Market Outlook: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 19 अगस्त को लगातार दबाव देखने को मिला। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों गिरावट के साथ बंद हुए। निफ्टी 24,100 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया, जबकि सेंसेक्स में भी 326 अंकों से ज्यादा की कमजोरी रही। बाजार में बिकवाली के पीछे ग्लोबल संकेतों, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, बॉन्ड यील्ड और अमेरिका में फेडरल रिजर्व की आगामी नीति को लेकर बनी अनिश्चितता को प्रमुख वजह माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, 20 अगस्त को भी बाजार की दिशा काफी हद तक निफ्टी के 24,000 के आसपास के सपोर्ट और 24,150-24,250 के रेजिस्टेंस जोन के बीच तय हो सकती है। अगर इंडेक्स महत्वपूर्ण सपोर्ट के नीचे जाता है तो गिरावट और बढ़ सकती है, जबकि ऊपर की तरफ मजबूती लौटने पर शॉर्ट टर्म पुलबैक देखने को मिल सकता है।
19 अगस्त को कैसी रही बाजार की चाल?
19 अगस्त को कारोबार खत्म होने पर सेंसेक्स 325.78 अंक यानी 0.42% गिरकर 76,909.68 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 76.60 अंक यानी 0.32% की गिरावट के साथ 24,078.30 पर बंद हुआ।
बाजार की चौड़ाई भी कमजोर रही। करीब 1,725 शेयरों में तेजी, 2,386 शेयरों में गिरावट और 179 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। इससे संकेत मिलता है कि बिकवाली केवल चुनिंदा बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक बाजार पर भी इसका असर देखने को मिला।
निफ्टी के प्रमुख गिरने वाले शेयरों में पावर ग्रिड कॉरपोरेशन, मैक्स हेल्थकेयर, कोल इंडिया, ITC और बजाज फाइनेंस शामिल रहे। दूसरी ओर HCL टेक्नोलॉजीज, JSW स्टील, सन फार्मा, एटरनल और विप्रो बढ़त के साथ बंद हुए।
सेक्टोरल मोर्चे पर IT इंडेक्स को छोड़कर ज्यादातर सेक्टर लाल निशान में बंद हुए। डिफेंस इंडेक्स में करीब 1.5% और एनर्जी इंडेक्स में लगभग 1.2% की गिरावट देखने को मिली। ब्रॉडर मार्केट में भी दबाव रहा और मिडकैप इंडेक्स करीब 0.2% तथा स्मॉलकैप इंडेक्स लगभग 0.5% कमजोर हुआ।
FOMC मिनट्स से पहले बाजार में सतर्कता
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर के मुताबिक, अमेरिका में FOMC बैठक के मिनट्स जारी होने से पहले निवेशकों का रुख सतर्क रहा। बाजार इस बात को लेकर चिंतित है कि महंगाई के खिलाफ अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्ती कितने समय तक जारी रह सकती है।
इसके अलावा अमेरिका-ईरान सीजफायर खत्म होने के बाद किसी ठोस कूटनीतिक समाधान की कमी ने भी चिंता बढ़ाई है। इससे कच्चे तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड पर दबाव बना हुआ है। ऊंची यील्ड और महंगे तेल के बीच निवेशकों का जोखिम लेने का उत्साह कमजोर हुआ है।
एशियाई बाजारों में कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। हालांकि IT शेयरों में वैल्यू बाइंग और रुपये की कमजोरी से मिलने वाले संभावित फायदे के कारण अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला।
Q1 नतीजों से मिला सपोर्ट अब कितना मजबूत?
वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के नतीजों का सीजन अब लगभग समाप्त हो चुका है। इस दौरान कंपनियों के नतीजे कुल मिलाकर उम्मीद से बेहतर रहे हैं। इससे भारतीय कंपनियों की कमाई और अर्निंग्स ग्रोथ को लेकर निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।
हालांकि, बाजार को मिलने वाला यह कॉरपोरेट अर्निंग्स सपोर्ट अब धीरे-धीरे कम महत्वपूर्ण हो सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड, अमेरिकी फेड की नीति और भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
निफ्टी के लिए क्या हैं अहम लेवल?
कोटक सिक्योरिटीज के हेड इक्विटी रिसर्च श्रीकांत चौहान के अनुसार, बेंचमार्क इंडेक्स में ऊपरी स्तरों पर प्रॉफिट बुकिंग जारी है। निफ्टी 76 अंक गिरकर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स में करीब 326 अंकों की कमजोरी रही।
टेक्निकल नजरिए से इंट्राडे चार्ट पर निफ्टी में लोअर टॉप की सीरीज दिखाई दे रही है। डेली चार्ट पर बनी बेयरिश कैंडल भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत नहीं दे रही है। खास बात यह है कि निफ्टी लंबे समय बाद अपने 50-डे SMA के नीचे बंद हुआ है। इसे शॉर्ट टर्म में कमजोरी का संकेत माना जा रहा है।
हालांकि, अगर निफ्टी 24,150 के रेजिस्टेंस को मजबूती से पार करता है तो बाजार में एक छोटी पुलबैक रैली देखने को मिल सकती है। इस स्थिति में निफ्टी के 24,300-24,350 तक पहुंचने की संभावना बन सकती है।
इसके विपरीत 24,000 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण सपोर्ट है। अगर निफ्टी 24,000 के नीचे टिकता है तो बिकवाली का दबाव और बढ़ सकता है।
SBI Securities ने बताए 23,900 और 23,750 के सपोर्ट
SBI Securities में हेड-टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च सुदीप शाह के मुताबिक, निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 23,950-23,900 के जोन में है।
अगर इंडेक्स इस सपोर्ट जोन के नीचे जाता है और वहां टिकता है तो शॉर्ट टर्म में कमजोरी बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में निफ्टी के लिए अगला लक्ष्य 23,750 और उसके बाद 23,600 के आसपास हो सकता है।
वहीं ऊपर की तरफ निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 24,230-24,250 के जोन में है। इस जोन के ऊपर टिकाऊ मजबूती आने पर बाजार में सेंटीमेंट कुछ बेहतर हो सकता है।
20 अगस्त को निफ्टी की कैसी रह सकती है चाल?
20 अगस्त के लिए निफ्टी का तकनीकी सेटअप फिलहाल कमजोर नजर आ रहा है। एक तरफ 24,000 का मनोवैज्ञानिक सपोर्ट है, जबकि दूसरी तरफ 24,150-24,250 का जोन महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस बन गया है।
बुलिश स्थिति: अगर निफ्टी 24,150 के ऊपर निकलकर 24,230-24,250 के जोन को भी पार करता है तो शॉर्ट कवरिंग और पुलबैक देखने को मिल सकता है। इसके बाद 24,300-24,350 की तरफ बढ़ने की संभावना बन सकती है।
बेयरिश स्थिति: अगर निफ्टी 24,000 के नीचे फिसलता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। 23,950-23,900 के सपोर्ट के टूटने पर 23,750 और फिर 23,600 के स्तर पर नजर रहेगी।
इसलिए अगले कारोबारी सत्र में निवेशकों के लिए 24,000 और 24,250 के बीच की रेंज बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है।
Bank Nifty में भी कमजोरी के संकेत
बैंक निफ्टी की बात करें तो इंडेक्स बुधवार को गिरावट के साथ खुला और ज्यादातर समय एक सीमित दायरे में कारोबार करता रहा। हालांकि कारोबार के अंत में इसमें कमजोरी बढ़ी।
बैंक निफ्टी कुछ समय के लिए अपने 50-डे EMA के नीचे चला गया था, लेकिन दिन के अंत में इसके ऊपर बंद होने में सफल रहा। यह अहम स्तर पिछले छह कारोबारी सत्रों से इंडेक्स को सपोर्ट देता रहा है।
दूसरी तरफ 20-डे EMA पिछले तीन सत्रों से बैंक निफ्टी के लिए मजबूत रेजिस्टेंस का काम कर रहा है। टेक्निकल इंडिकेटर्स भी फिलहाल बहुत मजबूत संकेत नहीं दे रहे हैं। RSI लगातार नीचे की तरफ जा रहा है और MACD लाइन में भी गिरावट देखी जा रही है। रेड हिस्टोग्राम बार का बढ़ना धीरे-धीरे बढ़ते बेयरिश मोमेंटम का संकेत दे रहा है।
Bank Nifty के लिए 56,700-56,800 अहम सपोर्ट
सुदीप शाह के अनुसार, बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 56,800-56,700 के जोन में है।
अगर बैंक निफ्टी इस जोन के नीचे टिकता है तो शॉर्ट टर्म में गिरावट बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में इंडेक्स पहले 56,300 और उसके बाद 56,000 के स्तर तक फिसल सकता है।
ऊपर की तरफ बैंक निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 57,600-57,700 के जोन में है। इस स्तर के ऊपर मजबूती आने पर ही शॉर्ट टर्म में दबाव कुछ कम होने की उम्मीद की जा सकती है।
निवेशकों को किन बातों पर रखनी चाहिए नजर?
20 अगस्त के कारोबार में निवेशकों को सिर्फ इंडेक्स के स्तरों पर ही नहीं, बल्कि ग्लोबल संकेतों पर भी नजर रखनी होगी। खास तौर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व से जुड़े संकेत, बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिका-ईरान तनाव बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।
इसके अलावा रुपये की चाल और IT शेयरों में खरीदारी भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। अगर ग्लोबल बाजारों में कमजोरी जारी रहती है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो भारतीय इक्विटी बाजार पर दबाव कायम रह सकता है।
कुल मिलाकर, 20 अगस्त के लिए निफ्टी का रुझान फिलहाल सावधानी वाला और कमजोर नजर आ रहा है। 24,000 के नीचे कमजोरी बढ़ सकती है, जबकि 24,150-24,250 के ऊपर मजबूती आने पर बाजार में राहत की रैली देखने को मिल सकती है। ऐसे में निवेशकों को किसी एक स्तर को देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय बाजार की पुष्टि और अपनी जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए।
डिस्क्लेमर: इस लेख में बाजार विशेषज्ञों के विचार और तकनीकी स्तर केवल जानकारी के उद्देश्य से दिए गए हैं। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश संबंधी निर्णय से पहले अपने सर्टिफाइड वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


