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Reading: Cotton Import Duty: कपास आयात पर 5 महीने की ड्यूटी छूट, भारत के इस फैसले से बांग्लादेश को क्यों बढ़ी टेंशन?
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Cotton Import Duty: कपास आयात पर 5 महीने की ड्यूटी छूट, भारत के इस फैसले से बांग्लादेश को क्यों बढ़ी टेंशन?

Namam Sharma
Last updated: 2026/06/28 at 4:58 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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10 Min Read
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Cotton Import Customs Duty Waiver: भारत सरकार ने टेक्सटाइल और परिधान उद्योग को बड़ी राहत देते हुए कपास के आयात पर सभी प्रमुख सीमा शुल्कों से पांच महीने के लिए छूट देने का फैसला किया है। 1 जून 2026 से 30 अक्टूबर 2026 तक लागू रहने वाली यह छूट भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। वहीं, पड़ोसी देश बांग्लादेश के लिए यह फैसला चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है, क्योंकि वैश्विक गारमेंट बाजार में भारत और बांग्लादेश के बीच सीधी प्रतिस्पर्धा है।

Contents
आखिर सरकार को यह फैसला क्यों लेना पड़ा?टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योग को क्या फायदा होगा?MSME सेक्टर को मिलेगी सबसे बड़ी राहतबांग्लादेश की चिंता क्यों बढ़ गई?अमेरिका और यूरोप के बाजार में बढ़ सकती है भारत की हिस्सेदारीक्या भारतीय किसानों पर पड़ेगा असर?AEPC ने किया फैसले का स्वागतआगे क्या?निष्कर्ष

नई दिल्ली। भारत सरकार ने कपड़ा और परिधान उद्योग को राहत देने के उद्देश्य से कपास के आयात पर लगने वाली बेसिक कस्टम ड्यूटी और एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) को अस्थायी रूप से समाप्त करने का फैसला किया है। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार यह छूट 1 जून 2026 से लागू होकर 30 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से घरेलू टेक्सटाइल उद्योग को पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल उपलब्ध होगा और निर्माताओं को बढ़ती लागत के दबाव से राहत मिलेगी। ऐसे समय में जब वैश्विक सप्लाई चेन कई चुनौतियों का सामना कर रही है और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ रही है, यह फैसला भारतीय उद्योग के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आखिर सरकार को यह फैसला क्यों लेना पड़ा?

पिछले कुछ महीनों में कपास की उपलब्धता और कीमतों को लेकर उद्योग जगत की चिंताएं लगातार बढ़ रही थीं। कई टेक्सटाइल मिलों और गारमेंट निर्माताओं ने सरकार से मांग की थी कि आयातित कपास पर लगने वाले शुल्क को कम किया जाए ताकि उन्हें वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहने में मदद मिल सके। भारत दुनिया के सबसे बड़े कपास उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन टेक्सटाइल उद्योग की विशाल मांग को देखते हुए समय-समय पर आयात की भी आवश्यकता पड़ती है। जब घरेलू बाजार में कीमतें बढ़ती हैं या सप्लाई प्रभावित होती है, तब आयातित कपास उद्योग के लिए महत्वपूर्ण विकल्प बन जाती है। सरकार का मानना है कि शुल्क में अस्थायी छूट से उद्योग को पर्याप्त राहत मिलेगी और उत्पादन चक्र सुचारु रूप से चलता रहेगा।

टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योग को क्या फायदा होगा?

कपास टेक्सटाइल उद्योग का सबसे महत्वपूर्ण कच्चा माल है। कपास की लागत में कमी आने से इसका फायदा पूरी वैल्यू चेन को मिलने की संभावना है। सबसे पहले यार्न निर्माताओं की लागत घट सकती है। इसके बाद फैब्रिक निर्माता और फिर रेडीमेड गारमेंट कंपनियां भी कम लागत पर उत्पादन कर सकेंगी। इसका असर निर्यात क्षेत्र पर भी दिखाई दे सकता है क्योंकि भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर अपने उत्पाद बेच पाएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आयातित कपास सस्ती होने से उत्पादन लागत कम होगी, जिससे निर्यातकों के मार्जिन में सुधार आ सकता है। इसके अलावा घरेलू बाजार में भी कपास की उपलब्धता बढ़ने से सप्लाई संबंधी दबाव कम होगा।

MSME सेक्टर को मिलेगी सबसे बड़ी राहत

भारत के टेक्सटाइल सेक्टर का बड़ा हिस्सा छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) पर आधारित है। ये इकाइयां अक्सर कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं। जब कपास की कीमतें बढ़ती हैं तो बड़ी कंपनियों की तुलना में छोटे उद्योगों के लिए उत्पादन जारी रखना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में आयात शुल्क में छूट उन्हें राहत देने का काम करेगी। कम लागत पर कच्चा माल मिलने से MSME इकाइयां अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ा सकेंगी और वैश्विक ऑर्डर्स के लिए बेहतर प्रतिस्पर्धा कर पाएंगी। रोजगार के लिहाज से भी यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि टेक्सटाइल सेक्टर देश में करोड़ों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार देता है।

बांग्लादेश की चिंता क्यों बढ़ गई?

भारत सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा असर बांग्लादेश के गारमेंट उद्योग पर पड़ सकता है। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा रेडीमेड गारमेंट्स के निर्यात पर निर्भर है। देश के कुल निर्यात में कपड़ा और परिधान उद्योग का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है। अब तक बांग्लादेश को वैश्विक बाजार में लागत के मामले में बढ़त हासिल थी। वहां की कंपनियां कम लागत पर उत्पादन करके अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में मजबूत स्थिति बनाए हुए थीं। लेकिन भारत में आयातित कपास पर शुल्क हटने के बाद भारतीय कंपनियां भी कम लागत पर उत्पादन कर सकेंगी। इससे दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है। विशेष रूप से अमेरिका और यूरोप के बड़े खरीदार अब भारत की ओर अधिक आकर्षित हो सकते हैं यदि उन्हें बेहतर गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी कीमत दोनों एक साथ मिलती हैं।

अमेरिका और यूरोप के बाजार में बढ़ सकती है भारत की हिस्सेदारी

वैश्विक फैशन और रिटेल कंपनियां हमेशा ऐसे देशों की तलाश में रहती हैं जहां उत्पादन लागत कम हो और सप्लाई चेन मजबूत हो। भारत के पास पहले से ही विशाल उत्पादन क्षमता, कुशल श्रमिक और मजबूत औद्योगिक आधार मौजूद है। यदि कच्चे माल की लागत भी कम हो जाती है तो भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर पैदा हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में कई वैश्विक खरीदार अपने ऑर्डर्स का एक हिस्सा भारत की ओर स्थानांतरित कर सकते हैं। इससे भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

क्या भारतीय किसानों पर पड़ेगा असर?

इस फैसले का दूसरा पक्ष भी है। कुछ कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़ी मात्रा में सस्ती आयातित कपास भारतीय बाजार में आती है तो इसका असर घरेलू कपास किसानों पर पड़ सकता है। हालांकि सरकार ने फिलहाल केवल पांच महीने की अस्थायी छूट दी है और इसे उद्योग की तत्काल जरूरतों को ध्यान में रखकर लागू किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम किसानों के हितों को नुकसान पहुंचाए बिना उद्योग की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है। यानी सरकार उद्योग और किसानों दोनों के हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।

AEPC ने किया फैसले का स्वागत

परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (AEPC) ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। परिषद का कहना है कि इससे कपड़ा और परिधान उद्योग को बड़ी राहत मिलेगी और कच्चे माल की उपलब्धता बेहतर होगी। AEPC के चेयरमैन डॉ. ए. शक्तिवेल ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय उद्योग के लिए समय पर उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे भारतीय टेक्सटाइल उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और मजबूत होगी।

आगे क्या?

1 जून से लागू होने वाली यह छूट अगले पांच महीनों तक भारतीय टेक्सटाइल उद्योग को राहत देगी। अब उद्योग जगत की नजर इस बात पर रहेगी कि इससे कपास की कीमतों, उत्पादन लागत और निर्यात पर कितना असर पड़ता है। यदि इस फैसले का सकारात्मक प्रभाव दिखाई देता है तो भारत वैश्विक टेक्सटाइल और गारमेंट बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है। वहीं बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के लिए यह अवधि अपनी बाजार हिस्सेदारी बचाए रखने की बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।

निष्कर्ष

कपास आयात पर पांच महीने की ड्यूटी छूट सिर्फ एक कर राहत नहीं है, बल्कि यह भारत की टेक्सटाइल रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा भी माना जा रहा है। इससे उद्योग को सस्ता कच्चा माल मिलेगा, निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति मजबूत हो सकती है। हालांकि किसानों के हितों और उद्योग की जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार के लिए आगे भी बड़ी चुनौती रहेगा।

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By Namam Sharma Senior Editor – Newsjagran
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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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