नई दिल्ली: यूपीआई (UPI) पेमेंट पर शुल्क लगाए जाने की चर्चाओं के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा कि यूपीआई ट्रांजैक्शन पर आम उपभोक्ताओं से किसी तरह का शुल्क नहीं लिया जाएगा। वित्त मंत्री ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) केवल व्यापारियों (Merchants) पर लागू होता है, ग्राहकों पर नहीं।
उन्होंने कहा कि यूपीआई शुल्क को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों से बचना चाहिए और लोगों को सही जानकारी दी जानी चाहिए।
Highlights
- वित्त मंत्री ने UPI चार्ज लगने की अफवाहों को खारिज किया।
- MDR केवल व्यापारियों पर लागू होगा, ग्राहकों पर नहीं।
- बैंकों और फिनटेक कंपनियों को मिलेगा निवेश बढ़ाने का अवसर।
- कांग्रेस के आरोपों पर वित्त मंत्री ने संसद में चर्चा न होने का मुद्दा उठाया।
क्या UPI Payment पर ग्राहकों से चार्ज लिया जाएगा?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कहा कि यूपीआई का उपयोग करने वाले आम ग्राहकों पर कोई शुल्क नहीं लगाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित बदलावों का संबंध केवल मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से है, जो व्यापारियों द्वारा किए जाने वाले डिजिटल भुगतान से जुड़ा शुल्क होता है।
उनके अनुसार, ग्राहक पहले की तरह ही यूपीआई के जरिए मुफ्त डिजिटल भुगतान कर सकेंगे।
MDR क्या है?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क होता है जो किसी व्यापारी द्वारा डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर बैंक या पेमेंट सेवा प्रदाता को दिया जाता है। यह शुल्क ग्राहक से नहीं लिया जाता बल्कि व्यापारी के लेनदेन से संबंधित होता है।
वित्त मंत्री ने कहा कि MDR व्यवस्था से बैंकों और फिनटेक कंपनियों को बेहतर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा और नई तकनीकों में निवेश करने में मदद मिलेगी, जिसका फायदा अंततः सभी यूपीआई उपयोगकर्ताओं को मिलेगा।
जयराम रमेश ने क्या आरोप लगाया?
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने दावा किया कि कराधान एवं अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026 में ऐसा संशोधन किया गया है जिससे भविष्य में यूपीआई ट्रांजैक्शन पर MDR लगाने का रास्ता खुल सकता है। उनका कहना था कि इससे अब तक की शुल्क-मुक्त यूपीआई व्यवस्था की कानूनी गारंटी कमजोर हो जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल भुगतान प्रणाली को मजबूत करने के लिए व्यापारियों या ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ डालने की जरूरत नहीं है, क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक के पास पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। उन्होंने 2025-26 में केंद्र सरकार को RBI द्वारा दिए गए 2.86 लाख करोड़ रुपये के अधिशेष (Surplus) का भी उल्लेख किया।
संसद में भी उठा मुद्दा
वित्त मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि विपक्ष ने लोकसभा और राज्यसभा में विधेयक पर रचनात्मक चर्चा में हिस्सा लिया होता, तो इन सभी मुद्दों पर सदन के भीतर विस्तार से चर्चा की जा सकती थी। उन्होंने कहा कि संसद के बाहर भ्रम फैलाने के बजाय तथ्यात्मक बहस होनी चाहिए।
UPI यूजर्स के लिए क्या मतलब है?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार:
- आम उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई भुगतान मुफ्त ही रहेगा।
- ग्राहकों से किसी अतिरिक्त शुल्क की घोषणा नहीं की गई है।
- MDR का संबंध व्यापारियों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के बीच की व्यवस्था से है।
- सरकार का कहना है कि इससे डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
निष्कर्ष
यूपीआई पर शुल्क लगने की खबरों के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट कर दिया है कि आम उपभोक्ताओं से UPI Payment पर कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा। MDR केवल व्यापारियों से संबंधित व्यवस्था है और इसका उद्देश्य बैंकिंग एवं फिनटेक क्षेत्र में निवेश बढ़ाकर डिजिटल भुगतान प्रणाली को अधिक सुरक्षित और मजबूत बनाना है।


