हिंदी दिवस 2026: वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने हिंदी की सरलता, अपनापन और डिजिटल दौर में इसकी बढ़ती भूमिका को लेकर खास संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि हिंदी के शब्दों में मां जैसा अपनापन है और देश के युवा हिंदी के दम पर दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं।
नई दिल्ली: वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी भाषा को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए हिंदी की अहमियत बताई और कहा कि हिंदी सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि यह करोड़ों भारतीयों की पहचान और भावनाओं से जुड़ी भाषा है।
भारत में हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। इसी दिन 1949 में संविधान सभा ने हिंदी को देवनागरी लिपि में संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। हिंदी दिवस के मौके पर देशभर में भाषा के महत्व और इसके इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
अनिल अग्रवाल ने अपने संदेश में हिंदी के भावनात्मक पक्ष के साथ-साथ डिजिटल दुनिया में इसके बढ़ते प्रभाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ हिंदी की पहुंच लगातार बढ़ रही है और आने वाले दौर में भारतीय भाषाओं की भूमिका और महत्वपूर्ण होने वाली है।
‘हिंदी के शब्दों में मां जैसा अपनापन’
हिंदी के शब्दों में माँ जैसा अपनापन है। शायद इसीलिए, आज जब करीब 60 करोड़ लोग हिंदी बोलते हैं, तो हमें अंदाज़ा होता है कि ये कितने दिलों की ज़ुबान है, पहचान है।
साल 2024 में 87 करोड़ internet users ने Indic languages में content access किया। यानी हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाएँ… pic.twitter.com/gTMNDRzue7
— Anil Agarwal (@AnilAgarwal_Ved) September 14, 2026 अनिल अग्रवाल ने हिंदी को लेकर अपने संदेश में कहा कि हिंदी के शब्दों में मां जैसा अपनापन है। उनके इस भावपूर्ण बयान ने हिंदी को केवल एक भाषा के बजाय भावनाओं और जुड़ाव से जोड़ने की कोशिश की।
उन्होंने हिंदी बोलने वाले लोगों की संख्या का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, आज करीब 60 करोड़ लोग हिंदी बोलते हैं। ऐसे में हिंदी केवल भारत की एक प्रमुख भाषा नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों के रोजमर्रा के जीवन, विचारों और सामाजिक जुड़ाव का हिस्सा है।
अनिल अग्रवाल के संदेश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हिंदी और इंटरनेट के बदलते संबंध को लेकर भी था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में करीब 87 करोड़ इंटरनेट यूजर्स ने भारतीय भाषाओं में कंटेंट एक्सेस किया। इससे पता चलता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भारतीय भाषाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है।
डिजिटल क्रांति के दौर में लंबे समय तक इंटरनेट पर अंग्रेजी भाषा के कंटेंट का दबदबा रहा। हालांकि, स्मार्टफोन और सस्ते इंटरनेट की पहुंच बढ़ने के साथ हिंदी समेत भारतीय भाषाओं में डिजिटल कंटेंट का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है।
हिंदी के दम पर दुनिया का नेतृत्व करेंगे युवा
वेदांता चेयरमैन ने अपने संदेश में हिंदी क्षेत्र के युवाओं का भी खास तौर पर जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात में कोई संदेह नहीं है कि हिंदी बेल्ट के युवा अब हिंदी के दम पर दुनिया से मुकाबला करने के साथ-साथ दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं।
उनके इस बयान का संबंध केवल भाषा से नहीं बल्कि आत्मविश्वास से भी है। वैश्विक स्तर पर भारतीय युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में अपनी मातृभाषा या भारतीय भाषाओं के साथ जुड़ाव को कमजोरी के बजाय आत्मविश्वास का आधार बनाया जा सकता है।
अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया और रोजमर्रा के जीवन में हिंदी के इस्तेमाल को लेकर अपना अनुभव भी साझा किया। उन्होंने कहा कि भारत के दिल से जुड़ने और अपने विचारों को रोजमर्रा की जिंदगी में व्यक्त करने के लिए हिंदी उनके लिए सहज भाषा रही है।
अंग्रेजी सीखना जरूरी, लेकिन हिंदी से जुड़ाव भी उतना ही महत्वपूर्ण
अनिल अग्रवाल ने अपने संदेश में अंग्रेजी भाषा की उपयोगिता को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि वह अक्सर इस बात पर जोर देते हैं कि गांव के बच्चों के लिए अंग्रेजी सीखना जितना जरूरी है, शहरों के बच्चों का हिंदी से जुड़ना भी उतना ही जरूरी है।
इस बात के जरिए उन्होंने भाषा के बीच किसी तरह की प्रतिस्पर्धा के बजाय संतुलन की जरूरत पर जोर दिया। आज शिक्षा, कारोबार और वैश्विक अवसरों के लिए अंग्रेजी का महत्व अपनी जगह है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भारतीय भाषाओं से दूरी बना ली जाए।
उनका कहना है कि भाषा को लेकर किसी तरह की हीन भावना नहीं होनी चाहिए। हिंदी को उसकी सरलता और सहजता के साथ आगे बढ़ने देना चाहिए। इसका मतलब यह है कि हिंदी का विकास उसकी स्वाभाविक शैली और लोगों के रोजमर्रा के इस्तेमाल के साथ होना चाहिए।
डिजिटल दौर में भारतीय भाषाओं की बढ़ती भूमिका
इंटरनेट के विस्तार ने भारतीय भाषाओं के लिए नई संभावनाएं पैदा की हैं। सोशल मीडिया, वीडियो प्लेटफॉर्म, डिजिटल न्यूज और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में कंटेंट की मांग बढ़ी है।
इस बदलाव का असर कारोबार पर भी दिखाई देता है। भारत के छोटे शहरों और कस्बों से बड़ी संख्या में लोग इंटरनेट से जुड़ रहे हैं। ऐसे में कंपनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्थानीय भाषाओं में संवाद करना महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
हिंदी की सबसे बड़ी ताकत इसकी व्यापक पहुंच और सहजता है। यही वजह है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ हिंदी कंटेंट के लिए भी बड़ा बाजार तैयार हुआ है।
हिंदी का भविष्य उज्ज्वल बताया
अनिल अग्रवाल ने हिंदी के भविष्य को लेकर भी सकारात्मक उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि हिंदी का भविष्य बहुत उज्ज्वल है। जरूरत सिर्फ इतनी है कि इसकी सरलता बनी रहे और इसे नदी की तरह बहने दिया जाए।
उनका संदेश हिंदी को केवल अतीत की विरासत के रूप में देखने के बजाय भविष्य की भाषा के रूप में देखने पर जोर देता है। खासकर डिजिटल युग में भारतीय भाषाएं नए यूजर्स तक पहुंचने और देश के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने का माध्यम बन रही हैं।
हिंदी दिवस के अवसर पर अनिल अग्रवाल का यह संदेश भाषा, युवा और डिजिटल भारत के बीच संबंध को रेखांकित करता है। उन्होंने अंत में सभी को हिंदी दिवस की शुभकामनाएं दीं और हिंदी को भारत की पहचान के साथ-साथ देश के डिजिटल भविष्य की महत्वपूर्ण भाषा बताया।
Source: अनिल अग्रवाल के सोशल मीडिया संदेश और उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर।


