस्थिरता के दृष्टिकोण से देख रहे हैं।
सोने-चांदी में गिरावट के आंकड़े
- चांदी: शुक्रवार को चांदी 8% गिरकर 2,24,500 रुपये प्रति किलो पर आ गई। इसका मतलब है कि निवेशकों ने लगभग 19,000 रुपये प्रति किलो का नुकसान झेला।
- सोना: MCX पर सोना 4% तक गिर गया और 1,47,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।
पिछले दो महीनों में सोना और चांदी में तीव्र उतार-चढ़ाव देखा गया है। 29 जनवरी 2026 को चांदी का भाव 4,25,000 रुपये प्रति किलो और सोना 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंचा था। इस अवधि में दोनों धातुओं में भारी गिरावट दर्ज की गई।
सोना-चांदी के ऐतिहासिक रेट और निवेशकों की प्रतिक्रिया
MCX पर मौजूदा रेट के अनुसार:
- चांदी ऑल टाइम हाई से करीब 2 लाख रुपये सस्ती है।
- सोना अपने ऑल टाइम हाई से करीब 45,000 रुपये सस्ता हुआ है।
निवेशकों का नजरिया:
- एक साल में सोने ने 70% से अधिक रिटर्न दिया।
- चांदी ने अपने मूल्य में दोगुनी से अधिक वृद्धि दर्ज की।
पहले सोना और चांदी केवल पारंपरिक निवेश माने जाते थे, लेकिन अब हर वर्ग के निवेशक और युवा वर्ग अपने पोर्टफोलियो में इन धातुओं को शामिल कर रहे हैं।
वैश्विक कारण और फेडरल रिजर्व का प्रभाव
पिछले महीने अमेरिकी फेडरल रिजर्व के निर्णय ने सोना-चांदी पर दबाव डाला। फेड ने ब्याज दर स्थिर रखने का फैसला किया, जिससे सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट तेज हुई।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाएँ, जैसे ईरान युद्ध और वैश्विक मुद्रास्फीति की आशंकाएं, निवेशकों के निर्णयों को सीधे प्रभावित कर रही हैं।
चांदी का निवेशक आकर्षण और इंडस्ट्रियल डिमांड
हाल के महीनों में सोने की तुलना में चांदी ने निवेशकों को ज्यादा आकर्षित किया है। इसके अलावा, इंडस्ट्रियल डिमांड भी चांदी के मूल्य को सपोर्ट कर रही है:
- इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में खपत बढ़ी।
- सोलर पैनल और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में चांदी की मांग लगातार बढ़ रही है।
इस वजह से निवेशकों के बीच चांदी की लंबी अवधि के लिए आकर्षकता बनी हुई है।
निवेशकों के लिए सुझाव
- लंबी अवधि का नजरिया अपनाएं: वर्तमान गिरावट अस्थायी हो सकती है।
- डाइवर्सिफिकेशन: सिर्फ सोने या चांदी में निवेश न करें, बल्कि अन्य संपत्तियों में भी पूंजी विभाजित करें।
- वैश्विक घटनाओं पर नजर: ईरान युद्ध, अमेरिकी नीतियां और वैश्विक महंगाई दर सीधे सोना-चांदी को प्रभावित करती हैं।
- इंडस्ट्रियल डिमांड पर ध्यान: चांदी में बढ़ती इंडस्ट्रियल खपत दीर्घकालिक समर्थन दे सकती है।
निष्कर्ष
2 अप्रैल 2026 को सोना और चांदी में आई गिरावट ने निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर दिया। जबकि शेयर बाजार में रिकवरी आई, लेकिन कीमती धातुओं की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव जारी है।
इतिहास और विशेषज्ञों के विश्लेषण के आधार पर कहा जा सकता है कि यह गिरावट संभावित अवसर और जोखिम दोनों लेकर आई है। निवेशक यदि सतर्कता और लंबी अवधि का नजरिया अपनाते हैं, तो वे सोने-चांदी से बेहतर रिटर्न प्राप्त कर सकते हैं।
Sources / References:
- ITG, AFP, Getty Images – Market Data 2026
- MCX Commodity Rates, April 2026
- Business Today / आजतक – सोना-चांदी अपडेट
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