नई दिल्ली: आज के दौर में कॉरपोरेट सेक्टर सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सामाजिक विकास में भी उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसी उद्देश्य से देश में कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) कानून लागू किया गया, ताकि कंपनियां समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान में योगदान दे सकें। कई बड़ी कंपनियां इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं। इनमें वेदांता ग्रुप का नाम प्रमुखता से लिया जाता है, जो अपने ‘नंद घर’ प्रोजेक्ट के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और शुरुआती बाल विकास को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
ग्रुप के अनुसार, वर्तमान में देश के 18 राज्यों में 15,000 से अधिक नंद घर केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से 4 लाख से अधिक महिलाओं और 5 लाख से अधिक बच्चों तक स्वास्थ्य सेवाएं, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा जैसी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।
CSR के जरिए सामाजिक बदलाव की पहल
भारत में CSR का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में स्थायी बदलाव लाना है। वेदांता ग्रुप ने इसी सोच के साथ अपने सामाजिक कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया है।
समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के नेतृत्व में चल रही कई सामाजिक पहलों में नंद घर परियोजना सबसे प्रमुख मानी जाती है। इसका उद्देश्य देश के पारंपरिक आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं और बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाएं मिल सकें।
क्या है ‘नंद घर’ परियोजना?
नंद घर परियोजना के तहत मौजूदा आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक स्वरूप दिया जाता है। यहां बच्चों को शुरुआती शिक्षा, संतुलित पोषण और स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके साथ ही महिलाओं के लिए कौशल विकास और आजीविका से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जाते हैं।
इन केंद्रों में कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, जिनमें शामिल हैं—
- बच्चों के लिए प्रारंभिक शिक्षा की व्यवस्था।
- पौष्टिक भोजन एवं पोषण कार्यक्रम।
- माताओं और बच्चों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण।
- डिजिटल शिक्षा और स्मार्ट लर्निंग सुविधाएं।
- महिलाओं के लिए कौशल विकास एवं रोजगार उन्मुख प्रशिक्षण।
18 राज्यों में फैला है नंद घर का नेटवर्क
वेदांता ग्रुप के मुताबिक, नंद घर का नेटवर्क अब देश के 18 राज्यों तक पहुंच चुका है। 15,000 से अधिक केंद्रों के माध्यम से लाखों परिवारों को स्वास्थ्य और पोषण संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
ग्रुप का दावा है कि इस पहल के जरिए अब तक—
- 4 लाख से अधिक महिलाओं को स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी सेवाओं का लाभ मिला है।
- 5 लाख से अधिक बच्चों तक पोषण और प्रारंभिक बाल विकास की सुविधाएं पहुंचाई गई हैं।
- सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के साथ समन्वय स्थापित कर स्थानीय स्तर पर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को मजबूत बनाया जा रहा है।
ग्रामीण भारत में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर विशेष फोकस
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कुपोषण, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और जागरूकता का अभाव बड़ी चुनौती बना हुआ है। नंद घर परियोजना इन समस्याओं को दूर करने के लिए स्थानीय समुदाय, आंगनवाड़ी व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के साथ मिलकर काम करती है।
इस पहल का उद्देश्य केवल बच्चों को पोषण देना नहीं, बल्कि गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और छोटे बच्चों के संपूर्ण स्वास्थ्य एवं विकास को सुनिश्चित करना भी है।
विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान बढ़ी जागरूकता
हर वर्ष 1 अगस्त से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह (World Breastfeeding Week) मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, स्तनपान बच्चों के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास के लिए सबसे प्रभावी उपायों में से एक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल स्तनपान के महत्व की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि माताओं को सही स्वास्थ्य सेवाएं, पोषण संबंधी सलाह और सामुदायिक सहयोग भी उपलब्ध कराया जाना जरूरी है। नंद घर परियोजना इसी दिशा में जागरूकता बढ़ाने और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है।
महिला सशक्तिकरण को भी मिल रही मजबूती
नंद घर केवल बच्चों के विकास तक सीमित नहीं है। यहां महिलाओं को सिलाई, हस्तशिल्प, डिजिटल साक्षरता और अन्य रोजगारपरक कौशल का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिल रही है।
सामाजिक विकास में CSR की बढ़ती भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और निजी क्षेत्र की साझेदारी से शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण जैसे क्षेत्रों में बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। CSR के तहत संचालित ऐसी पहलें ग्रामीण भारत में सामाजिक बदलाव की गति को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
वेदांता ग्रुप का कहना है कि नंद घर परियोजना के माध्यम से भविष्य में भी अधिक से अधिक महिलाओं और बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा की सुविधाएं पहुंचाने का प्रयास जारी रहेगा।


