Highlights
- 50 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों में क्रेच सुविधा अनिवार्य होगी।
- अब यह सुविधा सिर्फ महिला कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगी, सभी कर्मचारियों को मिलेगी।
- क्रेच सुविधा नहीं देने पर कंपनी कर्मचारी की सहमति से न्यूनतम ₹500 प्रति बच्चा मासिक भत्ता दे सकती है।
नई दिल्ली। प्राइवेट नौकरी करने वाले कर्मचारियों के लिए नए लेबर कोड में बच्चों की देखभाल से जुड़ा बड़ा बदलाव किया गया है। नए नियमों के तहत अब बड़ी कंपनियों को कर्मचारियों के छोटे बच्चों की देखभाल के लिए क्रेच (Child Care Facility) की व्यवस्था करनी होगी। इसका उद्देश्य कामकाजी माता-पिता को करियर और परिवार के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद करना है।
नए नियमों के अनुसार, जिन कंपनियों में 50 या उससे ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं, उन्हें छह साल से कम उम्र के बच्चों के लिए क्रेच सुविधा उपलब्ध करानी होगी। यह सुविधा कंपनी परिसर में या फिर ऑफिस से एक किलोमीटर के दायरे में उपलब्ध कराई जा सकती है।
नए लेबर कोड में क्रेच सुविधा का नियम क्या है?

नए श्रम कानूनों के तहत क्रेच सुविधा को कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा प्रावधान के रूप में शामिल किया गया है। Ministry of Labour and Employment द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, कंपनियां क्रेच सुविधा को खुद संचालित कर सकती हैं या कई कंपनियां मिलकर साझा क्रेच सेंटर भी चला सकती हैं।
इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारियों को अपने छोटे बच्चों की देखभाल के लिए नौकरी छोड़ने या काम के घंटों में परेशानी का सामना न करना पड़े।
क्या क्रेच सुविधा सिर्फ महिलाओं को मिलेगी?
पहले कई जगहों पर क्रेच सुविधा को मुख्य रूप से महिला कर्मचारियों से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन नए नियमों में इसे ज्यादा व्यापक बनाया गया है।
अब यह सुविधा सभी कर्मचारियों के लिए उपलब्ध होगी, चाहे कर्मचारी पुरुष हो या महिला। यानी अगर कोई पुरुष कर्मचारी अपने छोटे बच्चे की देखभाल के लिए क्रेच सुविधा का इस्तेमाल करना चाहता है, तो वह भी इसका लाभ ले सकता है।
यह बदलाव जेंडर-न्यूट्रल वर्कप्लेस की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
क्रेच सुविधा नहीं देने पर मिलेगा भत्ता?
अगर कोई कंपनी किसी कारण से क्रेच सुविधा उपलब्ध नहीं करा पाती है, तो कर्मचारी की सहमति से कंपनी क्रेच भत्ता दे सकती है।
- न्यूनतम ₹500 प्रति बच्चा प्रति माह भत्ता दिया जा सकता है।
- यह सुविधा अधिकतम दो बच्चों तक लागू होगी।
- जुड़वां बच्चों की स्थिति में अलग प्रावधान लागू हो सकते हैं।
हालांकि, भत्ता देने का विकल्प कंपनी और कर्मचारी की सहमति पर निर्भर करेगा।
कामकाजी माता-पिता को मिलेंगे ये अतिरिक्त फायदे
क्रेच सुविधा के अलावा कर्मचारियों को बच्चों की देखभाल के लिए कुछ अतिरिक्त राहत भी मिलेगी।
कर्मचारियों को मिल सकती हैं ये सुविधाएं:
- दिन में चार बार तक क्रेच जाने की अनुमति।
- छोटे बच्चों को दूध पिलाने के लिए नर्सिंग ब्रेक।
- बच्चे के 15 महीने की उम्र तक रोजाना दो नर्सिंग ब्रेक।
- हर नर्सिंग ब्रेक की अवधि लगभग 15 मिनट तक हो सकती है।
- क्रेच तक आने-जाने के लिए अतिरिक्त समय की सुविधा।
क्रेच सेंटर के लिए सुरक्षा नियम भी जरूरी
कंपनियों को केवल क्रेच के लिए जगह उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना होगा।
क्रेच सेंटर में जरूरी सुविधाओं में शामिल हैं:
- CCTV कैमरों की व्यवस्था।
- क्रेच कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन।
- साफ-सफाई और स्वच्छ वातावरण।
- पर्याप्त हवा और रोशनी की व्यवस्था।
- पीने के पानी की सुविधा।
- फर्स्ट-एड की व्यवस्था।
- बच्चों के खेलने के लिए सुरक्षित स्थान।
कर्मचारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
भारत में बड़ी संख्या में लोग नौकरी और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने में संघर्ष करते हैं। खासकर छोटे बच्चों वाले माता-पिता के लिए ऑफिस के दौरान बच्चों की देखभाल एक बड़ी समस्या रहती है।
नए लेबर कोड के तहत क्रेच सुविधा अनिवार्य होने से कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। इससे कंपनियों में बेहतर वर्क कल्चर विकसित होगा और अधिक लोग बिना करियर प्रभावित हुए नौकरी जारी रख सकेंगे।
निष्कर्ष
नए लेबर कोड में क्रेच सुविधा से जुड़े बदलाव कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम हैं। अब 50 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों को छोटे बच्चों की देखभाल के लिए व्यवस्था करनी होगी। खास बात यह है कि यह सुविधा अब सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सभी कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा।
यह नियम कामकाजी माता-पिता को बेहतर सुविधा देने के साथ-साथ भारत में अधिक समावेशी और कर्मचारी-अनुकूल कार्यस्थल बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है।


