कार्डियो एक्सरसाइज का नाम लेते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में रनिंग आती है। लेकिन क्या दिल की सेहत और फिटनेस के लिए दौड़ना ही सबसे अच्छा विकल्प है? कार्डियोलॉजिस्ट के मुताबिक ऐसा जरूरी नहीं है। तेज चाल से चलना, स्विमिंग और HIIT जैसे वर्कआउट भी कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। इनमें से आपके लिए कौन सा सबसे सही है, यह आपकी फिटनेस, उम्र, स्वास्थ्य, समय और पसंद पर निर्भर करता है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लंबे समय तक बैठे रहना आम हो गया है। ऐसे में नियमित कार्डियो एक्सरसाइज शरीर को एक्टिव रखने के साथ-साथ दिल और फेफड़ों की क्षमता को बेहतर करने में मदद कर सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति के लिए एक जैसा वर्कआउट सही नहीं होता।
Firstpost की रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरु के महादेवपुरा स्थित KIMS Hospitals के कार्डियोलॉजी डायरेक्टर और लीड कंसल्टेंट डॉ. दीपक कृष्णमूर्ति का कहना है कि सबसे अच्छा कार्डियो वह नहीं है जो सबसे ज्यादा कठिन हो, बल्कि वह है जिसे व्यक्ति सुरक्षित तरीके से लंबे समय तक नियमित रूप से कर सके।
उनके मुताबिक वॉकिंग, स्विमिंग और HIIT तीनों ही प्रभावी कार्डियो विकल्प हो सकते हैं, लेकिन इनके फायदे और चुनौतियां अलग-अलग हैं।
वॉकिंग: शुरुआत करने वालों के लिए आसान विकल्प
अगर आपने लंबे समय से एक्सरसाइज नहीं की है या अभी फिटनेस रूटीन शुरू करने की सोच रहे हैं, तो ब्रिस्क वॉकिंग यानी तेज चाल से चलना सबसे आसान विकल्पों में से एक हो सकता है।
वॉकिंग को कई बार हल्की एक्सरसाइज समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन नियमित रूप से तेज चलने से कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस में सुधार हो सकता है। इसकी खासियत यह है कि इसे जिम या किसी विशेष उपकरण के बिना भी किया जा सकता है।
डॉ. कृष्णमूर्ति के अनुसार, यह खासतौर पर शुरुआत करने वालों, बुजुर्गों और लंबे समय के ब्रेक के बाद दोबारा शारीरिक गतिविधि शुरू करने वाले लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है।
वॉकिंग लो-इम्पैक्ट एक्सरसाइज है। यानी दौड़ने जैसी हाई-इम्पैक्ट गतिविधियों की तुलना में इसमें जोड़ों पर अपेक्षाकृत कम दबाव पड़ता है। यही कारण है कि बहुत से लोग इसे अपनी रोजाना की फिटनेस रूटीन में आसानी से शामिल कर सकते हैं।
तेज चलने के प्रमुख फायदे
- कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस बेहतर करने में मदद
- कैलोरी बर्न करने में सहायक
- वजन को मैनेज करने में मदद
- ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर कंट्रोल में योगदान
- पैरों की मांसपेशियों को एक्टिव रखने में मदद
- स्टैमिना और सहनशक्ति बढ़ाने में मदद
- जोड़ों पर अपेक्षाकृत कम दबाव
हालांकि, शुरुआत में बहुत तेज चलने या लंबी दूरी तय करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। पहले ऐसी अवधि और गति चुनें जिसे आप आराम से जारी रख सकें। इसके बाद धीरे-धीरे समय, दूरी या चाल की गति बढ़ाई जा सकती है। जरूरत पड़ने पर चढ़ाई वाले रास्ते को शामिल करके भी वर्कआउट की चुनौती बढ़ाई जा सकती है।
स्विमिंग: पूरे शरीर को एक्टिव करने वाला कार्डियो
अगर आपको पानी में एक्सरसाइज करना पसंद है और तैरना आता है, तो स्विमिंग भी एक प्रभावी कार्डियो वर्कआउट हो सकती है।
तैरते समय शरीर को पानी के रेजिस्टेंस के खिलाफ काम करना पड़ता है। इससे कई बड़े मसल ग्रुप एक साथ सक्रिय होते हैं। वहीं पानी की buoyancy शरीर के वजन को कुछ हद तक सपोर्ट करती है, जिससे जोड़ों पर पड़ने वाला दबाव कम हो सकता है।
यही वजह है कि जो लोग हाई-इम्पैक्ट एक्सरसाइज से असहज महसूस करते हैं, उनके लिए स्विमिंग एक आकर्षक विकल्प हो सकती है।
डॉ. कृष्णमूर्ति के मुताबिक स्विमिंग में कार्डियोवैस्कुलर एक्टिविटी के साथ-साथ मांसपेशियों का भी इस्तेमाल होता है। इसलिए सही तकनीक और अपनी क्षमता के अनुसार तीव्रता रखने पर यह प्रभावी वर्कआउट बन सकती है।
स्विमिंग के फायदे
- कार्डियोवैस्कुलर क्षमता को बेहतर करने में मदद
- शरीर की कई मांसपेशियां एक साथ एक्टिव होती हैं
- मांसपेशियों की सहनशक्ति बढ़ाने में मदद
- कैलोरी बर्न करने में सहायक
- स्टैमिना बढ़ाने में मदद
- लो-इम्पैक्ट वर्कआउट का विकल्प
- जोड़ों पर अपेक्षाकृत कम तनाव
लेकिन स्विमिंग शुरू करने से पहले एक जरूरी बात ध्यान में रखनी चाहिए। अगर आपको ठीक से तैरना नहीं आता या पानी में आत्मविश्वास नहीं है, तो इसे सीधे हाई-इंटेंसिटी एक्सरसाइज की तरह शुरू नहीं करना चाहिए। पहले सही तकनीक सीखना ज्यादा जरूरी है।
HIIT: कम समय में ज्यादा इंटेंसिटी
जिन लोगों के पास एक्सरसाइज के लिए ज्यादा समय नहीं है, उनके लिए HIIT यानी High-Intensity Interval Training एक विकल्प हो सकता है।
HIIT में थोड़े समय के लिए ज्यादा तीव्रता वाली एक्सरसाइज की जाती है और उसके बाद आराम या कम तीव्रता वाला इंटरवल रखा जाता है। इस तरह हाई-इंटेंसिटी और रिकवरी पीरियड को बारी-बारी से दोहराया जाता है।
HIIT सेशन में व्यक्ति के फिटनेस लेवल के अनुसार तेज साइकलिंग, रनिंग, बॉडीवेट एक्सरसाइज या दूसरी गतिविधियां शामिल की जा सकती हैं।
HIIT के फायदे
- कम समय में ज्यादा इंटेंसिटी वाला वर्कआउट
- कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस को चुनौती देने में मदद
- एंड्योरेंस बढ़ाने में सहायक
- कैलोरी बर्न करने में मदद
- एक्सरसाइज रूटीन में विविधता
- कार्डियो और मसल्स दोनों पर काम करने का मौका
- कम समय उपलब्ध होने वाले लोगों के लिए उपयोगी
लेकिन HIIT का मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को अपनी पूरी क्षमता से एक्सरसाइज करनी चाहिए। इसकी सबसे बड़ी खासियत ही इसकी इंटेंसिटी है और यही वजह है कि इसे व्यक्ति की फिटनेस और स्वास्थ्य के अनुसार करना जरूरी है।
डॉ. कृष्णमूर्ति के मुताबिक HIIT में इंटरवल, रिकवरी टाइम और एक्सरसाइज की तीव्रता व्यक्ति की क्षमता के हिसाब से तय होनी चाहिए। खासकर शुरुआत करने वालों को सीधे बहुत कठिन HIIT सेशन नहीं करना चाहिए।
अगर किसी व्यक्ति को पहले से कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या है या वह लंबे समय से निष्क्रिय रहा है, तो हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य एक्सरसाइज प्रोफेशनल से सलाह लेना बेहतर है।
वॉकिंग, स्विमिंग और HIIT में कौन है सबसे बेहतर?
इस सवाल का एक ही जवाब नहीं है। तीनों वर्कआउट अलग-अलग लोगों के लिए अलग तरह से उपयोगी हो सकते हैं।
| कार्डियो | किसके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है | खासियत |
|---|---|---|
| ब्रिस्क वॉकिंग | शुरुआती, बुजुर्ग और रोजाना एक्टिविटी चाहने वाले | आसान और लो-इम्पैक्ट |
| स्विमिंग | पूरे शरीर का लो-इम्पैक्ट वर्कआउट चाहने वाले | पानी का रेजिस्टेंस और कई मसल्स की भागीदारी |
| HIIT | पहले से फिट और कम समय वाले लोग | कम समय में ज्यादा इंटेंसिटी |
अगर आप अभी एक्सरसाइज शुरू कर रहे हैं, तो तेज चलना एक व्यावहारिक शुरुआत हो सकती है। अगर आपको तैरना आता है और पानी में एक्सरसाइज करना पसंद है, तो स्विमिंग अच्छा विकल्प हो सकता है। वहीं अगर आप पहले से फिट हैं और कम समय में ज्यादा चुनौतीपूर्ण वर्कआउट चाहते हैं, तो HIIT पर विचार किया जा सकता है।
सबसे जरूरी चीज है एक्सरसाइज में निरंतरता
फिटनेस के लिए सिर्फ यह पता लगाना काफी नहीं है कि कौन सा वर्कआउट सबसे ज्यादा कैलोरी बर्न करता है या कौन सा सबसे कठिन है। असली फायदा तब मिलता है जब आप किसी गतिविधि को नियमित रूप से जारी रख पाते हैं।
मान लीजिए कोई व्यक्ति बहुत कठिन HIIT वर्कआउट करता है, लेकिन उसे सप्ताह में सिर्फ एक बार ही कर पाता है। दूसरी तरफ कोई व्यक्ति रोजाना तेज चाल से चलता है और महीनों तक इसे जारी रखता है। ऐसे में लगातार की जाने वाली गतिविधि उसके लिए ज्यादा व्यावहारिक हो सकती है।
डॉ. कृष्णमूर्ति भी इसी बात पर जोर देते हैं कि कार्डियो के फायदे नियमितता से जुड़े हैं। ऐसी एक्सरसाइज चुनना ज्यादा महत्वपूर्ण है जिसे व्यक्ति लंबे समय तक सुरक्षित तरीके से कर सके।
तीनों कार्डियो को रूटीन में किया जा सकता है शामिल
जरूरी नहीं कि आप सिर्फ एक ही प्रकार की कार्डियो एक्सरसाइज करें। अपनी क्षमता, उपलब्ध समय और पसंद के अनुसार अलग-अलग गतिविधियों को रूटीन में शामिल किया जा सकता है।
उदाहरण के तौर पर कोई व्यक्ति ज्यादातर दिनों में ब्रिस्क वॉक कर सकता है, सप्ताह में एक-दो बार स्विमिंग कर सकता है और अपनी फिटनेस के अनुसार कभी-कभी हाई-इंटेंसिटी सेशन कर सकता है।
इससे वर्कआउट में विविधता भी बनी रहती है और एक ही एक्सरसाइज से होने वाली बोरियत कम हो सकती है।
निष्कर्ष: आपके लिए वही कार्डियो बेस्ट है जिसे आप जारी रख सकें
वॉकिंग, स्विमिंग और HIIT में किसी एक को हर व्यक्ति के लिए सबसे अच्छा कार्डियो वर्कआउट कहना सही नहीं होगा। ब्रिस्क वॉकिंग आसान शुरुआत दे सकती है, स्विमिंग पूरे शरीर को एक्टिव करने वाला लो-इम्पैक्ट विकल्प हो सकती है और HIIT कम समय में ज्यादा इंटेंसिटी वाला वर्कआउट दे सकता है।
इसलिए सवाल यह नहीं होना चाहिए कि इन तीनों में सबसे अच्छा कौन है। बेहतर सवाल यह है कि आपकी फिटनेस, स्वास्थ्य, समय और पसंद के हिसाब से कौन सा वर्कआउट ऐसा है जिसे आप सुरक्षित और लगातार कर सकते हैं।
अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से एक्सरसाइज नहीं कर रहा है, तो धीरे-धीरे शुरुआत करना बेहतर है। वहीं किसी भी हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट को अपनी क्षमता के अनुसार करना चाहिए। किसी मौजूदा स्वास्थ्य समस्या या एक्सरसाइज को लेकर चिंता होने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
आखिरकार, परफेक्ट कार्डियो वर्कआउट से ज्यादा जरूरी वह एक्सरसाइज है जिसे आप नियमित रूप से करते रहें। यही निरंतरता लंबे समय में फिटनेस और दिल की सेहत के लिए ज्यादा मायने रखती है।


