भारतीय शेयर बाजार को लेकर दुनिया के प्रमुख निवेश रणनीतिकारों में शामिल जेफरीज के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रेटेजी क्रिस वुड (Chris Wood) ने निवेशकों के लिए अहम संकेत दिए हैं। उनका मानना है कि लंबे समय तक मिडकैप शेयरों के शानदार प्रदर्शन के बाद अब लार्जकैप और ब्लूचिप शेयरों में तेजी का दौर शुरू हो सकता है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हालिया गिरावट के बाद सोने (Gold) में दोबारा निवेश शुरू करने का यह अच्छा अवसर हो सकता है।
वुड ने कहा कि भारतीय शेयर बाजार की लंबी अवधि की कहानी अब भी मजबूत बनी हुई है और मौजूदा कंसॉलिडेशन के बाद निवेशकों को अच्छी गुणवत्ता वाले शेयरों में धीरे-धीरे निवेश बढ़ाना चाहिए।
भारतीय शेयर बाजार पर भरोसा बरकरार
मनीकंट्रोल के मैनेजिंग एडिटर नलिन मेहता को दिए इंटरव्यू में क्रिस वुड ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार की दीर्घकालिक संभावनाएं मजबूत हैं। उनका मानना है कि हाल के वर्षों में मिडकैप कंपनियों ने बेहतरीन अर्निंग्स ग्रोथ और रिटर्न दिए हैं, लेकिन अब बाजार का फोकस धीरे-धीरे लार्जकैप कंपनियों की ओर शिफ्ट हो सकता है।
उन्होंने कहा कि पिछले करीब 18 महीनों से भारतीय बाजार में लार्जकैप शेयरों में कोई बड़ी थीम देखने को नहीं मिली, जबकि मिडकैप स्टॉक्स लगातार बेहतर प्रदर्शन करते रहे। ऐसे में अब ब्लूचिप कंपनियों के लिए बेहतर प्रदर्शन की संभावना बढ़ गई है।
अब लार्जकैप स्टॉक्स में दिख सकती है तेजी
क्रिस वुड का कहना है कि बाजार में रोटेशन का दौर शुरू हो सकता है। अब तक निवेशकों का झुकाव मिडकैप कंपनियों की ओर रहा, लेकिन अब मजबूत बैलेंस शीट, स्थिर मुनाफे और आकर्षक वैल्यूएशन वाले लार्जकैप शेयर निवेशकों को बेहतर अवसर दे सकते हैं।
उनके अनुसार, ब्लूचिप कंपनियां आने वाले समय में बाजार की अगुवाई कर सकती हैं और लंबी अवधि के निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बन सकती हैं।
कंसॉलिडेशन के बाद निवेश का मौका
वुड ने निवेशकों को सलाह दी कि हालिया कंसॉलिडेशन से घबराने की जरूरत नहीं है। बाजार में सीमित दायरे में चल रही चाल के बाद धीरे-धीरे निवेश शुरू किया जा सकता है।
उनका मानना है कि मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में चरणबद्ध तरीके से निवेश करना लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न दे सकता है।
आईटी सेक्टर को लेकर जताई चिंता
क्रिस वुड ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में एक ऐसा सेक्टर है जिस पर AI का सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है और वह आईटी सेक्टर है।
उनके मुताबिक, AI तकनीक के कारण आईटी इंडस्ट्री के पारंपरिक बिजनेस मॉडल में बदलाव देखने को मिल सकता है। इसलिए निवेशकों को इस सेक्टर में निवेश करते समय सतर्क रहने की जरूरत होगी।
सोने में फिर से निवेश का सही समय
क्रिस वुड ने गोल्ड को लेकर भी सकारात्मक राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस साल रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद सोने की कीमतों में आई गिरावट निवेशकों के लिए नया अवसर लेकर आई है।
उन्होंने कहा कि जब ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव के दौरान भी सोना नया रिकॉर्ड हाई नहीं बना पाया, तब यह संकेत मिला कि बाजार फिलहाल कंसॉलिडेशन के दौर में प्रवेश कर चुका है।
उनके अनुसार, मौजूदा स्तर पर गोल्ड अपनी ट्रेडिंग रेंज के निचले हिस्से में है और ऐसे में निवेशकों को दोबारा सोने में निवेश बढ़ाने पर विचार करना चाहिए।
डॉलर को लेकर भी जताई राय
वुड ने कहा कि वह अब भी डॉलर डिबेसमेंट (Dollar Debasement) थीम पर भरोसा रखते हैं। उनका मानना है कि लंबी अवधि में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां सोने के पक्ष में रह सकती हैं और यही वजह है कि वह गोल्ड को दीर्घकालिक निवेश के लिए सकारात्मक मानते हैं।
निवेशकों के लिए क्या है संदेश?
क्रिस वुड के अनुसार, भारतीय बाजार की लंबी अवधि की ग्रोथ स्टोरी मजबूत बनी हुई है। हालांकि, अब निवेशकों को केवल मिडकैप पर फोकस करने के बजाय मजबूत लार्जकैप कंपनियों पर भी नजर रखनी चाहिए। वहीं, हालिया गिरावट के बाद गोल्ड भी पोर्टफोलियो में शामिल करने के लिए एक आकर्षक विकल्प बन सकता है।


