Bihar Highway Project: केंद्र सरकार ने बिहार की एक बड़ी हाईवे परियोजना के साथ चार रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। बिहार में मुजफ्फरपुर-सितामढ़ी-सोनबरसा सेक्शन को फोरलेन किया जाएगा। वहीं, चार रेलवे परियोजनाओं पर करीब ₹9,450 करोड़ खर्च होंगे और इनके जरिए करीब 410 किलोमीटर रेल नेटवर्क बढ़ेगा।
Bihar Highway Project: केंद्र सरकार ने देश के इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में बिहार की एक अहम हाईवे परियोजना और चार रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है। इन पांचों परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत करीब ₹13,041 करोड़ है।
इनमें बिहार की सड़क परियोजना पर करीब ₹3,590.73 करोड़ खर्च किए जाएंगे, जबकि चार रेलवे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब ₹9,450 करोड़ है। सरकार के मुताबिक, इन परियोजनाओं से सड़क और रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी। साथ ही यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों के संचालन की क्षमता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
बिहार में 82.5 किलोमीटर हाईवे होगा फोरलेन
बिहार के लिए स्वीकृत परियोजना के तहत मुजफ्फरपुर-सितामढ़ी-सोनबरसा सेक्शन को चार लेन में अपग्रेड किया जाएगा। यह मार्ग NH-22 का हिस्सा है और इसकी लंबाई करीब 82.578 किलोमीटर है।
इस परियोजना की कुल पूंजीगत लागत ₹3,590.73 करोड़ बताई गई है। मौजूदा सड़क को अपग्रेड कर फोरलेन बनाया जाएगा, जिससे इस मार्ग की यातायात क्षमता बढ़ेगी और लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी।
इस सड़क का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह मुजफ्फरपुर को सितामढ़ी के रास्ते नेपाल सीमा के करीब सोनबरसा से जोड़ेगी। ऐसे में उत्तर बिहार के लिए यह परियोजना केवल स्थानीय यातायात के लिहाज से ही नहीं, बल्कि व्यापार और सीमा क्षेत्र की कनेक्टिविटी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
नेपाल बॉर्डर तक मजबूत होगी कनेक्टिविटी
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस परियोजना को बिहार के लिए महत्वपूर्ण लाइफलाइन बताया। उनके मुताबिक, यह एक बड़ी परिवहन आर्टरी के रूप में काम करेगी और आने वाले वर्षों में बिहार को इसका फायदा मिलेगा।
यह परियोजना ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट है, यानी मौजूदा सड़क को ही अपग्रेड करके चार लेन का बनाया जाएगा। निर्माण कार्य को करीब 30 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना में फ्लेक्सिबल पेवमेंट यानी ब्लैकटॉप रोड का इस्तेमाल किया जाएगा।
नेपाल सीमा के नजदीक तक बेहतर सड़क पहुंच बनने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ कारोबारियों और माल परिवहन से जुड़े लोगों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
Hybrid Annuity Mode पर बनेगा हाईवे
बिहार की इस सड़क परियोजना को Hybrid Annuity Mode (HAM) के तहत लागू किया जाएगा। इस मॉडल में सरकार और निजी क्षेत्र की भागीदारी के जरिए सड़क परियोजना को विकसित किया जाता है।
फोरलेन बनने के बाद मुजफ्फरपुर-सितामढ़ी-सोनबरसा मार्ग पर यातायात की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। इससे सफर का समय और आवागमन की सुविधा बेहतर हो सकती है। साथ ही उत्तर बिहार के महत्वपूर्ण इलाकों के बीच आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
₹9,450 करोड़ की चार रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी
कैबिनेट ने चार रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। इनकी कुल अनुमानित लागत करीब ₹9,450 करोड़ है।
ये परियोजनाएं पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के आठ जिलों से होकर गुजरेंगी। इन सभी प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद भारतीय रेलवे नेटवर्क में करीब 410 किलोमीटर का विस्तार होगा।
रेलवे की इन परियोजनाओं को 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
हावड़ा-चेन्नई रेल रूट होगा और मजबूत
स्वीकृत चार रेलवे परियोजनाओं में से तीन परियोजनाएं हावड़ा-चेन्नई मुख्य रेल मार्ग से संबंधित हैं। इस व्यस्त कॉरिडोर के महत्वपूर्ण हिस्सों में क्वाड्रपलिंग यानी रेल लाइन को चार ट्रैक तक बढ़ाने का काम किया जाएगा।
चौथी परियोजना कटक-पारादीप रेल सेक्शन से जुड़ी है। यहां तीसरी और चौथी रेल लाइन का निर्माण किया जाएगा।
हावड़ा-चेन्नई रूट देश के प्रमुख रेल कॉरिडोर में शामिल है। इस पर यात्री ट्रेनों के साथ बड़ी संख्या में मालगाड़ियों का भी संचालन होता है। अतिरिक्त ट्रैक बनने से इस रूट की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों को भी फायदा
रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं का सबसे बड़ा फायदा ट्रेनों के संचालन की क्षमता बढ़ने के रूप में सामने आ सकता है। अतिरिक्त लाइन उपलब्ध होने से एक ही कॉरिडोर पर ज्यादा ट्रेनों को संचालित करना आसान होगा।
इसका फायदा माल ढुलाई को भी मिल सकता है। व्यस्त रूट पर यात्री और मालगाड़ियों को अलग-अलग ट्रैक पर बेहतर तरीके से संचालित करने की सुविधा मिलेगी। इससे ट्रेन संचालन में समयबद्धता और क्षमता सुधारने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा, किसी एक ट्रैक पर रखरखाव का काम होने की स्थिति में दूसरे ट्रैक के जरिए ट्रेनों का संचालन जारी रखना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
चारों रेलवे प्रोजेक्ट से 410 किमी बढ़ेगा नेटवर्क
सरकार के मुताबिक, चारों रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट से करीब 410 किलोमीटर रेल नेटवर्क में बढ़ोतरी होगी। इन परियोजनाओं का उद्देश्य देश के महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर की क्षमता को भविष्य की यात्री और माल ढुलाई की जरूरतों के अनुरूप बढ़ाना है।
खास तौर पर हावड़ा-चेन्नई कॉरिडोर में अतिरिक्त ट्रैक बनने से पूर्वी और दक्षिणी भारत के बीच रेल संपर्क को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
पांच परियोजनाओं पर कुल ₹13,041 करोड़ का निवेश
केंद्रीय कैबिनेट के इन फैसलों में कुल पांच बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शामिल हैं। इनमें चार रेलवे और एक हाईवे परियोजना है।
| परियोजना | अनुमानित लागत | प्रमुख काम |
|---|---|---|
| चार रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट | ₹9,450 करोड़ | करीब 410 किमी रेल नेटवर्क विस्तार |
| मुजफ्फरपुर-सितामढ़ी-सोनबरसा हाईवे | ₹3,590.73 करोड़ | करीब 82.578 किमी सड़क को फोरलेन करना |
| कुल | करीब ₹13,041 करोड़ | रेल और सड़क कनेक्टिविटी मजबूत करना |
इन परियोजनाओं से देश के महत्वपूर्ण परिवहन कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाने के साथ बिहार में नेपाल सीमा तक सड़क संपर्क को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया है।
2030-31 तक पूरी होंगी रेलवे परियोजनाएं
चारों रेलवे परियोजनाओं को 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इनके पूरा होने के बाद हावड़ा-चेन्नई रेल कॉरिडोर पर ट्रेनों के संचालन की क्षमता बढ़ेगी और कटक-पारादीप सेक्शन में भी रेल नेटवर्क मजबूत होगा।
वहीं बिहार की हाईवे परियोजना को करीब 30 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है। इसके फोरलेन बनने के बाद मुजफ्फरपुर से सितामढ़ी और सोनबरसा की ओर सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार के ये फैसले रेल और सड़क दोनों क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। बिहार की परियोजना खास तौर पर उत्तर बिहार और नेपाल सीमा क्षेत्र की कनेक्टिविटी के लिए अहम हो सकती है, जबकि रेलवे प्रोजेक्ट देश के प्रमुख माल और यात्री परिवहन कॉरिडोर को मजबूत करेंगे।


