नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने उन सभी खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि भारत पेट्रोल में मिलाने के लिए अमेरिका से बड़ी मात्रा में इथेनॉल आयात कर रहा है या जल्द ही ऐसा करने की तैयारी कर रहा है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ये रिपोर्ट्स पूरी तरह भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।
मंत्रालय ने कहा कि भारत के इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) के तहत पेट्रोल में मिलाया जाने वाला इथेनॉल केवल देश के घरेलू उत्पादकों से खरीदा जाता है। सरकार की मौजूदा नीति में ईंधन के लिए अमेरिका या किसी अन्य देश से इथेनॉल आयात का कोई प्रावधान नहीं है।
घरेलू उत्पादकों से ही होती है इथेनॉल की खरीद
सरकार के अनुसार, देश में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने के लिए गन्ने, मक्का और चावल जैसे कृषि उत्पादों से तैयार इथेनॉल का उपयोग किया जा रहा है। इसके लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) घरेलू डिस्टिलरी और इथेनॉल उत्पादकों से खरीद करती हैं।
मंत्रालय ने साफ किया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम पूरी तरह ‘मेक इन इंडिया’ और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की नीति पर आधारित है। इसलिए अमेरिका से फ्यूल इथेनॉल आयात किए जाने की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर भी सरकार ने दी सफाई
हाल के दिनों में कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं के दौरान इथेनॉल आयात को लेकर भारत ने अमेरिका को कुछ रियायतें देने पर सहमति जताई है।
इस पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत ने अमेरिका से फ्यूल इथेनॉल आयात करने के संबंध में न तो कोई प्रतिबद्धता दी है और न ही किसी प्रकार की रियायत प्रदान की है।
सरकार ने कहा कि व्यापार वार्ता को लेकर इस तरह की खबरें पूरी तरह आधारहीन हैं और इनका वास्तविक तथ्यों से कोई संबंध नहीं है।
नीति में बदलाव की खबर भी निकली गलत
सरकार ने उन रिपोर्ट्स का भी खंडन किया जिनमें कहा गया था कि अमेरिका से बड़े पैमाने पर इथेनॉल आयात की अनुमति देने के लिए भारत अपनी नीति में बदलाव करने जा रहा है।
मंत्रालय के अनुसार, इथेनॉल ब्लेंडिंग से जुड़ी सभी नीतियां देश की ऊर्जा सुरक्षा, घरेलू उत्पादन क्षमता और किसानों के हितों को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। फिलहाल नीति में ऐसा कोई बदलाव प्रस्तावित नहीं है जिससे विदेशी इथेनॉल आयात का रास्ता खुले।
कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने में अहम है इथेनॉल
भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 88.5 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आपूर्ति बाधित होने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
इसी चुनौती से निपटने के लिए सरकार इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रही है। गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार इथेनॉल न केवल आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करता है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
किसानों और ऊर्जा सुरक्षा दोनों को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू स्तर पर इथेनॉल उत्पादन बढ़ने से किसानों को अपनी फसलों का बेहतर मूल्य मिलता है। साथ ही देश को विदेशी मुद्रा की बचत, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण जैसे कई लाभ प्राप्त होते हैं।
सरकार ने दोहराया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम का उद्देश्य घरेलू कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना और भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाना है।
निष्कर्ष
केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि पेट्रोल में मिलाने के लिए अमेरिका से इथेनॉल आयात किए जाने की खबरें पूरी तरह गलत हैं। सरकार की मौजूदा नीति के तहत इथेनॉल की खरीद केवल घरेलू उत्पादकों से की जाती है और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में भी इस संबंध में कोई रियायत या समझौता नहीं हुआ है। ऐसे में देश का इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम पहले की तरह घरेलू उत्पादन पर ही आधारित रहेगा।


