India Forex Demand: भारत में विदेशी मुद्रा यानी फॉरेक्स की मांग अब सिर्फ दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रह गई है। छोटे शहरों में विदेश यात्रा, बिजनेस ट्रैवल और पढ़ाई के लिए जाने वाले लोगों की संख्या बढ़ने के साथ विदेशी करेंसी की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। थॉमस कुक इंडिया की ‘फॉरेक्स रिपोर्ट 2026’ के मुताबिक, टियर-2 और टियर-3 शहरों ने मिलकर देश की कुल फॉरेक्स मांग में 53 फीसदी हिस्सेदारी दर्ज की है।
रिपोर्ट अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच थॉमस कुक इंडिया के ट्रांजैक्शन डेटा पर आधारित है। आंकड़ों से संकेत मिलता है कि भारत के छोटे शहर अब विदेश यात्रा और उससे जुड़ी वित्तीय सेवाओं के लिए तेजी से महत्वपूर्ण बाजार बन रहे हैं।
छोटे शहरों की फॉरेक्स डिमांड महानगरों से आगे
रिपोर्ट के मुताबिक, समीक्षा अवधि में टियर-2 और टियर-3 शहरों की संयुक्त हिस्सेदारी कुल फॉरेक्स मांग में 53 फीसदी रही। इसमें अकेले टियर-2 शहरों का योगदान 41 फीसदी और टियर-3 शहरों का योगदान 12 फीसदी रहा।
इसके मुकाबले मेट्रो शहरों समेत टियर-1 शहरों की हिस्सेदारी 47 फीसदी रही। यानी छोटे शहरों ने बड़े शहरी केंद्रों को पीछे छोड़ते हुए फॉरेक्स बाजार में अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराई।
थॉमस कुक इंडिया के अनुसार, भारत के उभरते शहर फॉरेक्स ग्रोथ के अगले चरण को आगे बढ़ा रहे हैं। इसका एक बड़ा कारण छोटे शहरों से विदेश यात्रा करने वाले लोगों की बढ़ती संख्या और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा एवं बिजनेस गतिविधियों का विस्तार है।
विदेश घूमने के लिए सबसे ज्यादा खरीदी गई विदेशी करेंसी
फॉरेक्स की कुल मांग में सबसे बड़ा हिस्सा ट्रैवल यानी घूमने-फिरने से जुड़ा रहा। रिपोर्ट के अनुसार, कुल ट्रांजैक्शन में टूरिज्म से संबंधित मांग की हिस्सेदारी 57 फीसदी थी।
इसके बाद कॉर्पोरेट ट्रैवल की हिस्सेदारी 27 फीसदी और विदेश में पढ़ाई के लिए जाने वाले छात्रों की हिस्सेदारी 16 फीसदी रही।
इससे साफ है कि भारतीयों के बीच विदेश घूमने का चलन बढ़ने के साथ विदेशी मुद्रा की जरूरत भी बढ़ रही है। वहीं, कंपनियों के अंतरराष्ट्रीय कारोबार और विदेश में उच्च शिक्षा के लिए जाने वाले छात्रों की वजह से भी फॉरेक्स बाजार को मजबूती मिल रही है।
25-40 साल के लोग सबसे बड़े फॉरेक्स यूजर
उम्र के हिसाब से देखें तो 25 से 40 साल के यात्रियों की फॉरेक्स मांग सबसे ज्यादा रही। इस आयु वर्ग की हिस्सेदारी 37 फीसदी थी।
इसके बाद 41 से 60 साल के यात्रियों का नंबर रहा, जिनकी हिस्सेदारी 36 फीसदी थी। यानी इन दोनों आयु वर्गों ने मिलकर फॉरेक्स मांग का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा बनाया।
वहीं, 60 साल से ज्यादा उम्र के यात्रियों की हिस्सेदारी 21 फीसदी रही। सबसे कम हिस्सेदारी 18 से 24 साल के युवाओं की रही, जो कुल फॉरेक्स मांग का 6 फीसदी थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, मिलेनियल्स और Gen X मिलकर फॉरेक्स के इस्तेमाल का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा बनाते हैं। साथ ही, वरिष्ठ नागरिक भी विदेश यात्रा के लिए विदेशी मुद्रा की मांग में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
डॉलर सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली विदेशी करेंसी
विदेशी करेंसी की बात करें तो अमेरिकी डॉलर सबसे ज्यादा मांग वाली मुद्रा रही। कुल फॉरेक्स मांग में डॉलर की हिस्सेदारी 49 फीसदी रही। यानी करीब आधी विदेशी मुद्रा मांग अमेरिकी डॉलर से जुड़ी रही।
इसके बाद यूरोप और ब्रिटेन में इस्तेमाल होने वाली यूरो और ब्रिटिश पाउंड जैसी करेंसी की संयुक्त हिस्सेदारी 23 फीसदी रही।
एशियाई देशों की करेंसी की हिस्सेदारी 11 फीसदी रही। इस श्रेणी में थाई बहत, सिंगापुर डॉलर, जापानी येन, वियतनामी डोंग और इंडोनेशियाई रुपिया जैसी मुद्राएं शामिल हैं।
मध्य पूर्व की करेंसी में यूएई दिरहम और सऊदी रियाल सबसे प्रमुख रहे। इनकी संयुक्त हिस्सेदारी करीब 9 फीसदी रही।
वहीं, ऑस्ट्रेलियाई और न्यूजीलैंड की करेंसी की हिस्सेदारी 5 फीसदी, जबकि कनाडाई डॉलर समेत अन्य संबंधित करेंसी की हिस्सेदारी 3 फीसदी रही।
डिजिटल फॉरेक्स खरीद का चलन भी बढ़ा
फॉरेक्स खरीदने के तरीके में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। भारतीय यात्री अब डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा रहे हैं। हालांकि, अभी भी ब्रांच के जरिए फॉरेक्स खरीदना सबसे पसंदीदा तरीका बना हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कुल फॉरेक्स खरीद में 75 फीसदी ट्रांजैक्शन ब्रांच के माध्यम से किए गए, जबकि 25 फीसदी खरीद डिजिटल चैनलों के जरिए हुई।
थॉमस कुक इंडिया के चैनलों पर डिजिटल फॉरेक्स इस्तेमाल में सालाना 25 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। इसके अलावा पिछले दो वर्षों में DIY यानी खुद ऑनलाइन फॉरेक्स खरीदने वाले प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल में सालाना करीब 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
क्यों बढ़ रही है छोटे शहरों में फॉरेक्स की मांग?
छोटे शहरों में फॉरेक्स की बढ़ती मांग को भारत में बढ़ते अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल ट्रेंड से जोड़कर देखा जा सकता है। अब विदेश यात्रा सिर्फ महानगरों के उच्च आय वर्ग तक सीमित नहीं रह गई है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी ऐसे परिवारों और युवाओं की संख्या बढ़ रही है जो विदेश घूमने, पढ़ाई या कारोबार के लिए यात्रा कर रहे हैं।
इसके अलावा डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन ट्रैवल बुकिंग की आसान उपलब्धता ने अंतरराष्ट्रीय यात्राओं को पहले की तुलना में अधिक सुलभ बनाया है। इससे छोटे शहरों से विदेश जाने वाले यात्रियों के लिए फॉरेक्स सेवाओं की मांग बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
बदल रहा है भारत का फॉरेक्स बाजार
थॉमस कुक इंडिया की रिपोर्ट से एक बड़ा ट्रेंड सामने आता है कि भारत का फॉरेक्स बाजार अब महानगर-केंद्रित नहीं रह गया है। टियर-2 और टियर-3 शहरों की 53 फीसदी हिस्सेदारी बताती है कि देश के छोटे शहरी केंद्र अंतरराष्ट्रीय यात्रा के नए ग्रोथ इंजन बन रहे हैं।
साथ ही, डॉलर की मजबूत मांग, टूरिज्म का सबसे बड़ा योगदान और डिजिटल फॉरेक्स खरीद में लगातार वृद्धि यह संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में भारतीय फॉरेक्स बाजार का स्वरूप और तेजी से बदल सकता है। छोटे शहरों के यात्रियों की बढ़ती भागीदारी इस बदलाव में अहम भूमिका निभा सकती है।


