भारत और चीन दुनिया के दो सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल हैं। लेकिन इस समय दोनों देशों के गोल्ड मार्केट में बिल्कुल अलग तस्वीर देखने को मिल रही है। एक तरफ भारत में सोने की खरीदारी की रफ्तार धीमी पड़ गई है, जबकि दूसरी ओर चीन में निवेशकों और खरीदारों की दिलचस्पी फिर से बढ़ने लगी है। इसके पीछे सिर्फ कीमतों का उतार-चढ़ाव ही नहीं, बल्कि आर्थिक परिस्थितियां, ब्याज दरों की उम्मीदें, निवेशकों की रणनीति और घरेलू मांग जैसे कई बड़े कारण हैं।
हाल के दिनों में घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कुछ दिन पहले तक कीमतें तीन महीने के निचले स्तर तक पहुंच गई थीं, लेकिन उसके बाद फिर तेजी लौट आई। इसी बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने ने पांच सप्ताह बाद मजबूती दिखाई है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब वैश्विक बाजार में सोने को समर्थन मिल रहा है तो भारत में खरीदारी क्यों धीमी है और चीन में मांग क्यों बढ़ रही है?
MCX पर फिर लौटी तेजी
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 3 जुलाई को सोने का वायदा भाव बढ़कर 1,48,069 रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्च स्तर तक पहुंच गया। इससे पहले जुलाई की शुरुआत में सोना गिरकर 1,40,450 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था, जो 27 मार्च के बाद का सबसे निचला स्तर माना गया।
इस गिरावट के बाद कीमतों में आई रिकवरी ने निवेशकों का ध्यान फिर से सोने की ओर आकर्षित किया है। हालांकि भारतीय ज्वेलरी बाजार में इसका असर खरीदारी के रूप में अभी पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मजबूत हुआ गोल्ड
वैश्विक बाजार में भी सोने ने पिछले पांच सप्ताह की सबसे अच्छी साप्ताहिक बढ़त की ओर कदम बढ़ाया है।
- हाजिर सोने की कीमत लगभग 4,184.75 डॉलर प्रति औंस रही।
- अगस्त डिलीवरी वाला US Gold Futures लगभग 4,197.20 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के कमजोर रोजगार आंकड़ों ने सोने को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई है।
अमेरिका के कमजोर जॉब डेटा से मिला सहारा
अमेरिकी श्रम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार जून महीने में नॉन-फार्म पेरोल में केवल 57,000 नई नौकरियां जुड़ीं। यह बाजार की अपेक्षाओं से काफी कम रहा।
इसका मतलब यह निकाला जा रहा है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व निकट भविष्य में ब्याज दरों को आक्रामक तरीके से बढ़ाने से बच सकता है।
जब ब्याज दरें बढ़ने की संभावना कम होती है तो:
- डॉलर पर दबाव आता है।
- बॉन्ड यील्ड कमजोर होती है।
- सोना निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बन जाता है।
इसी कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड की कीमतों को समर्थन मिला।
भारत में क्यों धीमी पड़ गई सोने की खरीदारी?
भारत में इस समय सोने की मांग सामान्य से कमजोर बनी हुई है। इसके पीछे कई व्यावहारिक कारण हैं।
1. शादी और त्योहारों का ऑफ-सीजन
भारतीय बाजार में सोने की सबसे ज्यादा खरीदारी शादी-ब्याह और बड़े त्योहारों के दौरान होती है। फिलहाल न तो शादी का प्रमुख सीजन चल रहा है और न ही कोई बड़ा त्योहार सामने है।
ऐसे में ज्वेलरी की मांग स्वाभाविक रूप से कम हो जाती है।
2. कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव
ज्वेलर्स का कहना है कि लगातार बदलती कीमतों के कारण ग्राहक खरीदारी टाल रहे हैं। लोग यह देखना चाहते हैं कि आने वाले दिनों में कीमतें और गिरती हैं या नहीं।
3. ऊंचे दाम पर खरीदने से बच रहे ग्राहक
हालांकि कीमतें कुछ समय पहले नीचे आई थीं, लेकिन उसके बाद फिर तेजी लौटने लगी। ऐसे में कई खरीदार महंगे स्तर पर खरीदारी करने से बच रहे हैं।
4. निवेशकों का इंतजार वाला रुख
कई निवेशक फिलहाल बाजार की दिशा साफ होने का इंतजार कर रहे हैं। यदि वैश्विक परिस्थितियां बदलती हैं तो कीमतों में फिर उतार-चढ़ाव आ सकता है।
ज्वेलर्स क्यों बरत रहे हैं सावधानी?
बाजार से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि खरीदारी पूरी तरह बंद नहीं हुई है। ज्वेलर्स अपनी जरूरत के हिसाब से स्टॉक खरीद रहे हैं, लेकिन बड़ी मात्रा में खरीद से बच रहे हैं।
कारण साफ है—यदि कीमतों में अचानक गिरावट आती है तो महंगे स्टॉक पर नुकसान उठाना पड़ सकता है।
यही वजह है कि अधिकांश कारोबारी फिलहाल सीमित खरीदारी की रणनीति अपना रहे हैं।
चीन में क्यों बढ़ रही है गोल्ड की डिमांड?
जहां भारत में मांग कमजोर हुई है, वहीं चीन में हालात कुछ अलग नजर आ रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार चीन में इस सप्ताह सोना अंतरराष्ट्रीय कीमत के मुकाबले कभी समान भाव पर और कभी लगभग 2 डॉलर प्रति औंस के डिस्काउंट पर बिक रहा था।
पिछले सप्ताह यही डिस्काउंट 3 से 7 डॉलर प्रति औंस तक था।
डिस्काउंट कम होने का क्या मतलब है?
जब किसी देश में सोना अंतरराष्ट्रीय कीमत से ज्यादा छूट पर बिकता है तो इसका मतलब होता है कि खरीदार कम हैं और विक्रेता बिक्री बढ़ाने के लिए छूट दे रहे हैं।
लेकिन जब डिस्काउंट घटने लगता है तो इसका संकेत होता है कि:
- खरीदारों की संख्या बढ़ रही है।
- बाजार में मांग सुधर रही है।
- विक्रेताओं को ज्यादा छूट देने की जरूरत नहीं पड़ रही।
यही स्थिति फिलहाल चीन में देखने को मिल रही है।
चीन में निवेशक सोने की ओर क्यों लौट रहे हैं?
चीन की अर्थव्यवस्था अभी भी कई चुनौतियों का सामना कर रही है। रियल एस्टेट सेक्टर में कमजोरी, शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और आर्थिक अनिश्चितता के कारण निवेशक सुरक्षित विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।
ऐसे माहौल में सोना पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है।
इसके अलावा:
- केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोना खरीदने की प्रवृत्ति,
- वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता,
- डॉलर में संभावित कमजोरी,
- और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग
भी चीन में गोल्ड की खरीदारी को समर्थन दे रहे हैं।
जून में सोना क्यों हुआ कमजोर?
जून महीने में सोने की कीमतों में लगभग 8.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
मार्च के बाद यह पहला महीना था जब सोने ने इतनी बड़ी मासिक कमजोरी दिखाई।
इस गिरावट के प्रमुख कारण थे:
- डॉलर की मजबूती
- ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की आशंका
- मुनाफावसूली
- वैश्विक निवेशकों द्वारा जोखिम वाली परिसंपत्तियों में बढ़ती दिलचस्पी
हालांकि जुलाई की शुरुआत में हालात बदलते नजर आए हैं और सोना फिर संभलता दिखाई दे रहा है।
क्या भारत में फिर बढ़ेगी गोल्ड की डिमांड?
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल मांग कमजोर रह सकती है, लेकिन यह स्थिति स्थायी नहीं है।
रक्षाबंधन, गणेश उत्सव, नवरात्रि, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के करीब आते ही ज्वेलरी की मांग दोबारा बढ़ सकती है।
इसके अलावा यदि:
- कीमतों में स्थिरता आती है,
- ब्याज दरों पर दबाव कम होता है,
- और वैश्विक बाजार में सोना मजबूत बना रहता है,
तो निवेशकों की दिलचस्पी भी बढ़ सकती है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
जो लोग लंबी अवधि के निवेश के नजरिए से सोना खरीदना चाहते हैं, उनके लिए बाजार पर नजर बनाए रखना जरूरी है। केवल कीमतों की छोटी अवधि की तेजी या गिरावट देखकर फैसला लेना उचित नहीं होगा।
विशेषज्ञ पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखने के लिए सोने को एक महत्वपूर्ण एसेट मानते हैं, लेकिन खरीदारी हमेशा अपनी वित्तीय क्षमता, निवेश लक्ष्य और जोखिम प्रोफाइल के अनुसार करनी चाहिए।
निष्कर्ष
फिलहाल भारत और चीन के गोल्ड बाजार दो अलग-अलग दिशा में चलते दिखाई दे रहे हैं। भारत में ऑफ-सीजन, ऊंची कीमतें और अस्थिरता के कारण खरीदारी धीमी हुई है, जबकि चीन में आर्थिक अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग ने सोने की खरीद को फिर गति दी है। अमेरिका के कमजोर रोजगार आंकड़ों ने भी वैश्विक स्तर पर सोने को नया समर्थन दिया है। आने वाले महीनों में त्योहारों का सीजन, फेडरल रिजर्व की नीति और वैश्विक आर्थिक हालात तय करेंगे कि सोने की कीमतों और मांग का अगला रुख क्या रहेगा।


