Electric Air Taxi in India: भारत में आने वाले कुछ सालों में शहरी परिवहन का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। केंद्र सरकार इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी यानी eVTOL को देश में लाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू के मुताबिक, सरकार का लक्ष्य 2028 तक इन इलेक्ट्रिक एयरक्राफ्ट को भारत में उड़ान भरते देखना है। अगले साल से इनकी टेस्टिंग और ट्रायल प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
कल्पना कीजिए कि आपको नोएडा से गुरुग्राम जाना है और सड़क पर घंटों ट्रैफिक में फंसने के बजाय आप मोबाइल ऐप से एयर टैक्सी बुक कर लेते हैं। कुछ समय बाद आप किसी वर्टिपैड पर पहुंचते हैं और एक इलेक्ट्रिक एयरक्राफ्ट आपको सीधे आसमान के रास्ते मंजिल तक पहुंचा देता है। फिलहाल यह भविष्य की तस्वीर जैसी लगती है, लेकिन दुनिया के कई देशों में इस तकनीक पर तेजी से काम चल रहा है और भारत भी इस दौड़ में शामिल हो चुका है।
भारत में खासतौर पर दिल्ली-NCR, मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगरों के लिए eVTOL को तेज और वैकल्पिक शहरी परिवहन के तौर पर देखा जा रहा है।
2028 तक उड़ान का लक्ष्य, अगले साल से टेस्टिंग

हाल ही में बेंगलुरु में सरला एविएशन के नए मुख्यालय के उद्घाटन के दौरान केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने भारत में इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी को लेकर सरकार की योजना बताई।
मंत्री के अनुसार, भारत का लक्ष्य 2028 तक इन मशीनों को देश में उड़ते हुए देखना है। उन्होंने यह भी कहा कि सरला एविएशन के एयरक्राफ्ट की टेस्टिंग अगले साल यानी 2027 में पूरी तरह शुरू होने की उम्मीद है।
सरकार और एविएशन रेगुलेटर डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन यानी DGCA इस क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों के साथ सुरक्षा, टेस्टिंग और रेगुलेटरी नियमों पर काम कर रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, DGCA ने सरला एविएशन को डिजाइन ऑर्गनाइजेशन अप्रूवल भी दिया है। यह कंपनी के eVTOL एयरक्राफ्ट के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण रेगुलेटरी कदम माना जा रहा है।
मंत्री ने उम्मीद जताई कि अगले साल कंपनी पूरी तरह टेस्टिंग के चरण में पहुंच जाएगी और 2028 तक इस तकनीक को वास्तविक उड़ान के करीब लाया जा सकता है।
क्या है Electric Air Taxi यानी eVTOL?

Electric Air Taxi को तकनीकी भाषा में eVTOL यानी Electric Vertical Take-Off and Landing Aircraft कहा जाता है।
नाम से ही इसकी सबसे बड़ी खासियत समझी जा सकती है। ये एयरक्राफ्ट इलेक्ट्रिक पावर से चलते हैं और हेलीकॉप्टर की तरह जमीन से सीधे ऊपर उड़ान भरने तथा उसी तरह नीचे उतरने में सक्षम बनाए जा रहे हैं।
पारंपरिक हवाई जहाजों को उड़ान भरने और उतरने के लिए रनवे की जरूरत होती है। इसके मुकाबले eVTOL को छोटे वर्टिपैड से संचालित करने की योजना है। यानी भविष्य में शहरों के भीतर या प्रमुख इमारतों के पास ऐसे विशेष स्थान बनाए जा सकते हैं, जहां एयर टैक्सी उतर और उड़ सके।
इन एयरक्राफ्ट में कई इलेक्ट्रिक मोटर, रोटर या प्रोपेलर लगाए जाते हैं। इनका डिजाइन कंपनी और मॉडल के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। कुछ मॉडल हेलीकॉप्टर और छोटे विमान का मिश्रण नजर आते हैं, जबकि कुछ का डिजाइन ड्रोन जैसा दिखाई देता है।
नोएडा से गुरुग्राम सिर्फ 10-15 मिनट में?
इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी के संभावित इस्तेमाल को समझने के लिए दिल्ली-NCR इसका सबसे बड़ा उदाहरण हो सकता है।
नोएडा और गुरुग्राम के बीच सड़क मार्ग से यात्रा करने में ट्रैफिक के हिसाब से काफी समय लग सकता है। पीक ऑवर में यह सफर और भी लंबा हो सकता है। ऐसे में एयर टैक्सी का इस्तेमाल होने पर सड़क के बजाय हवाई मार्ग से सीधे एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचना संभव हो सकता है।
भविष्य में अगर इस तरह की सेवा व्यावसायिक रूप से शुरू होती है, तो नोएडा से गुरुग्राम जैसी दूरी को करीब 10 से 15 मिनट में तय करने की संभावना पर चर्चा की जा रही है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि 10-15 मिनट का समय अभी संभावित भविष्य की सेवा से जुड़ा अनुमान है, कोई शुरू हो चुकी नियमित एयर टैक्सी सेवा का आधिकारिक टाइमटेबल नहीं। वास्तविक यात्रा समय एयरक्राफ्ट की क्षमता, वर्टिपैड की लोकेशन, एयर ट्रैफिक, मौसम और नियामकीय व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
सड़क का ट्रैफिक आसमान में शिफ्ट करने की कोशिश
भारत के बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम लगातार बढ़ती शहरी समस्या है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में रोजाना लाखों लोग सड़क मार्ग से लंबी दूरी तय करते हैं।
Electric Air Taxi का सबसे बड़ा आकर्षण यही है कि यह मौजूदा सड़क नेटवर्क के ऊपर एक नया ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर तैयार कर सकती है।
अगर बड़ी संख्या में लोग छोटी और मध्यम दूरी के लिए eVTOL का इस्तेमाल करने लगते हैं, तो कुछ यात्रियों को सड़क से हटाकर हवाई मार्ग पर ले जाया जा सकता है। इससे एयरपोर्ट कनेक्टिविटी और शहर के प्रमुख बिजनेस हब के बीच यात्रा का समय कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि एयर टैक्सी शुरू होते ही शहरों का ट्रैफिक जाम पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इसकी क्षमता, किराया, वर्टिपैड की संख्या और एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट जैसी कई चीजें इसकी उपयोगिता तय करेंगी।
बैटरी और इलेक्ट्रिक मोटर से बदल रही एविएशन इंडस्ट्री
eVTOL तकनीक का विचार नया नहीं है। लंबे समय से इंजीनियर और एविएशन कंपनियां ऐसे एयरक्राफ्ट पर काम कर रही हैं जो कम जगह में उड़ान भर सकें।
लेकिन बैटरी टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक मोटर और सॉफ्टवेयर में हुई प्रगति ने इस क्षेत्र को नई गति दी है।
इलेक्ट्रिक मोटर के जरिए कई छोटे रोटर या प्रोपेलर को नियंत्रित किया जा सकता है। इससे एयरक्राफ्ट को लंबवत उड़ान भरने और लैंड करने की क्षमता देने में मदद मिलती है।
भविष्य में बैटरी की ऊर्जा क्षमता बढ़ने और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर होने पर इन एयरक्राफ्ट की रेंज और उपयोगिता भी बढ़ सकती है।
फिर भी बैटरी का वजन, चार्जिंग समय, रेंज और सुरक्षा आज भी इस सेक्टर की बड़ी तकनीकी चुनौतियों में शामिल हैं।
किन कामों में इस्तेमाल हो सकती है Electric Air Taxi?
शुरुआती दौर में eVTOL का सबसे ज्यादा इस्तेमाल यात्री परिवहन और एयरपोर्ट कनेक्टिविटी में होने की उम्मीद है। लेकिन इसका उपयोग केवल यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने तक सीमित नहीं रह सकता।
भविष्य में इसके कई दूसरे इस्तेमाल भी हो सकते हैं।
मेडिकल इमरजेंसी: गंभीर मरीजों को तेजी से अस्पताल पहुंचाने या मेडिकल टीम और जरूरी सामान की आवाजाही में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।
फायरफाइटिंग: कुछ विशेष डिजाइन वाले eVTOL आग लगने जैसी आपात स्थिति में निगरानी या राहत कार्यों में मदद कर सकते हैं।
डिफेंस: सैन्य और सुरक्षा अभियानों के लिए इलेक्ट्रिक वर्टिकल-टेकऑफ एयरक्राफ्ट की अलग उपयोगिता विकसित हो सकती है।
कृषि: निगरानी, सर्वे और कुछ कृषि संबंधी कार्यों के लिए भविष्य में इलेक्ट्रिक एयर मोबिलिटी का इस्तेमाल किया जा सकता है।
टूरिज्म: शहरों और पर्यटन स्थलों पर छोटी हवाई यात्राओं के लिए भी इनका उपयोग संभव है।
इंटर-सिटी कनेक्टिविटी: भविष्य में कुछ शहरों के बीच कम दूरी की तेज हवाई सेवा विकसित की जा सकती है।
भारत में कौन सी कंपनी कर रही है काम?
भारत में सरला एविएशन eVTOL और एयर टैक्सी के क्षेत्र में काम करने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल है। कंपनी भारत में इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी विकसित करने की दिशा में काम कर रही है।
इसके अलावा दुनिया के कई बड़े स्टार्टअप और एविएशन टेक्नोलॉजी समूह इस क्षेत्र में अरबों डॉलर का निवेश कर रहे हैं।
अमेरिका में Archer Aviation, Joby Aviation और BETA Technologies जैसी कंपनियां eVTOL एयरक्राफ्ट विकसित कर रही हैं। इन कंपनियों का लक्ष्य भविष्य में शहरों के भीतर और आसपास इलेक्ट्रिक एयर मोबिलिटी सेवाएं शुरू करना है।
हालांकि, किसी भी कंपनी के लिए आम यात्रियों के लिए नियमित कमर्शियल सेवा शुरू करने से पहले कई चरणों की टेस्टिंग और सुरक्षा मंजूरी जरूरी होगी।
DGCA की मंजूरी क्यों होगी सबसे अहम?
आसमान में उड़ने वाली किसी भी नई तकनीक के लिए सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। Electric Air Taxi के मामले में भी यही स्थिति है।
भारत में DGCA को यह देखना होगा कि एयरक्राफ्ट डिजाइन, निर्माण, उड़ान परीक्षण, पायलट ट्रेनिंग, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और यात्री सुरक्षा से जुड़े सभी मानक पूरे किए जाएं।
इसके अलावा शहरों में वर्टिपैड कहां बनाए जाएंगे, एयर टैक्सी के लिए हवाई मार्ग कैसे तय होंगे, आपात स्थिति में क्या व्यवस्था होगी और एयर ट्रैफिक में इनका संचालन कैसे किया जाएगा—इन सभी सवालों का जवाब तैयार करना होगा।
इसलिए 2028 का लक्ष्य महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन वास्तविक कमर्शियल सेवा शुरू होने की तारीख कई तकनीकी और रेगुलेटरी मंजूरियों पर निर्भर करेगी।
क्या Electric Air Taxi आम लोगों के लिए सस्ती होगी?
यह भी बड़ा सवाल है। शुरुआत में किसी नई एविएशन टेक्नोलॉजी की लागत आम टैक्सी की तुलना में ज्यादा हो सकती है।
एयरक्राफ्ट की कीमत, बैटरी, रखरखाव, पायलट, वर्टिपैड इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा व्यवस्था का खर्च किराए पर असर डाल सकता है।
लेकिन अगर भविष्य में बड़े पैमाने पर eVTOL बनाए जाते हैं और ऑपरेशन कॉस्ट कम होती है, तो एयर टैक्सी का किराया भी धीरे-धीरे कम हो सकता है।
संभव है कि शुरुआत में यह सेवा मुख्य रूप से बिजनेस ट्रैवलर्स, एयरपोर्ट ट्रांसफर और प्रीमियम यात्रियों के लिए उपलब्ध हो और बाद में इसका इस्तेमाल व्यापक हो।
2028 तक क्या बदल सकता है?
अगर टेस्टिंग, सुरक्षा मंजूरी और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े काम तय समय पर आगे बढ़ते हैं, तो 2028 के आसपास भारत में इलेक्ट्रिक एयर मोबिलिटी का नया दौर शुरू हो सकता है।
शुरुआत में कुछ चुनिंदा रूट और शहरों पर एयर टैक्सी सेवा शुरू होने की संभावना ज्यादा होगी। दिल्ली-NCR, मुंबई और बेंगलुरु जैसे भारी ट्रैफिक वाले शहर इसके लिए महत्वपूर्ण बाजार बन सकते हैं।
भविष्य में मोबाइल ऐप से एयर टैक्सी बुक करना उतना ही सामान्य हो सकता है, जितना आज कैब बुक करना है। फर्क सिर्फ इतना होगा कि कैब सड़क पर आएगी, जबकि एयर टैक्सी आपको वर्टिपैड से आसमान के रास्ते मंजिल तक ले जाएगी।
निष्कर्ष
भारत में Electric Air Taxi को लेकर 2028 का लक्ष्य शहरी परिवहन के भविष्य के लिए काफी महत्वपूर्ण है। eVTOL तकनीक सड़क के ट्रैफिक का विकल्प उपलब्ध करा सकती है और खासकर एयरपोर्ट तथा शहर के प्रमुख हिस्सों के बीच यात्रा का समय कम करने में मदद कर सकती है।
हालांकि, अभी इसे ट्रैफिक जाम खत्म करने का पक्का समाधान मानना जल्दबाजी होगी। तकनीक की सुरक्षा, बैटरी रेंज, लागत, वर्टिपैड नेटवर्क, एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट और DGCA की मंजूरियां इसके सफल होने में निर्णायक भूमिका निभाएंगी।
अगर ये चुनौतियां समय पर दूर होती हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत के बड़े शहरों में सड़क पर चलने वाली कैब के साथ-साथ आसमान में उड़ने वाली इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी भी शहरी परिवहन का हिस्सा बन सकती है।


