Aja Ekadashi 2026 Date: भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस बार यह व्रत 7 सितंबर को होगा। अजा एकादशी पर सर्वार्थ सिद्धि योग समेत कई शुभ योग बन रहे हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। साल में कुल 24 एकादशी आती हैं और अधिकमास होने पर इनकी संख्या बढ़ जाती है। प्रत्येक एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। इन्हीं में से एक है अजा एकादशी, जो भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष में पड़ती है।
अजा एकादशी को भादों महीने की पहली एकादशी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने और उपवास रखने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है। मान्यता यह भी है कि अजा एकादशी का व्रत जीवन की परेशानियों को दूर करने और सुख-समृद्धि बढ़ाने में सहायक होता है।
इस साल अजा एकादशी पर कुछ विशेष योग भी बन रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं अजा एकादशी 2026 की तारीख, पूजा मुहूर्त, शुभ योग, पारण समय और पूजा विधि के बारे में।
अजा एकादशी 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 सितंबर 2026 को शाम 7 बजकर 29 मिनट से शुरू होगी। यह तिथि 7 सितंबर को शाम 5 बजकर 3 मिनट तक रहेगी।
चूंकि एकादशी व्रत में उदयातिथि का विशेष महत्व माना जाता है, इसलिए इस साल अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जाएगा।
व्रत रखने वाले श्रद्धालु अगले दिन द्वादशी तिथि में पारण कर सकते हैं। 8 सितंबर 2026 को सुबह 6:02 बजे से 8:33 बजे तक पारण का समय बताया गया है।
अजा एकादशी 2026 की तारीख एक नजर में
- अजा एकादशी व्रत: 7 सितंबर 2026, सोमवार
- एकादशी तिथि शुरू: 6 सितंबर, शाम 7:29 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 7 सितंबर, शाम 5:03 बजे
- व्रत पारण: 8 सितंबर 2026
- पारण समय: सुबह 6:02 बजे से 8:33 बजे तक
अजा एकादशी पर बन रहा सर्वार्थ सिद्धि योग
इस बार अजा एकादशी का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि व्रत के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। पंचांग के अनुसार, सर्वार्थ सिद्धि योग 7 सितंबर की शाम 6:14 बजे से शुरू होगा और 8 सितंबर की सुबह 6:02 बजे तक रहेगा।
इसके अलावा व्रत वाले दिन सुबह 6:41 बजे तक व्यतीपात योग रहेगा। इसके बाद वरीयान योग शुरू होगा, जो अगले दिन तड़के 3:38 बजे तक रहने की जानकारी दी गई है। इसके बाद परिघ योग बनेगा।
धार्मिक मान्यताओं में सर्वार्थ सिद्धि योग को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। ऐसे में इस योग के दौरान भगवान विष्णु की पूजा और मंत्र जाप करना श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी माना जा सकता है।
अजा एकादशी 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त
अजा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए सुबह के समय दो शुभ अवधि बताई गई हैं।
- पहला पूजा मुहूर्त: सुबह 6:02 बजे से 7:36 बजे तक
- दूसरा पूजा मुहूर्त: सुबह 9:10 बजे से 10:45 बजे तक
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:31 बजे से 5:16 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:54 बजे से दोपहर 12:44 बजे तक
श्रद्धालु अपनी सुविधा और स्थानीय पंचांग के अनुसार इन मुहूर्तों में भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
अजा एकादशी का धार्मिक महत्व क्या है?
अजा एकादशी को लेकर कई पौराणिक मान्यताएं प्रचलित हैं। धार्मिक कथाओं के अनुसार, सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने अपना राज्य, परिवार और सम्मान खो दिया था। कठिन परिस्थितियों से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने महर्षि गौतम के सुझाव पर अजा एकादशी का व्रत किया।
मान्यता है कि अजा एकादशी के व्रत और भगवान विष्णु की आराधना के प्रभाव से राजा हरिश्चंद्र को अपना खोया हुआ राज्य, परिवार और सम्मान वापस प्राप्त हुआ।
इसी वजह से इस एकादशी को संकटों से मुक्ति और खोई हुई प्रतिष्ठा की पुनः प्राप्ति से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धापूर्वक अजा एकादशी का व्रत करने से पाप कर्मों से मुक्ति और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
कुछ धार्मिक ग्रंथों में इस व्रत के पुण्य की तुलना अश्वमेध यज्ञ के समान फल से भी की गई है। हालांकि, ये धार्मिक मान्यताएं हैं और इनका संबंध आस्था एवं परंपरा से है।
अजा एकादशी पर कैसे करें भगवान विष्णु की पूजा?
अजा एकादशी के दिन पूजा के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें।
पूजा के दौरान भगवान विष्णु के ऋषिकेश स्वरूप का ध्यान करते हुए उन्हें पीले फूल, तुलसी दल, फल, धूप और दीप अर्पित करें। इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।
अजा एकादशी की व्रत कथा का पाठ करना या किसी अन्य व्यक्ति से कथा सुनना भी शुभ माना जाता है। पूजा के अंत में भगवान विष्णु की आरती करें और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें।
अजा एकादशी पर क्या दान करें?
एकादशी के दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, तिल या अन्य उपयोगी सामग्री दान कर सकते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करने और सामर्थ्य के अनुसार दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
द्वादशी को इस तरह करें व्रत का पारण
अजा एकादशी का व्रत अगले दिन द्वादशी तिथि में पारण के साथ पूरा किया जाता है। इस साल पारण 8 सितंबर 2026 को सुबह 6:02 बजे से 8:33 बजे के बीच किया जा सकता है।
पारण से पहले भगवान विष्णु की पूजा करें। इसके बाद शुभ समय में भोजन या फलाहार ग्रहण कर व्रत खोलें। व्रत रखने वाले लोगों को अपने स्वास्थ्य और व्यक्तिगत क्षमता के अनुसार उपवास की विधि चुननी चाहिए।
ध्यान रखें
अजा एकादशी से जुड़े मुहूर्त और तिथि स्थानीय पंचांग तथा स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं। इसलिए व्रत और पारण से पहले अपने शहर के पंचांग से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई धार्मिक मान्यताएं और पूजा से जुड़े फल पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक तथ्य या गारंटी के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।


