Air India Express News: तमिलनाडु की एक युवती को एयर इंडिया एक्सप्रेस ने कथित तौर पर यह कहते हुए बोर्डिंग पास देने से मना कर दिया कि उसका वीजा वैध नहीं है। जबकि बाद में उपभोक्ता आयोग ने पाया कि यात्रा के दिन उसका ट्रैवल परमिट पूरी तरह वैध था। अब एयरलाइन को यात्री को 3 लाख रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया गया है।
Highlights
- एयर इंडिया एक्सप्रेस ने वीजा एक्सपायर होने का हवाला देकर बोर्डिंग पास देने से किया इनकार।
- उपभोक्ता आयोग ने पाया कि यात्रा के दिन ट्रैवल परमिट वैध था।
- एयरलाइन को 3 लाख रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये कानूनी खर्च देने का आदेश।
- कोर्ट ने इसे सेवा में गंभीर कमी (Deficiency in Service) माना।
चेन्नई: एयरपोर्ट पर ही छूट गई फ्लाइट
विदेश यात्रा की तैयारी पूरी होने के बाद एयरपोर्ट पहुंचकर अगर किसी यात्री को बोर्डिंग पास ही न मिले तो यह किसी बड़े झटके से कम नहीं होता। तमिलनाडु की एक ऑप्टोमेट्री ग्रेजुएट के साथ भी ऐसा ही हुआ। 9 सितंबर 2023 को वह अपने माता-पिता के साथ कुवैत जाने के लिए तिरुचिरापल्ली एयरपोर्ट पहुंची थीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, एयर इंडिया एक्सप्रेस के अधिकारियों ने उन्हें बोर्डिंग पास जारी करने से इनकार कर दिया। एयरलाइन का कहना था कि उनका डिपेंडेंट वीजा समाप्त हो चुका है और वह यात्रा के लिए पात्र नहीं हैं। हालांकि युवती और उनके पिता लगातार यह दावा करते रहे कि उनके सभी दस्तावेज वैध हैं, लेकिन एयरलाइन स्टाफ ने उनकी बात नहीं मानी। नतीजतन फ्लाइट रवाना हो गई और युवती एयरपोर्ट पर ही रह गई।
उपभोक्ता आयोग पहुंचा मामला
घटना के बाद पीड़िता ने तमिलनाडु के पेरम्बलूर स्थित जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज कराई। सुनवाई के दौरान एयर इंडिया एक्सप्रेस ने दलील दी कि कुवैत के इमिग्रेशन नियमों के अनुसार यदि कोई विदेशी निवासी छह महीने से अधिक समय तक देश से बाहर रहता है तो उसका रेजिडेंट परमिट अमान्य हो सकता है।
एयरलाइन का दावा था कि युवती कुवैत से बाहर रहने की निर्धारित अवधि के अंतिम चरण में थी और इसी कारण बोर्डिंग पास जारी नहीं किया गया।
जांच में सामने आई सच्चाई
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने कुवैत के गृह मंत्रालय द्वारा जारी दस्तावेजों की जांच की। आयोग ने पाया कि युवती का ट्रैवल परमिट यात्रा वाले दिन यानी 9 सितंबर 2023 को पूरी तरह वैध था।
जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित परमिट 12 सितंबर 2023 को समाप्त होना था, यानी यात्रा की तारीख के तीन दिन बाद। ऐसे में एयरलाइन द्वारा बोर्डिंग पास देने से इनकार करना उचित नहीं था।
आयोग ने कहा कि यदि एयरलाइन को दस्तावेज की वैधता पर संदेह था तो उसे संबंधित इमिग्रेशन अथॉरिटी या सरकारी विभाग से पुष्टि करनी चाहिए थी। बिना पुष्टि किए यात्री को यात्रा से रोकना गलत निर्णय था।
कोर्ट ने क्या कहा?
उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष डी. जवाहर तथा सदस्य पी. तिलक और एम. मुतुकुमारन की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि एयरलाइन की कार्रवाई ने यात्री के उड़ान भरने के अधिकार का उल्लंघन किया है।
आयोग ने माना कि यह सेवा में स्पष्ट कमी (Deficiency in Service) का मामला है। एयरलाइन की गलती के कारण यात्री को मानसिक तनाव, असुविधा और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा।
3 लाख रुपये का मुआवजा
आयोग ने एयर इंडिया एक्सप्रेस को निर्देश दिया कि वह पीड़िता को:
- 3 लाख रुपये मुआवजे के रूप में दे।
- 10 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के लिए भुगतान करे।
पहले दिया था समझौते का प्रस्ताव
कानूनी प्रक्रिया शुरू होने से पहले एयर इंडिया एक्सप्रेस ने मामले को सुलझाने की कोशिश भी की थी। एयरलाइन ने पीड़िता को 20 हजार रुपये नकद मुआवजा और 10 हजार रुपये का ट्रैवल वाउचर देने का प्रस्ताव दिया था।
हालांकि युवती ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और कानूनी लड़ाई जारी रखी। आखिरकार उपभोक्ता आयोग के फैसले में उसे कहीं अधिक मुआवजा मिला।
यात्रियों के लिए क्या है सीख?
यह मामला बताता है कि यदि किसी यात्री के पास वैध दस्तावेज मौजूद हों और फिर भी उसे गलत कारणों से यात्रा से रोका जाए, तो वह उपभोक्ता अदालत में न्याय की मांग कर सकता है। साथ ही एयरलाइंस को भी दस्तावेजों की जांच करते समय पूरी सावधानी बरतनी चाहिए और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित अधिकारियों से पुष्टि करनी चाहिए।
(डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध रिपोर्ट्स और उपभोक्ता आयोग के आदेश के आधार पर तैयार की गई है।)


