Gold Silver Price: घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। कमजोर स्पॉट डिमांड और बाजार में निवेशकों की ओर से पोजीशन घटाने के कारण कीमती धातुओं पर दबाव बना। MCX पर सोना ₹1.53 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया, जबकि चांदी 1.73% गिरकर ₹2.28 लाख प्रति किलोग्राम पर आ गई। हालांकि, ग्लोबल बाजार में सोने और चांदी में हल्की तेजी रही।
MCX पर सोने की कीमत में गिरावट
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अक्टूबर डिलीवरी के लिए सोने के फ्यूचर्स में ₹636 यानी 0.41% की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद सोने का भाव करीब ₹1.53 लाख प्रति 10 ग्राम हो गया। इस कॉन्ट्रैक्ट में 837 लॉट का कारोबार हुआ।
घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर कमजोर स्पॉट डिमांड का असर देखने को मिला। ऊंची कीमतों के बीच खरीदारों की खरीदारी का तरीका भी बदल रहा है, जिससे फिजिकल मार्केट में मांग का पैटर्न प्रभावित हो रहा है।
चांदी में 1.73% की बड़ी गिरावट
चांदी ने सोने के मुकाबले ज्यादा कमजोरी दिखाई। सितंबर डिलीवरी के लिए चांदी के फ्यूचर्स में ₹4,023 यानी 1.73% की गिरावट आई और भाव करीब ₹2.28 लाख प्रति किलोग्राम हो गया। इस कॉन्ट्रैक्ट में 2,577 लॉट का कारोबार हुआ।
चांदी में गिरावट की एक वजह बाजार प्रतिभागियों की ओर से अपनी पोजीशन कम करना भी रही। चांदी में औद्योगिक मांग के साथ-साथ निवेश मांग का भी असर रहता है, इसलिए इसमें कीमतों का उतार-चढ़ाव सोने की तुलना में अधिक तेज हो सकता है।
ग्लोबल बाजार में क्या रहा हाल?
घरेलू बाजार में गिरावट के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं का रुख थोड़ा सकारात्मक रहा। न्यूयॉर्क में सोने के फ्यूचर्स करीब 0.10% बढ़कर $4,338.74 प्रति औंस पर पहुंच गए। वहीं, चांदी के दाम करीब 0.99% बढ़कर $62.74 प्रति औंस हो गए।
इससे संकेत मिलता है कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमतों की चाल हमेशा एक जैसी नहीं होती। डॉलर-रुपये की विनिमय दर, घरेलू मांग, स्थानीय प्रीमियम, टैक्स और फ्यूचर्स मार्केट में पोजीशन जैसे कई फैक्टर भारतीय कीमतों को प्रभावित करते हैं।
आगे सोने-चांदी पर किन फैक्टर्स का असर होगा?
Lemonn के रिसर्च हेड गौरव गर्ग के मुताबिक, US Treasury yields में गिरावट के बाद सोने में कुछ रिकवरी देखने को मिली। हालांकि, US Federal Reserve की मीटिंग के मिनट्स जारी होने से पहले निवेशक सतर्क नजर आए।
फेड के संकेत इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीद का सीधा असर सोने पर पड़ता है। आमतौर पर ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद बढ़ने पर सोने को सपोर्ट मिल सकता है, जबकि ऊंची दरों की संभावना और बढ़ती बॉन्ड यील्ड सोने पर दबाव डाल सकती है।
इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की दिशा भी महत्वपूर्ण रहेगी। डॉलर मजबूत होने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी पर दबाव आ सकता है, जबकि डॉलर में कमजोरी से कीमती धातुओं को सहारा मिल सकता है।
ऊंची कीमतों के बावजूद सोने की मांग खत्म नहीं हुई
सोने की कीमतों में गिरावट को ग्राहकों की दिलचस्पी में बड़ी कमी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। ऊंची कीमतों के बीच ग्राहक अपनी खरीदारी का तरीका बदल रहे हैं।
Indian Association for Gold Excellence and Standards (IAGES) के CEO कौशलेंद्र सिन्हा के अनुसार, ग्राहकों में सोने को लेकर दिलचस्पी अभी भी बनी हुई है। हालांकि, ऊंची कीमतों के कारण खरीदार हल्के वजन और ट्रेंडी डिजाइन वाली ज्वेलरी को प्राथमिकता दे रहे हैं।
कुछ परिवार नई ज्वेलरी खरीदने के बजाय पुरानी ज्वेलरी को एक्सचेंज करने या उसका डिजाइन बदलवाने का विकल्प भी चुन रहे हैं। इससे मौजूदा सोने की वैल्यू का इस्तेमाल करते हुए नई खरीदारी पर होने वाला अतिरिक्त खर्च कम किया जा सकता है।
त्योहार और शादी का सीजन बन सकता है अहम ट्रिगर
आने वाले त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में घरेलू बाजार में सोने की मांग बढ़ सकती है। ऐसे में अगर ज्वेलरी की खरीदारी मजबूत रहती है तो घरेलू कीमतों को कुछ सपोर्ट मिल सकता है।
हालांकि, केवल घरेलू मांग के आधार पर कीमतों की दिशा तय नहीं होगी। ग्लोबल ब्याज दरों की उम्मीद, US Treasury yields, डॉलर इंडेक्स, रुपये की चाल और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतें आगे भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
निवेशकों को क्या रणनीति अपनानी चाहिए?
सोने और चांदी में हालिया गिरावट को देखते हुए निवेशकों के लिए जल्दबाजी में एकमुश्त निवेश करने के बजाय बाजार की दिशा और प्रमुख ट्रिगर्स पर नजर रखना ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।
अगर ग्लोबल ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद मजबूत होती है और US Treasury yields नीचे आती हैं, तो सोने को सपोर्ट मिल सकता है। दूसरी ओर, डॉलर और बॉन्ड यील्ड में मजबूती की स्थिति में कीमती धातुओं पर दबाव बना रह सकता है।
चांदी में उतार-चढ़ाव सोने की तुलना में ज्यादा हो सकता है। इसलिए चांदी में निवेश करने वाले निवेशकों को अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखना चाहिए।
MCX और ज्वेलरी की कीमत एक जैसी नहीं होती
यह समझना जरूरी है कि MCX पर दिखने वाली फ्यूचर्स कीमत और बाजार में मिलने वाली रिटेल ज्वेलरी की अंतिम कीमत अलग होती है। रिटेल कीमत में टैक्स, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर का मार्जिन जैसी लागत शामिल हो सकती है।
इसी तरह अलग-अलग शहरों में फिजिकल सोने और चांदी की कीमतों में अंतर देखने को मिल सकता है। इसलिए खरीदारी करने से पहले स्थानीय ज्वेलर से अंतिम कीमत और सभी शुल्क की जानकारी लेना जरूरी है।
निष्कर्ष
घरेलू बाजार में सोने और चांदी पर फिलहाल दबाव दिखाई दे रहा है। MCX पर सोना करीब ₹1.53 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2.28 लाख प्रति किलोग्राम तक आ गई है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में दोनों धातुओं में हल्की तेजी रही।
आगे कीमतों की दिशा US फेड की ब्याज दरों को लेकर उम्मीद, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर-रुपये की चाल और घरेलू त्योहारी व शादी के सीजन की मांग पर निर्भर करेगी। ऐसे में निवेशकों के लिए कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच जोखिम को ध्यान में रखते हुए रणनीति बनाना अहम रहेगा।
डिस्क्लेमर: NewsJagran.in पर प्रकाशित यह जानकारी बाजार में उपलब्ध आंकड़ों और विशेषज्ञों के विचारों पर आधारित है। इसे निवेश की सलाह न माना जाए। सोना या चांदी में निवेश करने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति, जोखिम क्षमता और निवेश लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।


