Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में सोमवार, 31 अगस्त को सोने की कीमतों में लगातार चौथे कारोबारी सत्र गिरावट दर्ज की गई। सोना आज ₹1,500 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,60,900 पर आ गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में कमजोरी का असर घरेलू बाजार पर भी देखने को मिला। हालांकि, चांदी के भाव में आज कोई बदलाव नहीं हुआ और यह ₹2,45,000 प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने पर दबाव नजर आया। सोमवार को हाजिर सोना करीब 0.35% गिरकर 4,436 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखाई दिया। दूसरी ओर, चांदी मामूली मजबूती के साथ 66.97 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर रही।
लगातार चौथे दिन क्यों गिरा सोना?
सोने की कीमतों में पिछले कुछ समय में तेज तेजी देखने को मिली थी। ऐसे में अब बाजार में मुनाफावसूली (Profit Booking) का दौर शुरू हुआ है। ट्रेडर्स का मानना है कि हालिया तेजी के बाद निवेशक अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए सोने में अपनी पोजीशन कम कर रहे हैं।
बाजार में यह धारणा भी मजबूत हुई है कि सोने में तेजी का ट्रेंड फिलहाल उतनी मजबूती से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इसके चलते निवेशकों की खरीदारी में कमी आई है और सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
केविन वॉर्श के बयान से भी बढ़ा दबाव
लेमन मार्केट डेस्क के रिसर्च हेड गौरव गर्ग के मुताबिक, फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के हालिया बयान के बाद सोने पर दबाव बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि 28 अगस्त को जैक्सन होल में दिए गए भाषण में वॉर्श ने अपेक्षाकृत सख्त मौद्रिक नीति के संकेत दिए। इससे बाजार में यह उम्मीद बढ़ी है कि सितंबर में होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाया जा सकता है।
आमतौर पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी या लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों की संभावना सोने के लिए नकारात्मक मानी जाती है। इसकी वजह यह है कि ब्याज न देने वाली संपत्ति के रूप में सोने की तुलना में बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाले निवेश विकल्प ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर में मजबूती का असर
सोने की कीमतों पर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर इंडेक्स में मजबूती का भी असर पड़ा है। डॉलर मजबूत होने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में कीमत तय होने वाला सोना अन्य मुद्राओं में खरीदने वाले निवेशकों के लिए महंगा हो जाता है।
इससे सोने की मांग प्रभावित हो सकती है और कीमतों पर दबाव देखने को मिल सकता है। मौजूदा समय में बाजार की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के अगले कदम पर बनी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना कमजोर, चांदी में मामूली तेजी
घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बुलियन मार्केट में भी सोने की कीमतों में कमजोरी दिखाई दी। हाजिर सोना 0.35% गिरकर 4,436 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया।
इसके उलट चांदी में मामूली मजबूती रही और यह करीब 66.97 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। यानी सोने और चांदी के प्रदर्शन में फिलहाल अंतर देखने को मिल रहा है।
अमेरिका-ईरान तनाव और क्रूड की कीमतों पर नजर
बुलियन मार्केट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर भी बाजार सतर्क है। भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें फिर से 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं।
क्रूड की ऊंची कीमतें वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महंगाई का दबाव बढ़ा सकती हैं। अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो केंद्रीय बैंकों के सामने महंगाई को नियंत्रित करने की चुनौती बढ़ सकती है।
महंगाई बढ़ी तो ब्याज दरों पर क्या होगा असर?
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का सीधा असर पेट्रोल, डीजल, परिवहन और कई दूसरी वस्तुओं की लागत पर पड़ सकता है। इससे महंगाई बढ़ने का जोखिम रहता है।
यदि महंगाई लगातार ऊंची रहती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करने के बजाय उन्हें ऊंचा बनाए रखने या जरूरत पड़ने पर बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं। ऐसा माहौल सोने की कीमतों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
हालांकि, सोने की कीमतों को भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और निवेशकों की सुरक्षित निवेश की मांग जैसे कई अन्य कारक भी प्रभावित करते हैं।
31 अगस्त को दिल्ली में सोने-चांदी का भाव
- सोना: ₹1,60,900 प्रति 10 ग्राम
- सोने में बदलाव: ₹1,500 की गिरावट
- चांदी: ₹2,45,000 प्रति किलोग्राम
- चांदी में बदलाव: कोई बदलाव नहीं
- अंतरराष्ट्रीय सोना: $4,436 प्रति औंस
- अंतरराष्ट्रीय चांदी: $66.97 प्रति औंस
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
फिलहाल सोने की कीमतों में लगातार चौथे सत्र गिरावट से बाजार में सावधानी बढ़ी है। अमेरिकी ब्याज दरों की दिशा, डॉलर इंडेक्स, बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतें आने वाले दिनों में बुलियन मार्केट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
इसलिए सोने में निवेश करने वाले निवेशकों को केवल एक दिन की तेजी या गिरावट के बजाय वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और फेडरल रिजर्व की नीति पर भी नजर रखनी चाहिए।


