Anil Agarwal Vedanta: वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने साल 2003 की एक प्रेरणादायक घटना साझा की है। उन्होंने बताया कि कैसे तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समर्थन से वेदांता को लंदन स्टॉक एक्सचेंज (LSE) में लिस्ट होने की मंजूरी मिली। यह फैसला न सिर्फ कंपनी बल्कि भारतीय कॉरपोरेट इतिहास के लिए भी एक बड़ा पड़ाव साबित हुआ।
वेदांता (Vedanta) ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साल 2003 की एक यादगार घटना साझा करते हुए बताया कि किस तरह तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भरोसे और समर्थन ने उनकी कंपनी के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार के दरवाजे खोल दिए।
उन्होंने बताया कि उस समय उन्हें महसूस होता था कि भारतीय कंपनियों को उनकी वास्तविक क्षमता और विकास के अनुरूप वैश्विक पहचान और मूल्यांकन (Valuation) नहीं मिल रहा था। इसी सोच के साथ उन्होंने वेदांता को लंदन स्टॉक एक्सचेंज (London Stock Exchange – LSE) में सूचीबद्ध (Listing) कराने का फैसला किया।
विदेशी लिस्टिंग के नियम थे बेहद सख्त
10 December 2003!
मुझे आज भी London की वो सुबह याद है, जब Vedanta के साथ-साथ, हिंदुस्तान भी इतिहास रचने के लिए तैयार था।
उस समय मुझे अक्सर लगता था कि भारतीय businesses को सही value और growth नहीं मिल रही।
मैंने तय कर लिया कि Vedanta को London Stock Exchange पर list करेंगे।
पर… pic.twitter.com/DyX1GE6eCb
— Anil Agarwal (@AnilAgarwal_Ved) August 5, 2026 साल 2003 में भारतीय कंपनियों के लिए विदेशी शेयर बाजारों में लिस्टिंग करना आसान नहीं था। विदेशी मुद्रा और सीमा पार निवेश से जुड़े नियम काफी कड़े थे। इसके अलावा LSE में लिस्टिंग के लिए भारत सरकार से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेना भी अनिवार्य था।
अनिल अग्रवाल ने बताया कि यही मंजूरी हासिल करने के लिए उन्हें दिल्ली के कई सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़े और कई अधिकारियों से मुलाकात करनी पड़ी।
जब अटल बिहारी वाजपेयी से हुई मुलाकात
कई दिनों की कोशिशों के बाद उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से अपनी बात रखने का अवसर मिला।
अनिल अग्रवाल के अनुसार, उन्होंने प्रधानमंत्री को विस्तार से बताया कि विदेशी शेयर बाजार में लिस्टिंग से भारत की छवि मजबूत होगी और देश में विदेशी निवेश आएगा। पूरी बात सुनने के बाद वाजपेयी ने तत्कालीन वित्त मंत्री जसवंत सिंह की ओर मुड़कर मुस्कुराते हुए कहा—
“लड़का ठीक लगता है। हमें इसकी मदद करनी चाहिए, देश में फॉरेन एक्सचेंज आएगा।”
अनिल अग्रवाल ने कहा कि यह वाक्य आज भी उनके दिल में हमेशा के लिए दर्ज है।
मिली NOC, फिर खुल गया लंदन का रास्ता
सरकार से NOC मिलने के बाद अनिल अग्रवाल लंदन लौटे और वेदांता की लिस्टिंग की प्रक्रिया पूरी हुई। इसके बाद वेदांता लंदन स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी।
उन्होंने बताया कि यह उपलब्धि सिर्फ वेदांता के लिए नहीं बल्कि पूरे भारतीय कॉरपोरेट सेक्टर के लिए गर्व का विषय थी। बाद में कंपनी ने दुनिया के प्रतिष्ठित FTSE 100 Index में भी अपनी जगह बनाई, जिसने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच उसकी पहचान और मजबूत की।
भारतीय कंपनियों के लिए खुला नया रास्ता
अनिल अग्रवाल ने कहा कि उस दौर में विदेशी पूंजी जुटाना भारतीय कंपनियों के लिए आसान नहीं था। वेदांता की लिस्टिंग ने यह साबित किया कि भारतीय कंपनियां भी वैश्विक पूंजी बाजार में सफलतापूर्वक अपनी पहचान बना सकती हैं।
उन्होंने कहा कि यदि सही सोच, साहस और सरकारी सहयोग मिले तो भारतीय उद्योग दुनिया के किसी भी बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकता है।
दुष्यंत कुमार की पंक्तियों से दिया प्रेरणा का संदेश
अपनी पोस्ट के अंत में अनिल अग्रवाल ने प्रसिद्ध कवि दुष्यंत कुमार की मशहूर पंक्तियां साझा करते हुए लोगों को जोखिम उठाने और बड़े सपने देखने का संदेश दिया।
“कौन कहता है आसमान में छेद नहीं होता,
एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों।”
उन्होंने लोगों से यह भी पूछा कि उनके जीवन में ऐसा कौन-सा फैसला या जोखिम था जिसने उनकी दिशा बदल दी। उनका मानना है कि ऐसी प्रेरक कहानियां दूसरों के लिए भी नई उम्मीद और सीख बन सकती हैं।
वेदांता के लिए क्यों अहम थी यह लिस्टिंग?
लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टिंग के बाद वेदांता को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों तक पहुंच मिली, विदेशी पूंजी जुटाने में आसानी हुई और कंपनी की वैश्विक विश्वसनीयता बढ़ी। इसके साथ ही भारतीय कॉरपोरेट जगत को भी यह संदेश मिला कि सही रणनीति और दूरदृष्टि के साथ वैश्विक बाजारों में सफलता हासिल की जा सकती है।


