नई दिल्ली: भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए बड़ी राहत की खबर है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने विदेशी निवेश (FDI) वाली इन्वेंट्री आधारित ई-कॉमर्स निर्यातक कंपनियों के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इन नियमों का उद्देश्य भारतीय MSMEs को वैश्विक बाजारों तक आसान पहुंच दिलाना और ई-कॉमर्स निर्यात को बढ़ावा देना है।
सरकार का मानना है कि नए नियमों से भारतीय उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ेगी और देश के छोटे उद्योगों को वैश्विक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए नए ग्राहक मिलेंगे।
Highlights
- DGFT ने इन्वेंट्री आधारित ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए नई गाइडलाइंस जारी की।
- विदेशी निवेश वाली कंपनियों को Exporter on Record (EOR) के रूप में पंजीकरण कराना होगा।
- केवल पुष्ट (Confirmed) एक्सपोर्ट ऑर्डर मिलने पर ही भारतीय निर्माताओं से खरीदारी की जा सकेगी।
- घरेलू बाजार में बिक्री की अनुमति नहीं होगी।
- लौटाए गए (Returned) सामान को दोबारा केवल निर्यात करना होगा।
- सरकार को उम्मीद है कि इससे MSMEs को वैश्विक बाजार तक पहुंच मिलेगी।
क्यों लाई गई नई गाइडलाइन?
पिछले महीने उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नियमों में बदलाव करते हुए केवल निर्यात के उद्देश्य से काम करने वाली इन्वेंट्री आधारित ई-कॉमर्स कंपनियों में 100% FDI की अनुमति दी थी।
अब DGFT ने इस व्यवस्था को लागू करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं, ताकि निर्यात प्रक्रिया पारदर्शी और नियमबद्ध तरीके से संचालित हो सके।
क्या होंगे नए नियम?
नई गाइडलाइंस के तहत विदेशी निवेश वाली इन्वेंट्री आधारित ई-कॉमर्स कंपनियों को कई शर्तों का पालन करना होगा।
1. Exporter on Record (EOR) बनना होगा
सभी पात्र ई-कॉमर्स कंपनियों को Exporter on Record (EOR) के रूप में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। निर्यात से जुड़े सभी नियमों और दस्तावेजों की जिम्मेदारी EOR की होगी।
2. केवल Confirmed Export Order पर खरीदारी
कंपनियां भारतीय निर्माताओं या MSMEs से सामान तभी खरीद सकेंगी, जब उनके पास पहले से वैध और पुष्ट निर्यात ऑर्डर मौजूद होगा।
यानी संभावित मांग या अनुमान के आधार पर स्टॉक तैयार करने की अनुमति नहीं होगी।
3. घरेलू बाजार में बिक्री पर रोक
इन नियमों के तहत खरीदा गया सामान भारत के घरेलू बाजार में नहीं बेचा जा सकेगा। इसका उपयोग केवल निर्यात के लिए ही किया जाएगा।
4. लौटा हुआ माल भी भारत में नहीं बिकेगा
यदि विदेश भेजा गया सामान किसी कारण से वापस लौट आता है, तो उसे भारत में बेचने की अनुमति नहीं होगी। ऐसे उत्पादों को फिर से निर्यात करना अनिवार्य होगा।
MSMEs को कैसे मिलेगा फायदा?
सरकार का मानना है कि नई नीति से भारत के लाखों MSMEs को वैश्विक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तक पहुंच मिलेगी।
इसके प्रमुख लाभ होंगे—
- छोटे उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय खरीदार मिलेंगे।
- निर्यात बढ़ने से उत्पादन और रोजगार में वृद्धि होगी।
- भारतीय उत्पादों की वैश्विक पहचान मजबूत होगी।
- विदेशी निवेश से ई-कॉमर्स निर्यात क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी।
ई-कॉमर्स निर्यात में भारत अभी काफी पीछे
भारत का ई-कॉमर्स निर्यात अभी भी वैश्विक स्तर की तुलना में काफी कम है।
- भारत का वर्तमान ई-कॉमर्स निर्यात: लगभग 2 अरब डॉलर
- वैश्विक ई-कॉमर्स निर्यात: करीब 800 अरब डॉलर
- चीन का वार्षिक ई-कॉमर्स निर्यात: लगभग 350 अरब डॉलर
अनुमान है कि वर्ष 2030 तक वैश्विक ई-कॉमर्स निर्यात बाजार 2 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है। ऐसे में भारत के लिए इस क्षेत्र में बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं।
सरकार का लक्ष्य
सरकार का उद्देश्य भारत को वैश्विक ई-कॉमर्स निर्यात हब बनाना है। नई गाइडलाइंस के जरिए विदेशी निवेश आकर्षित करने, MSMEs को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने और “मेक इन इंडिया” उत्पादों की वैश्विक पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
निष्कर्ष
DGFT की नई गाइडलाइंस भारतीय ई-कॉमर्स निर्यात व्यवस्था में बड़ा बदलाव साबित हो सकती हैं। इससे विदेशी निवेश वाली कंपनियों के लिए स्पष्ट नियम तय होंगे, वहीं MSMEs को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने उत्पाद बेचने का बेहतर अवसर मिलेगा। यदि इन नियमों का प्रभावी ढंग से पालन होता है, तो आने वाले वर्षों में भारत का ई-कॉमर्स निर्यात तेज़ी से बढ़ सकता है।


