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डिजिटल गोल्ड के नाम पर अब नहीं होगी ठगी! सरकार ला रही नए नियम, सेबी की चिंता के बाद तेज हुई तैयारी

Namam Sharma
Last updated: 2026/08/08 at 10:15 पूर्वाह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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12 Min Read
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Digital Gold Rules: भारत में डिजिटल गोल्ड में निवेश करने वाले लोगों के लिए बड़ी खबर है। डिजिटल गोल्ड को लेकर जल्द ही एक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार किया जा सकता है। फिलहाल डिजिटल गोल्ड किसी सरकारी वित्तीय नियामक के सीधे दायरे में नहीं आता, जिसके चलते निवेशकों की सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। अब सरकार और इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों के बीच इसे लेकर बातचीत तेज हो गई है।

Contents
डिजिटल गोल्ड को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?सरकार और संस्थाओं के बीच चल रही बातचीतFY26 में 10 टन सोना खरीदा गयाक्या है डिजिटल गोल्ड?नए नियमों में कंपनियों के लिए क्या जरूरी हो सकता है?वॉल्ट में रखा सोना भी होगा सुरक्षितकंपनी डूब गई तो ग्राहक के सोने का क्या होगा?शिकायतों के लिए लोकपाल सिस्टमसेबी ने भी जताई थी चिंताDPMACI में कौन-कौन शामिल हैं?निवेशकों के लिए क्या बदलेगा?क्या डिजिटल गोल्ड में निवेश पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा?निष्कर्ष

माना जा रहा है कि डिजिटल गोल्ड से जुड़े नए नियम 2027 की शुरुआत तक लागू हो सकते हैं। प्रस्तावित व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य ग्राहकों के पैसे और उनके डिजिटल गोल्ड को धोखाधड़ी करने वाली कंपनियों से सुरक्षित रखना होगा।

डिजिटल गोल्ड को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?

भारत में पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल गोल्ड खरीदने का चलन तेजी से बढ़ा है। मोबाइल ऐप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए लोग सिर्फ 10 या 100 रुपये से भी सोने में निवेश शुरू कर सकते हैं। यही आसान तरीका इसे छोटे निवेशकों के बीच लोकप्रिय बना रहा है।

हालांकि, डिजिटल गोल्ड और शेयर, म्यूचुअल फंड या बैंकिंग उत्पादों में एक बड़ा अंतर है। शेयर बाजार में निवेश से जुड़ी गतिविधियों पर सेबी, बैंकिंग सिस्टम पर RBI और कई अन्य वित्तीय उत्पादों पर संबंधित नियामकों की निगरानी रहती है। दूसरी ओर, डिजिटल गोल्ड के लिए अभी तक ऐसा कोई स्पष्ट सरकारी वित्तीय रेगुलेटरी फ्रेमवर्क मौजूद नहीं है।

यही वजह है कि निवेशकों की सुरक्षा, कंपनियों के पास मौजूद वास्तविक सोने के भंडार और ग्राहकों के डिजिटल बैलेंस के बीच तालमेल को लेकर चिंता जताई जाती रही है।

सरकार और संस्थाओं के बीच चल रही बातचीत

डिजिटल प्रेशियस मेटल्स एश्योरेंस काउंसिल ऑफ इंडिया (DPMACI) के मुताबिक, पिछले एक महीने के दौरान डिजिटल गोल्ड को रेगुलेट करने के लिए वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के साथ कई दौर की बातचीत हुई है।

DPMACI की चेयरपर्सन निरुपमा सुंदरराजन के मुताबिक, डिजिटल गोल्ड कंपनियों के लिए एक ऐसा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करने पर चर्चा हो रही है, जिससे ग्राहकों के हितों की रक्षा की जा सके और धोखाधड़ी करने वाली कंपनियों पर रोक लगाई जा सके।

इंडस्ट्री की तरफ से उम्मीद जताई जा रही है कि यह व्यवस्था अगले साल की शुरुआत तक लागू हो सकती है। हालांकि, अंतिम नियम सरकार और संबंधित नियामक संस्थाओं की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।

FY26 में 10 टन सोना खरीदा गया

डिजिटल गोल्ड की बढ़ती लोकप्रियता का अंदाजा इसके कारोबार से लगाया जा सकता है। DPMACI के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में निवेशकों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए करीब 10 टन सोना खरीदा।

छोटे निवेश की सुविधा, ऑनलाइन खरीदारी और जरूरत पड़ने पर डिजिटल तरीके से बिक्री की सुविधा ने इस बाजार को तेजी से बढ़ाया है। हालांकि, बाजार के विस्तार के साथ निवेशकों की सुरक्षा और पारदर्शिता से जुड़े सवाल भी महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।

क्या है डिजिटल गोल्ड?

डिजिटल गोल्ड एक ऐसा विकल्प है, जिसमें ग्राहक मोबाइल ऐप या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सोना खरीदता है। निवेशक को फिजिकल गोल्ड अपने पास रखने की जरूरत नहीं होती।

आमतौर पर प्लेटफॉर्म यह दावा करते हैं कि ग्राहक द्वारा खरीदे गए डिजिटल गोल्ड के बराबर वास्तविक सोना सुरक्षित वॉल्ट में रखा जाता है। ग्राहक बाद में अपने डिजिटल गोल्ड को ऑनलाइन बेच सकता है या उपलब्ध विकल्पों के अनुसार फिजिकल गोल्ड की डिलीवरी भी ले सकता है।

इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेश के लिए बड़ी रकम की जरूरत नहीं होती। कई प्लेटफॉर्म पर 10 रुपये या 100 रुपये जैसी छोटी रकम से भी शुरुआत की जा सकती है।

नए नियमों में कंपनियों के लिए क्या जरूरी हो सकता है?

प्रस्तावित रेगुलेटरी फ्रेमवर्क में सबसे अहम शर्त वास्तविक सोने के भंडार से जुड़ी हो सकती है।

इसके तहत कंपनियों के पास ग्राहकों के डिजिटल गोल्ड और सिल्वर बैलेंस के बराबर वास्तविक कीमती धातु मौजूद होना जरूरी किया जा सकता है। यानी अगर किसी प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों के नाम बड़ी मात्रा में डिजिटल गोल्ड दर्ज है, तो उसके पीछे उतना ही वास्तविक सोना रिजर्व में मौजूद होना चाहिए।

इसके अलावा समय-समय पर स्वतंत्र बाहरी ऑडिट की व्यवस्था भी की जा सकती है। इसका उद्देश्य यह जांचना होगा कि कंपनी के रिकॉर्ड में दर्ज ग्राहकों के गोल्ड बैलेंस और उसके वास्तविक वॉल्ट रिजर्व में कोई अंतर तो नहीं है।

वॉल्ट में रखा सोना भी होगा सुरक्षित

नए प्रस्तावित सिस्टम में केवल सोने की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि उसके सुरक्षित रखे जाने पर भी जोर दिया जा सकता है।

वास्तविक सोने को सुरक्षित वॉल्ट में रखने, उसका बीमा कराने और ग्राहकों को जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने जैसी शर्तें लागू किए जाने की संभावना है। सोने की गुणवत्ता को लेकर भी निर्धारित मानकों का पालन जरूरी हो सकता है।

DPMACI के मुताबिक, रिजर्व में रखा मेटल भारतीय मानकों के साथ-साथ स्वीकार किए गए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होना चाहिए। इसमें लंदन और यूएई जैसे बाजारों से जुड़े मानकों का भी अध्ययन किया जा सकता है।

कंपनी डूब गई तो ग्राहक के सोने का क्या होगा?

डिजिटल गोल्ड निवेशकों के लिए सबसे अहम सवाल यही है कि अगर जिस कंपनी के जरिए उन्होंने सोना खरीदा है, वह भविष्य में आर्थिक संकट में फंस जाए या दिवालिया हो जाए तो उनके निवेश का क्या होगा?

प्रस्तावित व्यवस्था में इस जोखिम को कम करने के लिए स्वतंत्र ट्रस्टी सिस्टम की बात सामने आई है।

इसके तहत ग्राहकों की संपत्ति को कंपनी की अपनी संपत्ति से अलग रखने की व्यवस्था की जा सकती है। वास्तविक सोने को अलग सुरक्षित वॉल्ट में रखा जाएगा और स्वतंत्र ट्रस्टी उसकी निगरानी करेगा।

इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कंपनी के कारोबार में समस्या आने पर भी ग्राहकों के सोने को कंपनी की अन्य देनदारियों में शामिल न किया जाए।

शिकायतों के लिए लोकपाल सिस्टम

निवेशकों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए शिकायत निपटान की व्यवस्था भी प्रस्तावित फ्रेमवर्क का हिस्सा हो सकती है।

DPMACI ग्राहकों की शिकायतों के समाधान के लिए एक लोकपाल (Ombudsman) सिस्टम तैयार करने पर भी काम कर रहा है। इससे ग्राहकों को किसी विवाद की स्थिति में शिकायत दर्ज कराने और उसका समाधान पाने के लिए एक औपचारिक व्यवस्था मिल सकती है।

सेबी ने भी जताई थी चिंता

डिजिटल गोल्ड को लेकर सेबी पहले ही चिंता जता चुका है। मुख्य मुद्दा यह रहा है कि डिजिटल गोल्ड फिलहाल किसी सरकारी वित्तीय नियामक के सीधे रेगुलेटरी दायरे में नहीं आता।

यही वजह है कि डिजिटल गोल्ड में निवेश करने वाले ग्राहकों के लिए जोखिम और सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं। प्रस्तावित फ्रेमवर्क का उद्देश्य इसी खाली जगह को भरना और डिजिटल गोल्ड कारोबार में पारदर्शिता बढ़ाना है।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि DPMACI खुद एक इंडस्ट्री बॉडी है। इसलिए उसके द्वारा प्रस्तावित नियमों और सरकार की ओर से लागू किए जाने वाले अंतिम रेगुलेटरी नियमों में अंतर हो सकता है।

DPMACI में कौन-कौन शामिल हैं?

DPMACI का गठन डिजिटल गोल्ड इंडस्ट्री से जुड़ी प्रमुख कंपनियों और फिनटेक प्लेटफॉर्म्स की भागीदारी से हुआ है। इसमें सेफगोल्ड, MMTC-PAMP और Augmont जैसी डिजिटल गोल्ड कंपनियों के साथ PhonePe और Gullak जैसे फिनटेक प्लेटफॉर्म्स के शामिल होने की जानकारी सामने आई है।

इंडस्ट्री का तर्क है कि डिजिटल गोल्ड को लेकर दुनिया के कई देशों में अलग-अलग तरह के रेगुलेटरी मॉडल मौजूद हैं। भारत भी नियम तैयार करते समय तुर्की, इंडोनेशिया, मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और चीन जैसे देशों के मॉडल का अध्ययन कर सकता है।

निवेशकों के लिए क्या बदलेगा?

अगर सरकार डिजिटल गोल्ड के लिए स्पष्ट रेगुलेटरी फ्रेमवर्क लागू करती है, तो निवेशकों के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

सबसे पहले कंपनियों के पास ग्राहकों के डिजिटल गोल्ड के बराबर वास्तविक सोना रखने की बाध्यता मजबूत हो सकती है। इसके साथ ऑडिट, वॉल्ट सिक्योरिटी, इंश्योरेंस और ग्राहक संपत्ति को अलग रखने जैसी व्यवस्थाएं निवेशकों का भरोसा बढ़ा सकती हैं।

इसके अलावा शिकायतों के लिए औपचारिक व्यवस्था बनने से ग्राहकों के लिए विवाद की स्थिति में समाधान हासिल करना आसान हो सकता है।

क्या डिजिटल गोल्ड में निवेश पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा?

नए नियम लागू होने के बाद भी किसी निवेश को 100 फीसदी जोखिम-मुक्त मानना सही नहीं होगा। रेगुलेशन का उद्देश्य मुख्य रूप से कंपनियों के कामकाज में पारदर्शिता और ग्राहक सुरक्षा बढ़ाना होगा।

निवेशकों को किसी भी डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने से पहले कंपनी की शर्तों, खरीद-बिक्री शुल्क, फिजिकल डिलीवरी से जुड़े चार्ज, स्टोरेज व्यवस्था और संबंधित जोखिमों को समझना चाहिए।

खास तौर पर यह देखना जरूरी है कि प्लेटफॉर्म ग्राहक के डिजिटल गोल्ड के बदले वास्तविक सोने की कस्टडी और सुरक्षा को किस तरह सुनिश्चित करता है।

निष्कर्ष

भारत में डिजिटल गोल्ड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, लेकिन इसके साथ रेगुलेशन की जरूरत भी बढ़ती गई है। सरकार, वित्त मंत्रालय, RBI, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय और इंडस्ट्री बॉडी के बीच चल रही बातचीत इसी दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

अगर प्रस्तावित नियम 2027 की शुरुआत में लागू होते हैं, तो डिजिटल गोल्ड कंपनियों के लिए वास्तविक गोल्ड रिजर्व, ऑडिट, सुरक्षित वॉल्ट, इंश्योरेंस, ट्रस्टी और शिकायत निवारण जैसी व्यवस्थाएं ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती हैं। इससे निवेशकों को डिजिटल गोल्ड खरीदते समय पहले की तुलना में ज्यादा पारदर्शिता और सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।

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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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