Ram Mandir CEO Jitendra Mishra: अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर यानी CEO नियुक्त किया है। भारतीय वायुसेना के पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख रह चुके मिश्रा अप्रैल 2026 में रिटायर हुए थे। अब वह राम मंदिर से जुड़े प्रशासनिक और ऑपरेशनल कामकाज की जिम्मेदारी संभालेंगे।
जितेंद्र मिश्रा का नाम ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी काफी चर्चा में रहा था। वह उस समय भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ थे। ऑपरेशन में उनकी भूमिका के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (SYSM) से सम्मानित किया गया था। इससे पहले उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) और विशिष्ट सेवा मेडल (VSM) भी मिल चुके हैं।
5,500 से ज्यादा आवेदन के बाद जितेंद्र मिश्रा के नाम पर मुहर
राम मंदिर ट्रस्ट ने CEO पद के लिए व्यापक चयन प्रक्रिया अपनाई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस पद के लिए 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। चयन प्रक्रिया के बाद उम्मीदवारों की संख्या घटाकर तीन की गई और आखिरकार रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के नाम पर सहमति बनी।
ट्रस्ट की बैठक अयोध्या में हुई, जिसमें ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारी और सदस्य शामिल हुए। CEO की नियुक्ति के साथ ही ट्रस्ट ने तीन नए ट्रस्टियों की नियुक्ति की भी घोषणा की। इनमें महेश भागचंदका, मदन मोहन पांडे और निर्मला यादव के नाम शामिल हैं।
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब राम मंदिर ट्रस्ट अपने प्रशासनिक ढांचे को अधिक व्यवस्थित और पेशेवर बनाने पर जोर दे रहा है। मंदिर परिसर में लगातार बढ़ती गतिविधियों और श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए प्रशासन, वित्त, सुरक्षा, स्टाफ और सुविधाओं के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत भी बढ़ी है।
कौन हैं जितेंद्र मिश्रा?
एयर मार्शल (रिटायर्ड) जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के बेहद अनुभवी अधिकारियों में शामिल रहे हैं। उन्होंने करीब चार दशक तक भारतीय वायुसेना में सेवा की। उन्हें 6 दिसंबर 1986 को IAF की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन किया गया था। अपने लंबे करियर में उन्होंने फाइटर पायलट, फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट के तौर पर काम किया।
मिश्रा के पास 3,000 घंटे से ज्यादा की उड़ान का अनुभव है। उन्होंने 18 से अधिक प्रकार के फाइटर, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टर उड़ाए। उनके करियर में ऑपरेशनल कमांड से लेकर टेस्टिंग, ट्रेनिंग, रणनीतिक योजना और उच्चस्तरीय प्रशासनिक जिम्मेदारियां शामिल रहीं।
देवरिया के भोपतपुरा गांव से शुरू हुआ सफर
जितेंद्र मिश्रा का उत्तर प्रदेश से खास रिश्ता है। वह मूल रूप से देवरिया जिले के भाटपार रानी क्षेत्र के भोपतपुरा गांव के रहने वाले हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार वह एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं और उनके पिता लेक्चरर थे।
गांव से निकलकर भारतीय वायुसेना के शीर्ष पदों तक पहुंचने के बाद अब मिश्रा को अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की जिम्मेदारी दी गई है। देवरिया और अयोध्या की भौगोलिक नजदीकी के कारण भी उनकी नई भूमिका को उत्तर प्रदेश से उनके लंबे जुड़ाव के संदर्भ में देखा जा रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर में क्या थी जितेंद्र मिश्रा की भूमिका?
जितेंद्र मिश्रा की नई जिम्मेदारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उनका सैन्य करियर ऑपरेशनल कमांडिंग के अनुभव से भरा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख थे।
ऑपरेशन के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया था। मिश्रा की कमान में पश्चिमी वायु कमान ने अभियान से जुड़ी अहम सैन्य जिम्मेदारियां निभाईं।
ऑपरेशन के बाद मिश्रा को उनकी विशिष्ट सेवा के लिए सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया। यह सम्मान युद्ध या संघर्ष जैसी परिस्थितियों में असाधारण सेवा के लिए दिया जाता है।
314 किलोमीटर दूर टारगेट का भी किया था जिक्र
ऑपरेशन सिंदूर के बाद एक पॉडकास्ट बातचीत में जितेंद्र मिश्रा ने एयर ऑपरेशन की योजना और उसके क्रियान्वयन से जुड़ी कुछ बातें साझा की थीं। उन्होंने बताया था कि भारतीय बलों ने पाकिस्तान के भीतर काफी दूरी पर मौजूद लक्ष्यों की पहचान कर उन्हें निशाना बनाया।
उन्होंने एक ऐसे लक्ष्य का उल्लेख किया था जो करीब 314 किलोमीटर दूर था। मिश्रा के मुताबिक इस कार्रवाई के दौरान ऑपरेशनल निर्देश मिलने के बाद लक्ष्य को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया।
हालांकि, सैन्य अभियानों से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों को सार्वजनिक नहीं किया गया। उनके बयान में मुख्य रूप से ऑपरेशन की योजना, सटीकता, तकनीक और विभिन्न सैन्य इकाइयों के बीच तालमेल की अहमियत सामने आई थी।
कारगिल युद्ध से भी जुड़ा रहा मिश्रा का करियर
जितेंद्र मिश्रा का सैन्य अनुभव सिर्फ ऑपरेशन सिंदूर तक सीमित नहीं है। उनके करियर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कारगिल युद्ध से भी जुड़ा रहा।
स्क्वाड्रन लीडर के तौर पर वह उस टीम का हिस्सा थे जिसने कारगिल युद्ध की शुरुआत में मिराज-2000 विमानों पर लेजर-गाइडेड बमों को ऑपरेशनल बनाने में भूमिका निभाई थी। बाद में इन हथियारों का इस्तेमाल ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान टाइगर हिल और मुंथो ढालो जैसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर हमलों में किया गया।
यही अनुभव आगे चलकर उनके ऑपरेशनल और रणनीतिक करियर की मजबूत नींव बना।
IAF में संभालीं कई अहम जिम्मेदारियां
जितेंद्र मिश्रा ने भारतीय वायुसेना में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। वह एक फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर रहे। इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के नासिक डिवीजन में चीफ टेस्ट पायलट की जिम्मेदारी भी संभाली।
वह एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट (ASTE) में चीफ टेस्ट पायलट रहे और बाद में इसी संस्थान के कमांडेंट भी बने।
उन्होंने एयर हेडक्वार्टर में ऑपरेशनल प्लानिंग एंड असेसमेंट से जुड़े महत्वपूर्ण पद पर काम किया। इसके अलावा एयर स्टाफ रिक्वायरमेंट्स और प्रोजेक्ट्स से संबंधित वरिष्ठ जिम्मेदारियां भी संभालीं।
बरेली और पठानकोट की कमान भी संभाली
एयर कमोडोर के तौर पर जितेंद्र मिश्रा ने एयर फोर्स स्टेशन बरेली की 15 विंग और एयर फोर्स स्टेशन पठानकोट की 18 विंग की कमान संभाली।
बाद में वह एयर हेडक्वार्टर में एयर कमोडोर (एयर स्टाफ रिक्वायरमेंट्स) के पद पर रहे। एयर वाइस मार्शल के तौर पर उन्होंने असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट्स) और ASTE के कमांडेंट जैसी जिम्मेदारियां निभाईं।
इसके बाद उन्हें इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में डिप्टी चीफ (डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइजेशन एंड ट्रेनिंग) और फिर डिप्टी चीफ (ऑपरेशन्स) बनाया गया।
1 जनवरी 2025 को बने थे पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख
जितेंद्र मिश्रा ने 1 जनवरी 2025 को भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का पद संभाला था। यह कमान भारत की पश्चिमी सीमाओं के लिहाज से बेहद रणनीतिक मानी जाती है।
उन्होंने एयर मार्शल पंकज मोहन सिन्हा के बाद यह जिम्मेदारी संभाली थी। पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख के रूप में ही उन्होंने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान महत्वपूर्ण सैन्य जिम्मेदारी निभाई।
इसके बाद करीब 38 साल से ज्यादा की सेवा पूरी करने के बाद वह 30 अप्रैल 2026 को भारतीय वायुसेना से रिटायर हुए।
जितेंद्र मिश्रा को मिले बड़े सैन्य सम्मान
जितेंद्र मिश्रा के नाम कई प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान हैं। इनमें प्रमुख हैं:
- सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (SYSM) — ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेवा के लिए
- अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) — 2024
- विशिष्ट सेवा मेडल (VSM) — 2013
इन सम्मानों के अलावा उनका पेशेवर प्रशिक्षण भी काफी व्यापक रहा है। उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी से प्रशिक्षण लिया और एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल में भी प्रशिक्षण हासिल किया। इसके अलावा उन्होंने अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज में भी अध्ययन किया।
राम मंदिर के CEO के तौर पर क्या होगी जिम्मेदारी?
राम मंदिर ट्रस्ट का पहला CEO बनाए जाने के बाद जितेंद्र मिश्रा की भूमिका अब सैन्य कमान से अलग होगी, लेकिन उनके प्रशासनिक और ऑपरेशनल अनुभव का यहां इस्तेमाल किया जा सकता है।
CEO के तौर पर उनके सामने मंदिर और ट्रस्ट की रोजमर्रा की व्यवस्थाओं को व्यवस्थित करने, अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल बढ़ाने और बड़े स्तर पर संचालन को प्रभावी बनाने जैसी जिम्मेदारियां हो सकती हैं।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हो सकते हैं:
- श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का बेहतर प्रबंधन
- मंदिर परिसर की प्रशासनिक व्यवस्था
- स्टाफ और विभागों के बीच समन्वय
- सुरक्षा एजेंसियों के साथ तालमेल
- वित्तीय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की निगरानी
- बड़े धार्मिक आयोजनों की व्यवस्थाएं
- मंदिर परिसर और उससे जुड़ी सुविधाओं का संचालन
- अलग-अलग सरकारी एवं गैर-सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय
रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रस्ट CEO की भूमिका के जरिए प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पेशेवर, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने पर जोर दे रहा है।
सैन्य कमांड से राम मंदिर प्रशासन तक नया अध्याय
जितेंद्र मिश्रा की कहानी एक गांव से निकलकर भारतीय वायुसेना के शीर्ष सैन्य पद तक पहुंचने और फिर देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक की प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालने की कहानी है।
करीब चार दशक तक फाइटर पायलट, टेस्ट पायलट और वरिष्ठ कमांडर के रूप में काम करने वाले मिश्रा अब एक बिल्कुल अलग तरह की चुनौती का सामना करेंगे। राम मंदिर में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और आने वाले समय में मंदिर परिसर से जुड़ी गतिविधियों का दायरा और बढ़ने की उम्मीद है।
ऐसे में ऑपरेशनल प्लानिंग, बड़े संगठनों का नेतृत्व, अनुशासन, संसाधनों का प्रबंधन और अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय का उनका अनुभव नई भूमिका में उपयोगी साबित हो सकता है।
देवरिया के भोपतपुरा से भारतीय वायुसेना के पश्चिमी कमान तक और अब अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO तक—जितेंद्र मिश्रा के करियर का यह नया अध्याय निश्चित तौर पर बेहद खास है।


