Gold Price Today: सोने की कीमतों में लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में गिरावट जारी है। MCX पर सोना 24 अगस्त के अपने रिकॉर्ड हाई ₹1,63,229 प्रति 10 ग्राम से फिसलकर करीब ₹1,52,514 के स्तर पर आ गया है। यानी महज पांच कारोबारी दिनों में सोना ₹10,700 से ज्यादा सस्ता हो चुका है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गोल्ड की कीमतों में तेज करेक्शन देखने को मिला है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब $4,450 के स्तर को मजबूती से पार नहीं करता, तब तक कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
रिकॉर्ड स्तर से तेजी से नीचे आया सोना
भारतीय वायदा बाजार यानी MCX पर सोने ने 24 अगस्त को ₹1,63,229 प्रति 10 ग्राम का ऑल-टाइम हाई बनाया था। इसके बाद से लगातार बिकवाली देखने को मिल रही है। मौजूदा स्तर की तुलना रिकॉर्ड हाई से करें तो सोना करीब ₹10,715 प्रति 10 ग्राम नीचे आ चुका है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसी तरह की तस्वीर देखने को मिली है। COMEX पर सोना करीब $4,734 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर से गिरकर लगभग $4,420 प्रति औंस तक पहुंच गया है। एक कारोबारी सत्र में ही MCX गोल्ड में करीब ₹1,900 और COMEX गोल्ड में लगभग $75 की गिरावट दर्ज की गई।
सोने में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब अगस्त में बुलियन मार्केट ने जबरदस्त प्रदर्शन किया था। इसलिए मौजूदा कमजोरी को बाजार के जानकार कुछ हद तक मुनाफावसूली और वैश्विक आर्थिक संकेतों में बदलाव से भी जोड़कर देख रहे हैं।
सोने की कीमतों में गिरावट की 4 बड़ी वजहें
1. अमेरिकी फेड की ब्याज दरों को लेकर बढ़ी चिंता
सोने की कीमतों पर सबसे बड़ा दबाव अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर बदलती उम्मीदों से आया है। जैक्सन होल सम्मेलन में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के सख्त रुख ने बाजार की धारणा प्रभावित की।
अगर अमेरिकी फेड ब्याज दरों में बढ़ोतरी या लंबे समय तक ऊंची दरों का संकेत देता है, तो बिना ब्याज वाला निवेश विकल्प होने के कारण सोने की आकर्षकता कम हो सकती है। ऐसे माहौल में निवेशक अपने पैसे को बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाली संपत्तियों की ओर ले जा सकते हैं।
यही वजह है कि फेड से जुड़े संकेतों के बाद गोल्ड में मुनाफावसूली तेज हुई है।
2. मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने बढ़ाया दबाव
अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख से डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड को सपोर्ट मिला है। आमतौर पर मजबूत डॉलर सोने के लिए नकारात्मक माना जाता है।
दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत डॉलर में तय होती है। डॉलर मजबूत होने पर दूसरी मुद्राओं में सोना अपेक्षाकृत महंगा हो जाता है। इससे इसकी मांग प्रभावित हो सकती है।
दूसरी ओर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर निवेशकों को अपेक्षाकृत सुरक्षित और ब्याज देने वाले विकल्पों में बेहतर रिटर्न की उम्मीद होती है। इसका असर सोने में निवेश की मांग पर पड़ सकता है।
3. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और महंगाई की चिंता
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी सोने के लिए चुनौती बन रही है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव और अमेरिका-ईरान विवाद से क्रूड की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ा है।
महंगे कच्चे तेल से वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा होती है। यदि महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहती है तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती को टाल सकते हैं।
ऐसे में बाजार में यह धारणा मजबूत होती है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। यह स्थिति सोने की कीमतों पर दबाव डाल सकती है।
4. पीएम मोदी की सोना न खरीदने की अपील से घरेलू सेंटीमेंट प्रभावित
घरेलू बाजार में सोने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील भी चर्चा में है। पीएम मोदी ने देशवासियों से जरूरत न होने पर सोना नहीं खरीदने की अपील की है।
आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स की कमोडिटी एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर के मुताबिक, इस अपील का असर घरेलू बाजार के सेंटीमेंट पर पड़ा है। इससे त्योहारी सीजन से पहले ज्वैलरी और रिटेल डिमांड में कुछ नरमी आने की आशंका बढ़ी है।
भारत दुनिया के प्रमुख सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। ऐसे में घरेलू मांग में होने वाला बदलाव स्थानीय कीमतों और ज्वैलरी बाजार की गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है।
अगस्त में सोने ने दिया शानदार रिटर्न
सोने में सितंबर की शुरुआत में भले ही तेज गिरावट देखने को मिल रही हो, लेकिन अगस्त का महीना बुलियन निवेशकों के लिए काफी शानदार रहा।
ऑगमोंट बुलियन की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में सोने की कीमत में करीब 9.4% की तेजी आई, जबकि चांदी ने करीब 15% का रिटर्न दिया। रिपोर्ट के अनुसार, यह इस साल का सबसे मजबूत मासिक प्रदर्शन रहा।
इस तेज तेजी के बाद कीमतों में मुनाफावसूली होना भी बाजार के लिहाज से असामान्य नहीं माना जा रहा है। रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद कुछ निवेशकों ने मुनाफा बुक किया है, जिससे गिरावट और तेज हुई।
सितंबर में सोने की अगली चाल किस पर निर्भर करेगी?
अब बाजार की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर है। इस सप्ताह आने वाले अमेरिकी लेबर मार्केट से जुड़े आंकड़े सोने की अगली दिशा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
अगर अमेरिकी रोजगार और श्रम बाजार के आंकड़े उम्मीद से मजबूत रहते हैं, तो फेड की ओर से सख्त मौद्रिक नीति की संभावना बढ़ सकती है। इससे डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को सपोर्ट मिल सकता है और सोने पर दबाव जारी रह सकता है।
वहीं, अगर अमेरिकी आर्थिक आंकड़े कमजोर आते हैं और ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद बढ़ती है, तो सोने को दोबारा सपोर्ट मिल सकता है।
$4,450 का स्तर क्यों है अहम?
कमोडिटी एक्सपर्ट्स की नजर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के $4,450 प्रति औंस के स्तर पर बनी हुई है। जब तक गोल्ड इस स्तर को मजबूती से पार नहीं करता, तब तक बाजार में दबाव और अस्थिरता बनी रहने की संभावना है।
निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि रिकॉर्ड हाई के बाद सोने में बड़ी तेजी और बड़ी गिरावट दोनों देखने को मिल सकती हैं। इसलिए केवल हाल की गिरावट देखकर जल्दबाजी में खरीदारी या बिक्री का फैसला करना जोखिम भरा हो सकता है।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
सोने की मौजूदा गिरावट के पीछे सिर्फ एक कारण नहीं है। अमेरिकी फेड की नीति, डॉलर, बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतें और घरेलू मांग—सभी मिलकर बाजार की दिशा तय कर रहे हैं।
इसलिए आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और फेड के संकेतों पर नजर रखना जरूरी होगा। अगर डॉलर और बॉन्ड यील्ड में तेजी जारी रहती है तो सोने में और करेक्शन संभव है। दूसरी ओर, कमजोर आर्थिक आंकड़े और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद गोल्ड को फिर से ऊपर ले जा सकती है।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचना और बाजार की स्थिति समझने के उद्देश्य से है। सोने या किसी अन्य वित्तीय साधन में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश का फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें। NewsJagran किसी भी निवेश की गारंटी या व्यक्तिगत निवेश सलाह नहीं देता।


