भारत के मुख्य न्यायाधीश Justice Surya Kant ने एक ऐसे समय में नई पीढ़ी के वकीलों को चेतावनी दी है, जब हर पेशा तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की ओर झुक रहा है। सुप्रीम कोर्ट में आयोजित एक दीक्षांत समारोह के दौरान उन्होंने साफ शब्दों में कहा—कानूनी ड्राफ्टिंग और पेशेवर जिम्मेदारियों के लिए AI या बाहरी एजेंसियों पर निर्भर रहना खतरनाक है।
यह बयान सिर्फ एक सलाह नहीं, बल्कि बदलते दौर में न्यायपालिका की सोच और सीमाओं को समझने का संकेत है।
आखिर CJI ने ऐसा क्यों कहा?
आज के दौर में ChatGPT जैसे टूल्स से लेकर लीगल रिसर्च सॉफ्टवेयर तक—AI ने वकालत के काम को आसान बना दिया है। लेकिन समस्या वहीं से शुरू होती है, जहां “सहायता” और “निर्भरता” के बीच की लाइन धुंधली हो जाती है।
CJI का साफ संदेश था:
- वकील सिर्फ “ड्राफ्ट बनाने वाले” नहीं होते
- वे न्यायालय के “अधिकारी” (Officers of the Court) होते हैं
- उनकी हर फाइलिंग उनकी ईमानदारी और समझ का प्रतिबिंब होती है
यानी अगर कोई वकील AI से कॉपी-पेस्ट करके याचिका तैयार करता है, तो वह सिर्फ तकनीकी गलती नहीं, बल्कि नैतिक चूक भी है।
‘Advocate-on-Record’ की जिम्मेदारी क्या होती है?
भारत में सुप्रीम कोर्ट में किसी भी केस की पैरवी करने के लिए वकील को “Advocate-on-Record (AOR)” बनना पड़ता है। यह एक विशेष दर्जा है, जो कठिन परीक्षा पास करने के बाद मिलता है।
CJI ने खासतौर पर AORs को संबोधित करते हुए कहा:
- हर याचिका पर आपका नाम होता है
- इसका मतलब है कि आप उसकी पूरी जिम्मेदारी लेते हैं
- इसलिए ड्राफ्टिंग खुद करें, समझकर करें
यह बात इसलिए अहम है क्योंकि कई युवा वकील काम का बोझ कम करने के लिए रिसर्च और ड्राफ्टिंग आउटसोर्स करने लगते हैं—अब इसमें AI भी शामिल हो गया है।
AI से खतरा क्या है? सिर्फ तकनीकी नहीं, कानूनी भी
पहली नजर में AI से काम करना स्मार्ट लगता है—तेज, सस्ता और आसान। लेकिन CJI के इशारे से समझिए कि असली खतरा कहां है:
1. गलत जानकारी (Hallucination)
AI कई बार गलत केस लॉ या फर्जी मिसालें दे सकता है। कोर्ट में यह बहुत बड़ा जोखिम है।
2. जवाबदेही (Accountability)
अगर AI ने गलती की, तो जिम्मेदार कौन? वकील ही।
3. गोपनीयता (Confidentiality)
कई केस संवेदनशील होते हैं। AI टूल्स में डेटा डालना प्राइवेसी रिस्क बन सकता है।
4. नैतिकता (Ethics)
वकालत सिर्फ कानून नहीं, भरोसे का पेशा है। AI पर निर्भरता इस भरोसे को कमजोर कर सकती है।
क्या इसका मतलब है कि AI पूरी तरह गलत है?
नहीं। CJI ने AI के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई, बल्कि “अंधाधुंध उपयोग” के खिलाफ चेताया। यानी:
- रिसर्च में AI मदद कर सकता है
- ड्राफ्ट का प्रारंभिक ढांचा बना सकता है
- लेकिन अंतिम दस्तावेज वकील को खुद समझकर बनाना होगा
यानी AI एक टूल है, पूरी तरह विकल्प नहीं।
वकालत का असली स्किल क्या है?
CJI के भाषण का सबसे गहरा संदेश यही था—वकालत सिर्फ जानकारी का खेल नहीं है।
एक अच्छे वकील में ये चीजें होनी चाहिए:
- कानूनी समझ (Legal reasoning)
- तर्क देने की क्षमता
- केस की बारीकी समझना
- नैतिक जिम्मेदारी
AI इनमें से किसी भी चीज को पूरी तरह replace नहीं कर सकता।
बदलते समय में वकीलों के लिए सीख
आज की युवा पीढ़ी टेक्नोलॉजी के साथ बड़ी हो रही है। ऐसे में यह चेतावनी संतुलन बनाने की कोशिश है।
- टेक्नोलॉजी अपनाओ, लेकिन उस पर निर्भर मत हो
- शॉर्टकट मत लो, स्किल विकसित करो
- हर केस को गंभीरता से लो
CJI ने स्पष्ट कहा—हर फाइलिंग को रूटीन मत समझो, हर ब्रीफ को ध्यान से पढ़ो।
क्या यह चेतावनी भविष्य का संकेत है?
दुनिया भर में कोर्ट अब AI के उपयोग को लेकर नियम बना रहे हैं। अमेरिका और यूरोप में कई मामले सामने आए हैं, जहां वकीलों ने AI से बनी गलत जानकारी कोर्ट में पेश कर दी और उन्हें सजा भी मिली।
भारत में यह बयान उसी दिशा में एक शुरुआती संकेत माना जा सकता है।
निष्कर्ष: टेक्नोलॉजी से आगे भी है वकालत
Justice Surya Kant का यह संदेश सिर्फ नए वकीलों के लिए नहीं, बल्कि पूरे लीगल सिस्टम के लिए है।
- वकालत एक जिम्मेदारी है, सिर्फ पेशा नहीं
- AI मदद कर सकता है, लेकिन सोचने की क्षमता नहीं दे सकता
- कोर्ट में भरोसा सबसे बड़ा आधार है
आने वाले समय में जो वकील इस संतुलन को समझेंगे, वही इस पेशे में आगे बढ़ेंगे।
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