RBI MPC Meeting Aug 2026: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अगस्त 2026 की बैठक में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला किया है। केंद्रीय बैंक ने अपने नीतिगत रुख को भी न्यूट्रल बनाए रखा है। हालांकि, महंगाई के अनुमान में बदलाव करते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई (Inflation) के अनुमान को थोड़ा कम किया गया है।
आरबीआई के इस फैसले से जहां आम लोगों को ब्याज दरों में राहत की उम्मीद बनी हुई है, वहीं महंगाई को लेकर आगे की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा। केंद्रीय बैंक ने कुछ तिमाहियों में महंगाई के अनुमान को घटाया है, जबकि आने वाली तिमाहियों के लिए दबाव बने रहने का संकेत भी दिया है।
RBI ने घटाया वित्त वर्ष 2027 का महंगाई अनुमान
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 5 अगस्त को MPC बैठक के फैसलों का ऐलान किया। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई दर का अनुमान 5.1% से घटाकर 5% कर दिया है।
इसके अलावा जुलाई-सितंबर 2026 यानी दूसरी तिमाही के लिए महंगाई अनुमान को भी कम किया गया है। पहले आरबीआई ने इस अवधि में महंगाई दर 5.1% रहने का अनुमान लगाया था, जिसे अब घटाकर 4.7% कर दिया गया है।
हालांकि, तीसरी और चौथी तिमाही में महंगाई को लेकर आरबीआई ने सावधानी बरती है।
तिमाही आधार पर RBI का नया महंगाई अनुमान
| अवधि | पिछला अनुमान | नया अनुमान |
|---|---|---|
| वित्त वर्ष 2027 | 5.1% | 5% |
| जुलाई-सितंबर 2026 | 5.1% | 4.7% |
| अक्टूबर-दिसंबर 2026 | 5.9% | 5.9% |
| जनवरी-मार्च 2027 | 5.4% | 5.5% |
आरबीआई के अनुमान से साफ है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में महंगाई से कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन आगे की अवधि में कीमतों का दबाव बना रह सकता है।
खाने-पीने की चीजों की कीमतों से बढ़ी चिंता
देश में खुदरा महंगाई पर सबसे ज्यादा असर खाद्य वस्तुओं की कीमतों का रहता है। जून 2026 में खाने-पीने की चीजों की कीमतों में तेजी और कई अन्य क्षेत्रों में महंगाई का दबाव बढ़ने से खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.38% पहुंच गई थी।
यह करीब 17 महीनों में पहली बार था जब महंगाई दर आरबीआई के मध्यम अवधि के 4% लक्ष्य से ऊपर चली गई।
सब्जियों, खाद्य तेल, दालों और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव आम लोगों के घरेलू बजट पर सीधा असर डालता है। यही वजह है कि आरबीआई महंगाई के रुझान पर लगातार नजर बनाए हुए है।
Repo Rate में कोई बदलाव नहीं, EMI पर असर नहीं
आरबीआई की MPC ने रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला किया है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपने रुख को न्यूट्रल रखा है।
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है। इसमें बदलाव होने पर आमतौर पर होम लोन, ऑटो लोन और अन्य कर्ज की ब्याज दरों पर असर पड़ता है।
रेपो रेट स्थिर रहने का मतलब है कि फिलहाल:
- होम लोन की EMI में तुरंत बदलाव की संभावना नहीं है।
- नए कर्ज पर ब्याज दरें स्थिर रह सकती हैं।
- बैंक भी अपनी लोन दरों में बड़ा बदलाव करने से बच सकते हैं।
RBI का संतुलित रुख क्यों अहम है?
आरबीआई के सामने इस समय दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहली चुनौती है महंगाई को नियंत्रित रखना और दूसरी है आर्थिक विकास की रफ्तार को बनाए रखना।
अगर महंगाई ज्यादा बढ़ती है तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा रख सकता है, जिससे कर्ज महंगा रहता है। वहीं, अगर महंगाई नियंत्रण में आती है तो भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश बन सकती है।
फिलहाल आरबीआई ने रेपो रेट स्थिर रखकर संकेत दिया है कि वह आर्थिक परिस्थितियों पर नजर रखते हुए आगे के फैसले लेगा।
आम लोगों और बाजार पर क्या होगा असर?
आरबीआई के इस फैसले का असर बैंकिंग सेक्टर, शेयर बाजार और आम उपभोक्ताओं पर देखने को मिल सकता है।
आम लोगों के लिए:
- EMI में तत्काल राहत या बढ़ोतरी नहीं होगी।
- बचत और निवेश पर ब्याज दरें फिलहाल स्थिर रह सकती हैं।
बाजार के लिए:
- स्थिर ब्याज दरें कंपनियों के लिए सकारात्मक संकेत हो सकती हैं।
- बैंकिंग और रियल एस्टेट सेक्टर पर इसका असर देखने को मिल सकता है।
आगे महंगाई की दिशा पर रहेगी नजर
आरबीआई ने महंगाई अनुमान में मामूली कटौती जरूर की है, लेकिन चौथी तिमाही के अनुमान में बढ़ोतरी यह बताती है कि केंद्रीय बैंक पूरी तरह निश्चिंत नहीं है।
आने वाले महीनों में मानसून, खाद्य वस्तुओं की कीमतें, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव और वैश्विक आर्थिक हालात महंगाई की दिशा तय करेंगे।
फिलहाल RBI का फैसला यह संकेत देता है कि केंद्रीय बैंक विकास को समर्थन देते हुए महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है।


