Sugar Price: फेस्टिवल सीजन में मिठाइयों और दूसरे खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग के बीच चीनी की कीमतें लोगों का बजट बिगाड़ सकती हैं। पिछले एक महीने में देश के कई हिस्सों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। कुछ राज्यों में कीमतों में 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि औसतन चीनी करीब 8 फीसदी महंगी हुई है। बढ़ती कीमतों को देखते हुए चीनी मिलों ने इस साल क्रशिंग सीजन को 10-15 दिन पहले शुरू करने का फैसला किया है।
अनुमान से कम हुआ चीनी का उत्पादन
इस साल देश में चीनी का उत्पादन अनुमान के मुताबिक नहीं रहा। उत्पादन करीब 280 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि पहले इसके 293 लाख टन रहने की उम्मीद थी। यानी अनुमान की तुलना में उत्पादन करीब 5 फीसदी कम रहा है।
हालांकि, पिछले साल का करीब 50 लाख टन चीनी का स्टॉक उपलब्ध है। इसके बावजूद घरेलू खपत करीब 280 लाख टन रहने और इस साल करीब 8 लाख टन चीनी के निर्यात के कारण सप्लाई पर दबाव बढ़ा है। पिछले महीने चीनी के थोक दाम में करीब 400 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है।
कीमतों में लगातार तेजी को देखते हुए चीनी मिलों ने इस साल शुगर क्रशिंग प्रक्रिया सामान्य समय से करीब 10-15 दिन पहले शुरू करने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों को नियंत्रित करने में मदद करना है।
दिल्ली से मुंबई तक बढ़े चीनी के दाम
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक महीने में देश के प्रमुख शहरों में चीनी की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
- दिल्ली: 45 रुपये से बढ़कर 49 रुपये प्रति किलो
- पश्चिम बंगाल: 49 रुपये से बढ़कर 55 रुपये प्रति किलो
- चेन्नई: 46 रुपये से बढ़कर 53 रुपये प्रति किलो
- मुंबई: 46 रुपये से बढ़कर 52 रुपये प्रति किलो
- रांची: 47 रुपये से बढ़कर 51 रुपये प्रति किलो
इन आंकड़ों से पता चलता है कि कई प्रमुख बाजारों में चीनी की कीमत तेजी से बढ़ी है। कुछ राज्यों में पिछले एक महीने के दौरान दाम में 15 फीसदी तक का उछाल आया है।
सरकार के कदमों के बावजूद कीमतों पर दबाव
चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने स्टॉक लिमिट जैसे कदम उठाए हैं। इसके अलावा चीनी मिलों के पास मौजूद स्टॉक की निगरानी भी की जा रही है। इसके बावजूद बाजार में कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
मौसम से जुड़ी अनिश्चितताओं और अगले सीजन में चीनी उत्पादन कम रहने की आशंका को भी कीमतों में तेजी की एक वजह माना जा रहा है। अगर उत्पादन और सप्लाई पर दबाव आगे भी बना रहता है, तो फेस्टिवल सीजन में मांग बढ़ने के साथ चीनी की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।
चीनी कंपनियों के मार्जिन में हो सकता है सुधार
चीनी की बढ़ती कीमतों का असर जहां आम उपभोक्ताओं के बजट पर पड़ सकता है, वहीं चीनी मिल कंपनियों के लिए यह स्थिति सकारात्मक साबित हो सकती है। ऊंची कीमतों से चीनी उत्पादक कंपनियों के मार्जिन और मुनाफे में सुधार की उम्मीद बढ़ती है।
बलरामपुर चीनी, द्वारिकेश शुगर, श्री रेणुका शुगर और डालमिया भारत शुगर जैसी कंपनियों को चीनी की ऊंची कीमतों से फायदा मिल सकता है। हालांकि, इन कंपनियों के प्रदर्शन पर उत्पादन, गन्ने की लागत, एथेनॉल की कीमत और सरकार की नीतियों जैसे अन्य कारकों का भी असर पड़ेगा।
एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम पर भी पड़ सकता है असर
चीनी की कीमतों में तेजी का एक दूसरा असर एथेनॉल उत्पादन पर पड़ सकता है। ऊंचे बाजार भाव के कारण चीनी मिलों के लिए एथेनॉल बनाने की तुलना में चीनी बेचना ज्यादा आकर्षक हो सकता है।
अगर मिलें अधिक मात्रा में गन्ने का इस्तेमाल चीनी उत्पादन के लिए करती हैं, तो इससे एथेनॉल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में चीनी की बढ़ती कीमतें न सिर्फ घरेलू उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय हैं, बल्कि सरकार के एथेनॉल ब्लेंडिंग लक्ष्य के लिए भी चुनौती पैदा कर सकती हैं।
कुल मिलाकर, उत्पादन में कमी, उपलब्ध स्टॉक पर दबाव और फेस्टिवल सीजन में बढ़ने वाली मांग के कारण आने वाले दिनों में चीनी की कीमतों पर नजर बनी रहेगी। अगर नई फसल की सप्लाई समय पर बाजार में नहीं आती है, तो त्योहारों के दौरान महंगी चीनी का असर मिठाइयों और अन्य खाद्य उत्पादों की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।


