अंडों की कीमतों में तेजी का असर अब देश के परिवारों की खरीदारी पर साफ दिखाई देने लगा है। बढ़ती कीमतों के कारण बड़ी संख्या में लोगों ने अंडे खरीदने की मात्रा कम कर दी है या उन्हें कम बार खरीदना शुरू कर दिया है। एक सर्वे के मुताबिक, करीब 48% परिवारों ने कीमत बढ़ने के बाद अंडों की खरीदारी घटा दी है। वहीं, अंडों की गुणवत्ता और मिलावट को लेकर भी उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ी है।
अंडों की कीमतों में पिछले एक साल में करीब 35-40% तक की बढ़ोतरी की बात सामने आई है। सर्दियों में इसकी कीमतों पर और दबाव पड़ने की आशंका है, क्योंकि इस मौसम में अंडों की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है।
कीमत बढ़ने से लोगों की खरीदारी पर असर
लोकल सर्कल्स के सर्वे में अंडे खरीदने वाले परिवारों से कीमतों में हालिया बदलाव और उनकी खरीदारी की आदतों के बारे में सवाल पूछे गए। सर्वे के अनुसार, 48% परिवारों ने कीमत बढ़ने के बाद अंडों की मात्रा या खरीदने की आवृत्ति कम कर दी।
वहीं, करीब 10% परिवारों ने सस्ते विकल्प तलाशने या दूसरे स्रोतों से अंडे खरीदने का रास्ता अपनाया। हालांकि, कुछ परिवार ऐसे भी हैं जिन्होंने कीमत बढ़ने के बावजूद पहले जितनी मात्रा में अंडे खरीदना जारी रखा।
84% परिवारों ने कीमत बढ़ने की बात कही
सर्वे में शामिल लोगों के मुताबिक पिछले छह महीनों में अंडों की कीमत में अलग-अलग स्तर पर बढ़ोतरी हुई है।
- 31% लोगों ने कीमत में 10-25% की बढ़ोतरी बताई।
- 31% लोगों के मुताबिक कीमत 25-50% तक बढ़ी।
- 22% लोगों ने 10% तक की वृद्धि की बात कही।
- कुल मिलाकर 84% परिवारों ने किसी न किसी स्तर पर अंडों की कीमत बढ़ने की बात कही।
इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि अंडे जैसे रोजमर्रा के खाद्य पदार्थ की कीमत में बदलाव का असर सीधे घरेलू बजट पर पड़ रहा है।
अंडों की कीमत क्यों बढ़ रही है?
अंडों की कीमत बढ़ने के पीछे पोल्ट्री फीड की लागत को प्रमुख कारण माना जा रहा है। अंडा उत्पादन की कुल लागत में पोल्ट्री फीड की हिस्सेदारी करीब 65-70% तक हो सकती है।
फीड में इस्तेमाल होने वाले मक्के की कीमत और उपलब्धता में बदलाव का असर भी पोल्ट्री उद्योग पर पड़ता है। मक्के का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन में बढ़ने के कारण इसकी उपलब्धता और कीमत को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
जब पोल्ट्री फीड महंगा होता है तो मुर्गियों के पालन और अंडा उत्पादन की लागत बढ़ जाती है। इसका असर आगे चलकर अंडों की खुदरा कीमतों पर दिखाई दे सकता है।
सर्दियों में और महंगे हो सकते हैं अंडे
अंडों की कीमतों को लेकर आने वाले महीनों में भी राहत की गारंटी नहीं है। सर्दियों में अंडों की खपत बढ़ने के कारण मांग में तेजी आती है। अगर उस समय उत्पादन और सप्लाई मांग के मुताबिक नहीं रही तो कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है।
यही वजह है कि आने वाले सर्दी के मौसम में अंडों की कीमतों पर नजर रखना जरूरी होगा।
अंडों की क्वालिटी को लेकर भी बढ़ी चिंता
सिर्फ कीमत ही नहीं, बल्कि अंडों की गुणवत्ता को लेकर भी उपभोक्ताओं की चिंता सामने आई है। सर्वे के अनुसार, 70% परिवारों ने अंडों में मिलावट को लेकर खुद को बेहद चिंतित बताया। इसके अलावा 20% लोग कुछ हद तक चिंतित थे।
इस तरह कुल 90% उपभोक्ताओं ने अंडों में मिलावट को लेकर किसी न किसी स्तर पर चिंता जताई।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि बाजार में बिकने वाले सभी अंडे मिलावटी या असुरक्षित हैं। उपभोक्ताओं की चिंता और किसी उत्पाद के असुरक्षित होने की वैज्ञानिक पुष्टि, दोनों अलग-अलग बातें हैं।
अंडों की सुरक्षा पर FSSAI ने क्या कहा था?
दिसंबर 2025 में एक उपभोक्ता संगठन की ओर से कराए गए लैब टेस्ट में एक ब्रांडेड अंडे के सैंपल में नाइट्रोफ्यूरान मेटाबोलाइट्स के अंश मिलने की रिपोर्ट सामने आई थी। इसके बाद FSSAI ने देशभर में अंडों की निगरानी और जांच के निर्देश दिए थे।
बाद में FSSAI की ओर से स्पष्ट किया गया था कि अंडे सुरक्षित हैं और इन्हें कैंसर से जोड़ने वाले दावों को वैज्ञानिक आधार नहीं माना जा सकता।
इसलिए उपभोक्ताओं के लिए जरूरी है कि वे किसी एक रिपोर्ट या सोशल मीडिया दावे के आधार पर सभी अंडों को असुरक्षित न मानें और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें।
महंगे अंडों का असर घरेलू बजट पर
अंडे कई परिवारों के लिए प्रोटीन का अपेक्षाकृत सस्ता और आसानी से उपलब्ध स्रोत माने जाते हैं। ऐसे में कीमत में लगातार बढ़ोतरी होने पर इसका असर खासकर उन परिवारों पर पड़ सकता है जिनका मासिक खाद्य बजट सीमित है।
सर्वे में 48% परिवारों द्वारा खरीदारी कम करना इसी बदलाव का संकेत देता है। अगर कीमतों में तेजी आगे भी जारी रहती है तो उपभोक्ता कम मात्रा में अंडे खरीदने, खरीदारी की आवृत्ति घटाने या दूसरे प्रोटीन स्रोतों की ओर जाने पर मजबूर हो सकते हैं।
अंडों की कीमत और उपभोक्ताओं पर असर: प्रमुख आंकड़े
| मुद्दा | सर्वे का आंकड़ा |
|---|---|
| कीमत बढ़ने पर खरीदारी घटाने वाले परिवार | 48% |
| सस्ते विकल्प/दूसरे स्रोत अपनाने वाले | 10% |
| पहले जितनी मात्रा में खरीद जारी रखने वाले | 37% |
| कीमत में 10-25% बढ़ोतरी बताने वाले | 31% |
| कीमत में 25-50% बढ़ोतरी बताने वाले | 31% |
| कीमत में 10% तक बढ़ोतरी बताने वाले | 22% |
| मिलावट को लेकर बेहद चिंतित | 70% |
| मिलावट को लेकर कुछ हद तक चिंतित | 20% |
| कुल मिलाकर मिलावट को लेकर चिंतित | 90% |
निष्कर्ष
अंडों की बढ़ती कीमत ने अब सिर्फ पोल्ट्री कारोबार और सप्लाई चेन को ही प्रभावित नहीं किया है, बल्कि इसका असर सीधे उपभोक्ताओं की खरीदारी पर भी दिखने लगा है। सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि करीब आधे परिवार कीमत बढ़ने के बाद अपनी खरीदारी घटा रहे हैं। दूसरी तरफ, अंडों की गुणवत्ता और मिलावट को लेकर भी बड़ी संख्या में उपभोक्ता चिंतित हैं।
आने वाले सर्दियों के मौसम में मांग बढ़ने के कारण अंडों की कीमतों पर दबाव बना रहता है या नहीं, यह उत्पादन लागत, पोल्ट्री फीड की कीमत और बाजार में सप्लाई पर निर्भर करेगा।


