मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, अमेरिका-ईरान के बीच फिर से टकराव की आशंका और वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता के बीच सोमवार सुबह सोने और चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब डेढ़ महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि चांदी में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से ईरान को लेकर दिए गए सख्त संकेतों ने कमोडिटी बाजार में नई हलचल पैदा कर दी है। हालांकि आमतौर पर युद्ध जैसी स्थिति में सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने गोल्ड मार्केट पर दबाव बढ़ा दिया।
सुबह-सुबह क्यों टूट गया सोना?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोमवार सुबह कॉमेक्स (COMEX) पर सोना करीब 34 डॉलर प्रति औंस टूटकर 4527.60 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। यह स्तर पिछले करीब डेढ़ महीने का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है।
दूसरी तरफ चांदी की कीमतों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। सिल्वर करीब ढाई डॉलर कमजोर होकर 75 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई।
कमोडिटी बाजार के जानकारों के अनुसार इसके पीछे तीन बड़े कारण हैं अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव, डॉलर इंडेक्स में मजबूती, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी. जब डॉलर मजबूत होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मांग पर दबाव पड़ता है। इसके अलावा निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश की बजाय तेजी से बदलते बाजार में मुनाफावसूली कर रहे हैं।
ट्रंप के बयान से बढ़ी बाजार की बेचैनी
चीन दौरे से लौटने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त रुख दिखाया है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि वॉशिंगटन एक बार फिर तेहरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी आशंका ने कच्चे तेल के बाजार में तेजी ला दी। ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों में उछाल देखने को मिला।
ऊर्जा बाजार में तनाव बढ़ने का असर सीधे सोने और चांदी जैसे कीमती धातुओं पर भी पड़ा। हालांकि लंबे समय में युद्ध जैसी स्थिति सोने के लिए सपोर्टिव मानी जाती है, लेकिन फिलहाल बाजार में डॉलर और बॉन्ड यील्ड ज्यादा प्रभाव डाल रहे हैं।
भारत में भी दिख सकता है असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट का असर आज घरेलू सर्राफा बाजार और एमसीएक्स पर भी देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर डॉलर मजबूत बना रहता है और निवेशकों की बिकवाली जारी रहती है तो घरेलू बाजार में भी सोने की कीमतों में नरमी देखने को मिल सकती है।
हालांकि भारत में कीमतों को सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजार ही तय नहीं करता। इसमें कई घरेलू फैक्टर भी काम करते हैं:
- रुपये की चाल
- आयात शुल्क
- शादी-ब्याह की मांग
- निवेशकों की खरीदारी
- ज्वेलरी सेक्टर की मांग
सरकार की ड्यूटी बढ़ाने वाली चाल का क्या असर हुआ?
हाल ही में भारत सरकार ने सोने के आयात पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था। सरकार का मकसद विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना, गोल्ड इंपोर्ट घटाना, रुपये को मजबूती देना इस फैसले के बाद घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में अचानक बड़ी तेजी देखने को मिली थी।
लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोरी आने से कीमतों पर दबाव बन रहा है। यानी घरेलू बाजार में फिलहाल दो विपरीत ताकतें काम कर रही हैं:
| फैक्टर | असर |
|---|---|
| आयात शुल्क बढ़ना | कीमत बढ़ाने वाला |
| अंतरराष्ट्रीय गिरावट | कीमत घटाने वाला |
इसी वजह से बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
शुक्रवार को घरेलू बाजार में क्या हुआ था?
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार कारोबारी सप्ताह के आखिरी दिन घरेलू बाजार में सोने और चांदी का रुख मिला-जुला रहा।
शुक्रवार के बंद भाव
| धातु | कीमत |
|---|---|
| 24 कैरेट सोना | ₹1,58,210 प्रति 10 ग्राम |
| 23 कैरेट सोना | ₹1,57,526 प्रति 10 ग्राम |
| 22 कैरेट सोना | ₹1,44,874 प्रति 10 ग्राम |
| चांदी | ₹2,68,500 प्रति किलो |
चांदी में इस दौरान कमजोरी देखी गई, जबकि सोने के कुछ कैरेट वर्गों में मजबूती बनी रही।
क्या अभी सोना खरीदना सही रहेगा?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल सोने में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अगर मिडिल ईस्ट तनाव बढ़ता है, कच्चा तेल और महंगा होता है, डॉलर और मजबूत होता है तो बाजार में फिर नई हलचल देखी जा सकती है।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सोना अब भी सुरक्षित निवेश माना जा रहा है, लेकिन शॉर्ट टर्म में इसमें तेज उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर सीधे ज्वेलरी खरीदने वालों, शादी-ब्याह के सीजन, गोल्ड लोन लेने वालों, निवेशकों पर पड़ता है।
अगर अंतरराष्ट्रीय गिरावट जारी रहती है तो आने वाले दिनों में घरेलू बाजार में ग्राहकों को थोड़ी राहत मिल सकती है। लेकिन आयात शुल्क ज्यादा होने की वजह से बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है।
आगे क्या देख रहा बाजार?
इस सप्ताह निवेशकों की नजर इन बड़े फैक्टर्स पर रहेगी अमेरिका-ईरान तनाव, डॉलर इंडेक्स, कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के संकेत, भारत में रुपये की चाल इन सभी फैक्टर्स से तय होगा कि सोना फिर तेजी पकड़ेगा या गिरावट और बढ़ेगी।
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