अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें एक बार फिर सुर्खियों में हैं। 13 मई 2026 को क्रूड ऑयल का भाव $106.44 प्रति बैरल दर्ज किया गया। हालांकि इसमें पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में $1.49 की गिरावट देखने को मिली है, लेकिन कीमतें अब भी बेहद ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव, सप्लाई को लेकर अनिश्चितता और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जुड़ी चिंताओं के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी अस्थिरता बनी हुई है। इसका असर भारत समेत दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं पर दिखाई दे रहा है।
आज कितना है Crude Oil का भाव?
Crude Oil Price Today
| तारीख | कीमत |
|---|---|
| 13 मई 2026 | $106.44 प्रति बैरल |
| बदलाव | गिरावट |
|---|---|
| आज का बदलाव | -$1.49 |
मई 2026 में कच्चे तेल का प्रदर्शन
Historical Crude Oil Price – May 2026
| विवरण | कीमत |
|---|---|
| 1 मई 2026 | $107.64 |
| 13 मई 2026 | $106.59 |
| मई का सबसे ऊंचा स्तर | $113.63 (4 मई) |
| मई का सबसे निचला स्तर | $100.63 (7 मई) |
| कुल प्रदर्शन | गिरावट |
| प्रतिशत बदलाव | -0.98% |
Source: Good Returns
क्यों बढ़ी कच्चे तेल की कीमतों में हलचल?
विशेषज्ञों के मुताबिक इस समय कई बड़े फैक्टर्स ऑयल मार्केट को प्रभावित कर रहे हैं।
इनमें शामिल हैं:
- अमेरिका-ईरान तनाव
- पश्चिम एशिया संकट
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरा
- वैश्विक सप्लाई बाधाएं
- और डॉलर की मजबूती।
अगर तेल सप्लाई प्रभावित होती है, तो दुनिया भर में ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है।
भारत पर क्या पड़ेगा असर?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। कच्चा तेल महंगा होने पर:
- पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं
- LPG और CNG की लागत बढ़ सकती है
- ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ सकता है
- और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
रुपये पर भी बढ़ा दबाव
विशेषज्ञों का कहना है कि महंगे कच्चे तेल से भारत का आयात बिल बढ़ता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर पड़ सकता है। हाल के दिनों में रुपया रिकॉर्ड निचले स्तरों के करीब पहुंचा और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ा है। यही वजह है कि सरकार और RBI दोनों ऊर्जा कीमतों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
सरकार क्यों कर रही ईंधन बचाने की अपील?
हाल ही में केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने:
- ईंधन की बचत
- गैर-जरूरी खर्च कम करने
- और विदेशी मुद्रा बचाने
की अपील की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार ऊंचे कच्चे तेल के दाम भारत के चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) पर असर डाल सकते हैं।
क्या आगे और महंगा होगा तेल?
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया संकट और गहराता है और सप्लाई बाधित होती है तो कच्चा तेल फिर $110-$115 प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच सकता है। हालांकि वैश्विक मांग कमजोर पड़ने या तनाव कम होने की स्थिति में कीमतों में गिरावट भी आ सकती है।
Crude Oil क्या होता है?
Crude Oil यानी कच्चा तेल लाखों साल पुराने पौधों और जीवों के अवशेषों से बना हाइड्रोकार्बन का मिश्रण होता है। इसी से पेट्रोल, डीजल, LPG, ATF और कई पेट्रोकेमिकल उत्पाद तैयार किए जाते हैं।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
ऊर्जा बाजार में बढ़ती अस्थिरता का असर शेयर बाजार, करेंसी मार्केट और कमोडिटी ट्रेडिंग पर भी दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञ निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रम, डॉलर इंडेक्स और OPEC+ फैसलों पर नजर रखने की सलाह दे रहे हैं।
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