Karnataka PUC Fee Hike: कर्नाटक में वाहन मालिकों के लिए जरूरी खबर है। राज्य सरकार ने वाहनों के प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र यानी PUC (Pollution Under Control) की फीस बढ़ा दी है। नई दरें 15 अगस्त 2026 से लागू हो गई हैं। ऐसे में अब बाइक, कार, ऑटो और अन्य वाहनों का PUC सर्टिफिकेट बनवाने के लिए पहले के मुकाबले ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे।
राज्य सरकार ने यह फैसला परिवहन आयुक्त और सड़क सुरक्षा आयुक्त की ओर से दिए गए प्रस्ताव के बाद लिया है। 13 अगस्त को जारी आदेश के मुताबिक, अधिकृत प्रदूषण जांच केंद्रों पर अलग-अलग श्रेणी के वाहनों के लिए नई फीस तय की गई है।
कर्नाटक में PUC कराना हुआ महंगा
नई दरों के तहत दोपहिया वाहनों की PUC जांच फीस 65 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये कर दी गई है। वहीं ऑटो रिक्शा के लिए फीस 75 रुपये से बढ़कर 80 रुपये हो गई है।
पेट्रोल, LPG और CNG से चलने वाली कारों के मालिकों को अब PUC जांच के लिए 150 रुपये देने होंगे। पहले यह फीस 115 रुपये थी। यानी इन वाहनों के लिए सीधे 35 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
वहीं डीजल वाहनों की PUC जांच फीस 160 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये कर दी गई है। यानी डीजल वाहन मालिकों को अब 40 रुपये ज्यादा देने होंगे।
नई PUC फीस की पूरी लिस्ट
| वाहन | पुरानी फीस | नई फीस |
|---|---|---|
| दोपहिया वाहन | ₹65 | ₹80 |
| ऑटो रिक्शा | ₹75 | ₹80 |
| पेट्रोल/LPG/CNG कार | ₹115 | ₹150 |
| डीजल वाहन | ₹160 | ₹200 |
सरकार ने क्यों बढ़ाई PUC की फीस?
सरकार के मुताबिक, प्रदूषण जांच केंद्रों की ऑपरेशनल लागत बढ़ने की वजह से फीस में संशोधन जरूरी हो गया था। इसमें कई तरह के खर्च शामिल हैं। कच्चे माल की कीमत, पेट्रोल-डीजल का खर्च, प्रदूषण जांच केंद्रों का किराया, इंटरनेट से जुड़े उपकरणों का रखरखाव, प्रिंटर की स्याही, बिजली और कर्मचारियों की सैलरी जैसी लागत बढ़ने से PUC केंद्र संचालकों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा था।
कर्नाटक उत्सर्जन जांच केंद्र मालिक संघ की ओर से भी लंबे समय से फीस बढ़ाने की मांग की जा रही थी। सरकार के फैसले के बाद संघ के अध्यक्ष योगेश ने इसका स्वागत किया और कहा कि फीस में बदलाव की मांग काफी समय से की जा रही थी।
सिर्फ अधिकृत PUC केंद्र ही ले सकेंगे नई फीस
सरकार के आदेश के अनुसार, संशोधित फीस लेने का अधिकार कंप्यूटर आधारित अधिकृत प्रदूषण जांच केंद्रों को ही होगा। यह शुल्क वाहन के उत्सर्जन की जांच करने और PUC प्रमाणपत्र जारी करने के लिए लिया जाएगा।
PUC केंद्रों को जांच प्रक्रिया के दौरान तय नियमों का पालन भी करना होगा। केंद्र पर योग्य और प्रशिक्षित कर्मचारियों की नियुक्ति जरूरी होगी। इसके अलावा वाहनों के उत्सर्जन की जांच करने वाली गैस एनालाइजर मशीन की समय-समय पर री-कैलिब्रेशन भी करानी होगी।
केंद्र में गैस एनालाइजर की सबसे हाल की री-कैलिब्रेशन की तारीख और समय ऐसी जगह प्रदर्शित करना होगा, जहां उसे आसानी से देखा जा सके।
PUC सर्टिफिकेट में हाथ से बदलाव नहीं कर सकेंगे
नए नियमों के तहत PUC प्रमाणपत्र में हाथ से किसी तरह की एंट्री या बदलाव की अनुमति नहीं होगी। इसका उद्देश्य प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को पारदर्शी और डिजिटल तरीके से नियंत्रित करना है।
केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 115 के अनुसार, किसी वाहन को PUC प्रमाणपत्र तभी जारी किया जा सकता है जब उसका उत्सर्जन स्तर निर्धारित सीमा के भीतर हो। यानी केवल फीस जमा करने से PUC प्रमाणपत्र नहीं मिलेगा, बल्कि वाहन को तय प्रदूषण मानकों को पूरा करना भी जरूरी होगा।
कितने समय तक वैध रहता है PUC?
वाहन के प्रदूषण प्रमाणपत्र की वैधता उसकी श्रेणी और लागू उत्सर्जन मानकों पर निर्भर करती है। सामान्य तौर पर PUC प्रमाणपत्र की वैधता अवधि अलग-अलग वाहनों के लिए अलग हो सकती है।
सरकार के आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि BS-IV और BS-VI उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों के लिए नियमों के तहत PUC की वैधता एक साल तक हो सकती है। इसलिए वाहन मालिकों को अपने वाहन की PUC वैधता की तारीख जरूर जांचते रहना चाहिए।
वाहन मालिकों पर कितना बढ़ा बोझ?
नई फीस से सबसे ज्यादा असर डीजल कार और अन्य डीजल वाहनों के मालिकों पर पड़ेगा, क्योंकि उनकी PUC जांच फीस में 40 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। पेट्रोल, LPG और CNG कारों के लिए फीस 35 रुपये बढ़ी है। दोपहिया वाहनों पर 15 रुपये और ऑटो रिक्शा पर 5 रुपये की अतिरिक्त फीस देनी होगी।
हालांकि, PUC की फीस में यह बढ़ोतरी वाहन मालिकों के लिए बहुत बड़ी रकम नहीं है, लेकिन जिन लोगों को नियमित रूप से अपने वाहन का प्रदूषण प्रमाणपत्र अपडेट कराना होता है, उनके लिए नई दरें लागू होने के बाद हर बार पहले से अधिक भुगतान करना पड़ेगा।
इसलिए अगर आप कर्नाटक में बाइक, कार या ऑटो चलाते हैं, तो 15 अगस्त 2026 से PUC बनवाते समय नई फीस के अनुसार भुगतान करना होगा।


