Egg Price Hike: बारिश, बढ़ती मांग और महंगे ईंधन ने बढ़ाए अंडे-चिकन के दाम
नई दिल्ली। देशभर में खाद्य महंगाई को लेकर चर्चा के बीच अब अंडे और चिकन की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है। आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले एक सप्ताह के दौरान अंडे की कीमत में करीब ₹10 प्रति दर्जन और चिकन के दाम में लगभग ₹30 प्रति किलोग्राम तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पोल्ट्री कारोबार से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि इस बार गर्मी के मौसम में मांग कम होने के बजाय बढ़ गई है, जबकि उत्पादन और सप्लाई पर कई तरह के दबाव बने हुए हैं।
अंडा और चिकन देश के करोड़ों लोगों के लिए प्रोटीन का सबसे सुलभ स्रोत माना जाता है। ऐसे में कीमतों में अचानक आई यह तेजी आम उपभोक्ताओं के बजट पर असर डाल सकती है। खासकर ऐसे समय में जब सब्जियों, दालों और अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
कितनी बढ़ी हैं अंडे और चिकन की कीमतें?
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स और व्यापारियों के अनुसार, आंध्र प्रदेश के कई शहरों में अंडे की कीमत पिछले सप्ताह ₹72-78 प्रति दर्जन के बीच थी, जो अब बढ़कर ₹84-90 प्रति दर्जन तक पहुंच गई है। यानी महज एक सप्ताह में प्रति दर्जन लगभग ₹10 तक का इजाफा हुआ है।
वहीं चिकन की कीमतों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली है। विशाखापत्तनम के मधुरवाड़ा क्षेत्र समेत कई बाजारों में ड्रेस्ड ब्रॉयलर चिकन का रेट ₹240 प्रति किलो से बढ़कर करीब ₹270 प्रति किलो तक पहुंच गया है। यानी उपभोक्ताओं को अब प्रति किलो चिकन खरीदने के लिए पहले की तुलना में लगभग ₹30 अधिक खर्च करना पड़ रहा है।
व्यापारियों का कहना है कि यदि मौजूदा परिस्थितियां बनी रहीं तो आने वाले दिनों में कीमतों में और बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता।
बारिश ने बदल दिया मांग का समीकरण
आमतौर पर गर्मियों के दौरान अंडे और चिकन की मांग कुछ हद तक कमजोर पड़ जाती है। लेकिन इस बार स्थिति अलग दिखाई दे रही है। आंध्र प्रदेश और दक्षिण भारत के कई इलाकों में समय से पहले बारिश और मौसम में बदलाव के कारण लोगों की खानपान की आदतों में परिवर्तन देखने को मिला है।
स्थानीय पोल्ट्री कारोबारियों के अनुसार, बारिश के दिनों में गर्म भोजन और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। इसी वजह से अंडे और चिकन की खपत में अचानक तेजी आई है। मांग बढ़ने के बावजूद सप्लाई उसी गति से नहीं बढ़ पाई, जिससे कीमतों पर दबाव बन गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य बाजार में मांग और आपूर्ति के बीच थोड़ा सा असंतुलन भी कीमतों को तेजी से ऊपर ले जा सकता है, खासकर उन उत्पादों में जिनकी शेल्फ लाइफ सीमित होती है।
मई में बढ़ी मृत्युदर से प्रभावित हुआ उत्पादन
पोल्ट्री उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि मई महीने में अत्यधिक गर्मी और तापमान बढ़ने के कारण मुर्गियों की मृत्युदर में वृद्धि दर्ज की गई थी। इसका सीधा असर अंडा उत्पादन और ब्रॉयलर सप्लाई पर पड़ा।
उच्च तापमान के दौरान पक्षियों पर हीट स्ट्रेस का खतरा बढ़ जाता है। इससे उनकी उत्पादकता कम हो जाती है और कई मामलों में मृत्यु दर भी बढ़ जाती है। परिणामस्वरूप बाजार में उपलब्ध अंडों और चिकन की मात्रा घट जाती है।
जब उत्पादन घटता है और मांग बढ़ती है तो कीमतों में वृद्धि होना स्वाभाविक है। व्यापारियों का कहना है कि वर्तमान मूल्य वृद्धि के पीछे यह भी एक प्रमुख कारण है।
ईंधन की बढ़ती लागत ने बढ़ाया दबाव
अंडे और चिकन की कीमतों में वृद्धि के पीछे एक और महत्वपूर्ण कारण परिवहन लागत को माना जा रहा है। पोल्ट्री उत्पादों की सप्लाई बड़े पैमाने पर ट्रकों और अन्य मालवाहक वाहनों के जरिए की जाती है।
व्यापारियों के अनुसार, डीजल की लागत और लॉजिस्टिक खर्च बढ़ने से अंडे और चिकन को फार्म से बाजार तक पहुंचाने का खर्च बढ़ गया है। इसका असर सीधे खुदरा कीमतों पर दिखाई दे रहा है।
कई व्यापारियों ने यह भी कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। इससे ईंधन की कीमतों और उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है, जिसका प्रभाव विभिन्न खाद्य उत्पादों की सप्लाई चेन पर भी पड़ रहा है।
भारत के पोल्ट्री उद्योग के लिए क्यों महत्वपूर्ण है आंध्र प्रदेश?
आंध्र प्रदेश देश के सबसे बड़े अंडा उत्पादक राज्यों में शामिल है। यहां से बड़ी मात्रा में अंडों की आपूर्ति देश के विभिन्न हिस्सों में की जाती है। इसके अलावा राज्य से विदेशों में भी अंडों का निर्यात होता है।
यही वजह है कि यदि आंध्र प्रदेश में अंडे और पोल्ट्री उत्पादों की कीमतों में बड़ा बदलाव आता है तो उसका असर दूसरे राज्यों के बाजारों पर भी दिखाई दे सकता है। पोल्ट्री उद्योग के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में देश के अन्य राज्यों में भी अंडे और चिकन की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
उपभोक्ताओं पर क्या पड़ेगा असर?
अंडा और चिकन मध्यम वर्ग तथा निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए अपेक्षाकृत सस्ता प्रोटीन स्रोत माना जाता है। कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होने पर घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
होटल, रेस्तरां, फूड स्टॉल और कैटरिंग व्यवसायों की लागत भी बढ़ सकती है। इससे तैयार खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना है।
यदि उत्पादन सामान्य स्तर पर लौटता है और सप्लाई सुधरती है तो आने वाले सप्ताहों में कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि फिलहाल बाजार में तेजी का रुख बना हुआ दिखाई दे रहा है।
निष्कर्ष
आंध्र प्रदेश में अंडे और चिकन की कीमतों में आई हालिया तेजी केवल स्थानीय मांग का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे मौसम, सप्लाई में कमी, पोल्ट्री फार्मों में बढ़ी मृत्युदर और परिवहन लागत जैसे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मांग मजबूत बनी रही और सप्लाई पर दबाव जारी रहा तो आने वाले दिनों में देश के अन्य राज्यों में भी कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। ऐसे में उपभोक्ताओं और पोल्ट्री उद्योग दोनों की नजर अब उत्पादन और बाजार की अगली चाल पर टिकी हुई है।


