Defense Export: भारत सरकार ने डिफेंस सेक्टर में एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए नियमों में बड़ा बदलाव किया है। रक्षा मंत्रालय ने डिफेंस एक्सपोर्ट से जुड़े स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को आसान करने के साथ-साथ ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस (OGEL) के नियमों में भी अहम बदलाव किए हैं। सरकार का मानना है कि इन सुधारों से भारतीय डिफेंस कंपनियों के लिए विदेशी बाजारों में कारोबार करना आसान होगा और रक्षा उत्पादों के निर्यात को और गति मिलेगी।
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब अलग-अलग कैटेगरी के लिए लागू तीन OGEL फ्रेमवर्क की जगह एक ही OGEL फ्रेमवर्क होगा। साथ ही, इसकी वैलिडिटी को दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दिया गया है। इसका मतलब है कि कंपनियों को बार-बार लाइसेंस के नवीनीकरण और उससे जुड़े अनुपालन की प्रक्रिया से राहत मिलेगी।
डिफेंस एक्सपोर्ट के नियमों में क्या बदला?
रक्षा मंत्रालय की ओर से किए गए बदलावों का मुख्य उद्देश्य भारतीय कंपनियों के लिए रक्षा उत्पादों के निर्यात की प्रक्रिया को तेज और आसान बनाना है। संशोधित SOP के तहत कई मामलों में कंपनियों को एक्सपोर्ट से पहले होने वाली सलाह-मशविरा प्रक्रिया से राहत दी गई है।
खासकर गैर-घातक डिफेंस प्रोडक्ट्स के निर्यात के मामले में प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। हालांकि, संवेदनशील देशों के मामले में जरूरी सुरक्षा उपाय और प्रतिबंध लागू रहेंगे।
इसके अलावा, इंटरनेशनल टेंडर और डिफेंस एग्जिबिशन के लिए सामान भेजने के मामले में भी प्रक्रिया आसान की गई है। अब ऐसे मामलों में सभी तरह के सामान के एक्सपोर्ट के लिए पहले की तरह कंसल्टेशन की जरूरत नहीं होगी।
इस बदलाव से भारतीय कंपनियां विदेशी टेंडर में तेजी से हिस्सा ले सकेंगी और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में अपने रक्षा उत्पादों को कम प्रशासनिक बाधाओं के साथ प्रदर्शित कर पाएंगी।
3 OGEL की जगह अब एक ही फ्रेमवर्क
OGEL यानी Open General Export Licence ऐसा एक्सपोर्ट ऑथराइजेशन है, जिसके जरिए पात्र कंपनियों को हर शिपमेंट के लिए अलग-अलग अनुमति लेने की जरूरत कम हो जाती है।
सरकार ने अब बड़े प्लेटफॉर्म और इक्विपमेंट, पार्ट्स एवं कंपोनेंट्स और कंपनी के भीतर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से जुड़े तीन अलग-अलग OGEL SOPs को मिलाकर एक सिंगल OGEL फ्रेमवर्क तैयार किया है।
इससे डिफेंस एक्सपोर्ट से जुड़ी प्रक्रियाओं को समझना और लागू करना कंपनियों के लिए आसान होने की उम्मीद है।
2 साल से बढ़कर 3 साल हुई OGEL की वैलिडिटी
नए नियमों में OGEL की वैधता को भी बढ़ाया गया है। पहले इसकी अवधि दो साल थी, जिसे अब तीन साल कर दिया गया है।
इसका सीधा फायदा उन कंपनियों को मिल सकता है जो लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट या लगातार चलने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स पर काम करती हैं। उन्हें लाइसेंस के नवीनीकरण और संबंधित कंप्लायंस की प्रक्रिया बार-बार नहीं करनी पड़ेगी।
सरकार के इस कदम से डिफेंस कंपनियों की प्रशासनिक लागत और समय दोनों कम होने की उम्मीद है।
41 देशों की सीमा खत्म, अब दायरा सभी देशों तक
OGEL के नियमों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव इसके भौगोलिक दायरे को लेकर है। पहले यह सुविधा 41 देशों तक सीमित थी। अब इसका दायरा बढ़ाकर सामान्य तौर पर सभी देशों तक कर दिया गया है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारतीय कंपनियां किसी भी देश में बिना किसी प्रतिबंध के डिफेंस प्रोडक्ट एक्सपोर्ट कर सकेंगी। नेगेटिव या संवेदनशील देशों के साथ-साथ उन देशों पर प्रतिबंध लागू रहेंगे, जिनके खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से प्रतिबंध या हथियारों से संबंधित रोक मौजूद है।
इसलिए कंपनियों को एक्सपोर्ट से पहले संबंधित देश और उत्पाद से जुड़े मौजूदा नियमों का पालन करना होगा।
बार-बार एक्सपोर्ट ऑथराइजेशन लेने की जरूरत होगी कम
OGEL व्यवस्था का एक बड़ा फायदा यह है कि पात्र एक्सपोर्टर्स को एक ही मंजूरी के तहत खास डिफेंस आइटम की कई खेप भेजने में सुविधा मिलती है।
पहले हर शिपमेंट के लिए अलग-अलग अनुमति की जरूरत पड़ने से प्रक्रिया लंबी हो सकती थी। नए फ्रेमवर्क के बाद कंपनियों के लिए अपने एक्सपोर्ट प्लान को लागू करना ज्यादा आसान होने की उम्मीद है।
इसका खास फायदा उन कंपनियों को हो सकता है जिन्हें लंबे समय के लिए विदेशी ग्राहकों से ऑर्डर मिलते हैं।
इंटरनेशनल टेंडर में कंपनियों को फायदा
भारत की डिफेंस कंपनियां अब तेजी से विदेशी बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय टेंडर में समय पर हिस्सा लेना काफी महत्वपूर्ण होता है।
नए SOP से टेंडर और एग्जिबिशन के लिए एक्सपोर्ट प्रक्रिया सरल होने से कंपनियां संभावित ग्राहकों के सामने अपने प्रोडक्ट जल्दी पेश कर सकेंगी।
सरकार की कोशिश है कि अनावश्यक प्रक्रियाओं को कम करके भारतीय डिफेंस इंडस्ट्री को ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा बनाया जाए।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा डिफेंस प्रोडक्शन
भारत का डिफेंस सेक्टर पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विस्तार कर रहा है। देश का डिफेंस प्रोडक्शन ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है।
इसी तरह डिफेंस एक्सपोर्ट भी बढ़कर ₹38,424 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। सरकार अब एक्सपोर्ट प्रक्रिया को आसान बनाकर इस ग्रोथ को और तेज करना चाहती है।
सरकार की रणनीति का फोकस घरेलू रक्षा उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाने पर है।
कंपनियों और पूरे डिफेंस सेक्टर पर क्या असर होगा?
OGEL नियमों में बदलाव और एक्सपोर्ट SOP को आसान किए जाने से डिफेंस कंपनियों के लिए कई स्तरों पर राहत की उम्मीद है।
- एक्सपोर्ट अप्रूवल की प्रक्रिया पहले की तुलना में आसान होगी।
- बार-बार लाइसेंस लेने की जरूरत कम हो सकती है।
- लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट वाली कंपनियों को फायदा मिलेगा।
- इंटरनेशनल टेंडर में हिस्सा लेना आसान होगा।
- विदेशी डिफेंस एग्जिबिशन में प्रोडक्ट प्रदर्शित करने की प्रक्रिया सरल होगी।
- तीन अलग-अलग OGEL फ्रेमवर्क की जगह एक व्यवस्था लागू होगी।
- OGEL की वैलिडिटी तीन साल होने से रिन्यूअल का बोझ घटेगा।
- भारतीय डिफेंस कंपनियों के लिए नए विदेशी बाजारों तक पहुंच आसान हो सकती है।
सरकार को एक्सपोर्ट बढ़ने की उम्मीद
रक्षा मंत्रालय के इन बदलावों का व्यापक उद्देश्य सिर्फ कागजी प्रक्रिया को कम करना नहीं है। सरकार चाहती है कि भारतीय डिफेंस कंपनियां घरेलू उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल करके वैश्विक बाजार में ज्यादा से ज्यादा हिस्सेदारी हासिल करें।
डिफेंस प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट दोनों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद अब आसान एक्सपोर्ट नियम भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय कारोबार बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। खासकर लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट, विदेशी टेंडर और इंटरनेशनल डिफेंस एग्जिबिशन में इन बदलावों का असर देखने को मिल सकता है।
हालांकि, संवेदनशील देशों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से जुड़े मामलों में मौजूदा सुरक्षा नियम लागू रहेंगे। इसलिए नए OGEL फ्रेमवर्क से प्रक्रिया आसान जरूर होगी, लेकिन रणनीतिक और संवेदनशील रक्षा उत्पादों के निर्यात पर जरूरी नियंत्रण जारी रहेगा।


