देश में E20 पेट्रोल को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है। सोशल मीडिया पर कुछ वाहन मालिक E20 पेट्रोल से माइलेज कम होने और इंजन पर असर पड़ने की शिकायत कर रहे हैं। इस बीच केंद्र सरकार ने अपनी इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति का बचाव करते हुए साफ कहा है कि अगर देश E20 से वापस E10 पेट्रोल पर लौटता है, तो इथेनॉल उत्पादन और उससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर में हुआ हजारों करोड़ रुपये का निवेश खतरे में पड़ सकता है।
Highlights
- E20 पेट्रोल को लेकर जारी विवाद के बीच सरकार ने इथेनॉल नीति का बचाव किया।
- सरकार का कहना है कि E10 पर लौटने से हजारों करोड़ रुपये का निवेश प्रभावित होगा।
- इथेनॉल उत्पादन और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बैंकों ने बड़े पैमाने पर फंडिंग की है।
- शुद्ध पेट्रोल, E10 और E20 तीनों विकल्प देने के सुझाव को सरकार ने खारिज किया।
- सरकार ने माना कि कुछ वाहनों में माइलेज 3-5% तक कम हो सकता है, लेकिन इंजन खराब होने के दावों को गलत बताया।
E20 पेट्रोल पर सरकार ने क्यों दी सफाई?
E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। कुछ लोग कह रहे हैं कि इससे गाड़ियों का माइलेज घट रहा है, जबकि कुछ का दावा है कि इंजन, फ्यूल टैंक और रबर पार्ट्स को नुकसान पहुंच सकता है।
इन दावों के बीच पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अब तक ऐसे दावों की पुष्टि करने वाला कोई वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आया है। मंत्रालय के अनुसार, समय-समय पर रबर होज खराब होने, इंजन सीज होने और फ्यूल टैंक में जंग लगने जैसी अफवाहें फैलती रही हैं, लेकिन जांच में इनकी पुष्टि नहीं हुई।
E10 पर लौटे तो क्यों होगा हजारों करोड़ का नुकसान?
सरकार के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में इथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश हुआ है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने इथेनॉल प्लांट, डिस्टिलरी और संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए हर साल करीब 1 लाख करोड़ रुपये तक की फंडिंग उपलब्ध कराई है।
मंत्रालय का कहना है कि यदि अब E20 से वापस E10 पेट्रोल पर लौटने का फैसला लिया जाता है, तो:
- इथेनॉल उत्पादन क्षमता का बड़ा हिस्सा बेकार हो सकता है।
- किसानों, सहकारी समितियों और निजी निवेशकों का निवेश प्रभावित होगा।
- सरकारी और निजी वित्तीय संस्थानों का पैसा जोखिम में पड़ जाएगा।
- राष्ट्रीय इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को बड़ा झटका लगेगा।
शुद्ध पेट्रोल, E10 और E20 तीनों विकल्प क्यों नहीं?
कुछ विशेषज्ञों और उपभोक्ताओं ने सुझाव दिया है कि पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को शुद्ध पेट्रोल, E10 और E20 में से अपनी पसंद चुनने की सुविधा दी जाए, ठीक वैसे ही जैसे आज रेगुलर और प्रीमियम पेट्रोल उपलब्ध है।
हालांकि सरकार ने इस सुझाव को स्वीकार नहीं किया।
मंत्रालय के अनुसार देशभर में अलग-अलग ग्रेड के पेट्रोल की सप्लाई बनाए रखना बेहद जटिल होगा। इससे:
- लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ेगी।
- अलग-अलग स्टोरेज और हैंडलिंग की जरूरत होगी।
- इन्वेंट्री मैनेजमेंट मुश्किल होगा।
- पेट्रोलियम कंपनियों की ऑपरेशनल एफिशिएंसी प्रभावित होगी।
क्या E20 पेट्रोल से माइलेज कम होता है?
सरकार ने स्वीकार किया है कि E20 पेट्रोल के उपयोग से कुछ वाहनों में 3 से 5 प्रतिशत तक माइलेज कम हो सकता है, क्योंकि इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल की तुलना में थोड़ी कम होती है।
हालांकि सरकार का कहना है कि यह अंतर सीमित है और इसके बदले देश को आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने जैसे बड़े फायदे मिलते हैं।
इथेनॉल की कीमत कैसे तय होती है?
सरकार इथेनॉल की खरीद फीडस्टॉक यानी कच्चे माल के आधार पर तय कीमतों पर करती है ताकि किसानों को उचित मूल्य मिल सके।
मौजूदा सप्लाई वर्ष के लिए प्रमुख दरें इस प्रकार हैं:
- C-मोलासेस से बना इथेनॉल: ₹57.97 प्रति लीटर
- मक्के (मेज़) से बना इथेनॉल: ₹71.86 प्रति लीटर
सरकार का कहना है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तब E20 तैयार करना अपेक्षाकृत महंगा पड़ सकता है। लेकिन यदि कच्चा तेल 120-130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाए, तो इथेनॉल मिश्रित ईंधन अधिक किफायती साबित होता है।
सरकार की दलील क्या है?
सरकार का कहना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम केवल ईंधन नीति नहीं बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, किसानों की आय बढ़ाने और विदेशी तेल आयात पर निर्भरता कम करने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। ऐसे में केवल माइलेज के आधार पर पूरी नीति का मूल्यांकन करना उचित नहीं होगा।
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