RBI ने ग्रामीण सहकारी बैंकों (RCBs) के लिए लोन नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। नए ड्राफ्ट फ्रेमवर्क में हाउसिंग लोन की सीमा बढ़ाने, जोखिम प्रबंधन मजबूत करने और बैंकों को ज्यादा ऑपरेशनल छूट देने की बात कही गई है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने ग्रामीण सहकारी बैंकों (Rural Cooperative Banks – RCBs) के लिए कर्ज देने के नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। नए प्रस्ताव के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले सहकारी बैंकों से ग्राहकों को पहले की तुलना में ज्यादा होम लोन मिल सकता है। खासतौर पर बड़े RCBs को अधिक राशि के आवास ऋण मंजूर करने की अनुमति दी जा सकती है।
केंद्रीय बैंक ने गुरुवार 6 अगस्त को जनता और संबंधित पक्षों की राय के लिए दो ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। इनमें ‘रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (ग्रामीण सहकारी बैंक – कंसंट्रेशन रिस्क मैनेजमेंट) निर्देश, 2026’ और ‘ग्रामीण सहकारी बैंक – क्रेडिट सुविधा निर्देश, 2025’ में संशोधन शामिल हैं।
ये प्रस्ताव RBI की ओर से 5 अगस्त को जारी ‘विकासात्मक और नियामक नीतियों पर बयान’ के बाद सामने आए हैं।
RCBs के लिए एक्सपोजर लिमिट का नया प्रस्ताव
RBI ने ग्रामीण सहकारी बैंकों में जोखिम को नियंत्रित करने के लिए कंसंट्रेशन रिस्क मैनेजमेंट फ्रेमवर्क का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत किसी एक उधारकर्ता या संस्था को दिए जाने वाले कर्ज की सीमा तय की जाएगी।
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार:
- एक सिंगल काउंटरपार्टी के लिए बैंक की टियर-1 कैपिटल का अधिकतम 20% तक एक्सपोजर रखा जा सकेगा।
- किसी जुड़े हुए ग्रुप ऑफ काउंटरपार्टियों के लिए यह सीमा 25% तक होगी।
- प्राइमरी एग्रीकल्चरल क्रेडिट सोसाइटी (PACS) के लिए कुछ परिस्थितियों में यह सीमा 30% तक हो सकती है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी एक बड़े ग्राहक या सेक्टर में ज्यादा कर्ज फंसने का जोखिम कम हो।
सेक्टर आधारित लोन लिमिट में बदलाव
RBI ने रियल एस्टेट सेक्टर को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में मौजूदा तय सेक्टर-वाइज एक्सपोजर लिमिट हटाने का प्रस्ताव दिया है।
इसके बजाय अब ग्रामीण सहकारी बैंकों को अपने बिजनेस मॉडल, जोखिम क्षमता और वित्तीय स्थिति के आधार पर खुद आंतरिक सीमाएं तय करनी होंगी। हालांकि, इन सीमाओं को बैंक के बोर्ड से मंजूरी लेना जरूरी होगा।
रियल एस्टेट लोन पर जारी रहेंगी सीमाएं
RBI ने रियल एस्टेट सेक्टर में जोखिम को देखते हुए कुछ सीमाएं बनाए रखने का प्रस्ताव रखा है।
प्रस्तावित नियमों के अनुसार:
- कुल रियल एस्टेट एक्सपोजर बैंक के कुल लोन और एडवांस का 15% तक हो सकता है।
- व्यक्तिगत हाउसिंग लोन को छोड़कर अन्य रियल एस्टेट लोन की सीमा 5% तक रहेगी।
इससे बैंकों को रियल एस्टेट सेक्टर में अत्यधिक कर्ज देने से नियंत्रित किया जा सकेगा।
बिना गारंटी वाले लोन पर RBI की सख्ती
RBI ने अनसिक्योर्ड लोन यानी बिना किसी गारंटी वाले कर्ज पर भी नई सीमा प्रस्तावित की है।
इसके तहत:
- कुल अनसिक्योर्ड एडवांस बैंक के कुल लोन और एडवांस का 15% से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
- व्यक्तिगत उधारकर्ताओं को दिए जाने वाले बिना गारंटी वाले लोन की सीमा बैंक के आकार और जोखिम क्षमता के आधार पर तय होगी।
इस कदम का उद्देश्य ग्राहकों और बैंकों दोनों को बढ़ते असुरक्षित कर्ज के जोखिम से बचाना है।
अब कितना मिल सकेगा होम लोन?
RBI के नए प्रस्ताव में सबसे बड़ा बदलाव हाउसिंग लोन की सीमा बढ़ाने से जुड़ा है। बैंक की जमा राशि के आधार पर होम लोन की अधिकतम सीमा तय की जाएगी।
| बैंक की जमा राशि | प्रति ग्राहक अधिकतम हाउसिंग लोन |
|---|---|
| ₹10,000 करोड़ से अधिक जमा वाले RCBs | ₹3 करोड़ तक |
| ₹1,000 करोड़ से ₹10,000 करोड़ तक जमा वाले बैंक | ₹2 करोड़ तक |
| ₹100 करोड़ से ₹1,000 करोड़ तक जमा वाले बैंक | ₹1.4 करोड़ तक |
| छोटे ग्रामीण सहकारी बैंक | ₹60 लाख तक |
इस बदलाव से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में घर खरीदने वाले ग्राहकों को बड़ी राहत मिल सकती है।
बड़े RCBs को मिलेगी ज्यादा छूट
RBI ने बड़े ग्रामीण सहकारी बैंकों को हाउसिंग लोन के मामले में ज्यादा स्वतंत्रता देने का प्रस्ताव रखा है।
₹1,000 करोड़ से ज्यादा जमा राशि वाले RCBs अपने बोर्ड द्वारा मंजूर नीति के अनुसार:
- हाउसिंग लोन की अवधि तय कर सकेंगे।
- मोरेटोरियम पीरियड निर्धारित कर सकेंगे।
वहीं छोटे RCBs के लिए:
- हाउसिंग लोन की अधिकतम अवधि 20 साल होगी।
- इसमें मोरेटोरियम अवधि भी शामिल होगी।
- निर्माणाधीन प्रॉपर्टी के लिए मोरेटोरियम अधिकतम 24 महीने तक हो सकता है।
नॉमिनल मेंबर्स को भी मिल सकता है लोन
RBI ने नॉमिनल मेंबर्स को भी लोन देने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि इसके लिए बैंक के बायलॉज और संबंधित सहकारी कानूनों में इसकी अनुमति होनी चाहिए।
ऐसे सदस्यों को लोन केवल कुछ सुरक्षित विकल्पों के बदले दिया जा सकेगा, जैसे:
- बैंक में जमा राशि
- सोना या चांदी के आभूषण
- जीवन बीमा पॉलिसी
- सरकारी सिक्योरिटीज
28 अगस्त तक मांगी गई राय
RBI ने इन ड्राफ्ट नियमों पर रेगुलेटेड संस्थाओं और अन्य हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। सुझाव देने की अंतिम तारीख 28 अगस्त 2026 तय की गई है।
अगर इन प्रस्तावों को अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो नए नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू किए जा सकते हैं।
ग्रामीण ग्राहकों को कैसे मिलेगा फायदा?
अगर RBI का यह प्रस्ताव लागू होता है तो ग्रामीण सहकारी बैंकों की लोन देने की क्षमता बढ़ सकती है। इससे खासतौर पर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में घर खरीदने वालों को ज्यादा रकम का होम लोन मिलने का रास्ता साफ हो सकता है।
हालांकि, RBI ने जोखिम नियंत्रण के लिए एक्सपोजर लिमिट और अनसिक्योर्ड लोन पर नियंत्रण जैसे कदम भी प्रस्तावित किए हैं, ताकि बैंकिंग सिस्टम मजबूत बना रहे।
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