भारत में Indian Institutes of Technology की डिग्री को लंबे समय से करियर की सफलता का बड़ा टिकट माना जाता है। लाखों छात्र हर साल IIT में दाखिले का सपना देखते हैं, क्योंकि यहां से निकलने वाले छात्रों को शानदार प्लेसमेंट और बड़े पैकेज मिलने की उम्मीद रहती है। लेकिन अब एक वायरल सोशल मीडिया पोस्ट ने इस सोच पर नई बहस छेड़ दी है।
एक इंजीनियरिंग छात्र, जिसने अपनी BTech की पढ़ाई पूरी नहीं की, ने दावा किया है कि वह बिना डिग्री के भी सालाना 1 लाख डॉलर (करीब ₹95 लाख से ज्यादा) कमा रहा है। उसकी पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा शुरू हो गई है कि आज के समय में सफलता के लिए डिग्री जरूरी है या फिर स्किल्स और अनुभव ज्यादा मायने रखते हैं।
आखिरी सेमेस्टर में छोड़ी BTech की पढ़ाई
यह दावा ग्रोथ मार्केटर लावण्या जैन ने किया है। जैन के मुताबिक उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में अपनी बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (BTech) की पढ़ाई आखिरी सेमेस्टर में छोड़ दी थी।
उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि वह IIT से नहीं हैं और उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग डिग्री भी पूरी नहीं की। उनके अनुसार, पढ़ाई छोड़ने का फैसला उनकी जिंदगी के सबसे अच्छे फैसलों में से एक साबित हुआ।
जैन ने लिखा, “मैं IIT से भी नहीं हूं। असल में, मैंने इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन्स इंजीनियरिंग में अपनी BTech की पढ़ाई आखिरी सेमेस्टर में ही छोड़ दी थी। मुझे लगता है कि यह मेरी जिंदगी के सबसे अच्छे फैसलों में से एक था।”
सैलरी क्रेडिट के स्क्रीनशॉट किए शेयर
अपने कमाई के दावे को साबित करने के लिए जैन ने कुछ बैंक स्क्रीनशॉट भी शेयर किए। इनमें 3.74 लाख रुपये और 1.12 लाख रुपये के सैलरी क्रेडिट दिखाई दे रहे थे। यानी कुल मिलाकर करीब 4.86 लाख रुपये की राशि खाते में जमा हुई थी।
जैन का कहना है कि वह एक कॉन्ट्रैक्टर के तौर पर पार्ट टाइम काम करते हुए भी अपने पुराने कॉलेज के सबसे बड़े प्लेसमेंट पैकेज से ज्यादा कमा रहे हैं।
उन्होंने दावा किया, “मैं अपने कॉलेज के सबसे ज्यादा प्लेसमेंट पैकेज (100k USD) से भी ज्यादा कमा रहा हूं, और वह भी एक कॉन्ट्रैक्टर के तौर पर पार्ट टाइम काम करके।”
‘IIT सिर्फ एक टैग है’ वाले बयान पर छिड़ी बहस
जैन की पोस्ट का सबसे ज्यादा चर्चा वाला हिस्सा उनका यह दावा है कि IIT की डिग्री सिर्फ एक टैग है। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति की असली पहचान उसकी स्किल्स, काम करने की क्षमता और बिजनेस में दिए गए योगदान से होती है।
उनके इस बयान पर सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंट गया है। कुछ लोग मानते हैं कि आज के डिजिटल दौर में स्किल्स और अनुभव डिग्री से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि IIT जैसी संस्थाओं की डिग्री अब भी शुरुआती करियर में मजबूत अवसर दिलाने में बड़ी भूमिका निभाती है।
कई स्टार्टअप्स में कर चुके हैं काम
जैन की प्रोफेशनल जानकारी के मुताबिक उन्होंने स्टार्टअप सेक्टर में ग्रोथ मार्केटिंग और गो-टू-मार्केट (GTM) जैसी भूमिकाओं में काम किया है। उन्होंने Runable, Kairos Computer और Fold जैसे स्टार्टअप्स के साथ काम करने का अनुभव बताया है।
स्टार्टअप इंडस्ट्री में पिछले कुछ वर्षों में यह ट्रेंड तेजी से बढ़ा है, जहां कंपनियां सिर्फ डिग्री के बजाय उम्मीदवार की समस्या हल करने की क्षमता, प्रोजेक्ट अनुभव और वास्तविक परिणामों को महत्व दे रही हैं।
पैसिव इनकम के भी कई जरिये होने का दावा
जैन ने अपनी पोस्ट में यह भी बताया कि उनकी कमाई का एक हिस्सा पैसिव इनकम के जरिए आता है। उन्होंने दावा किया कि उनके पास कमाई के पांच अलग-अलग स्रोत हैं और उनकी मुख्य आय उनके सभी खर्चों को पूरा कर देती है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पोस्ट का उद्देश्य अपनी आर्थिक सफलता का प्रदर्शन करना नहीं था। बल्कि वह उस सोच को चुनौती देना चाहते थे जिसमें माना जाता है कि केवल बड़े संस्थान की डिग्री ही सफलता की गारंटी होती है।
डिग्री बनाम स्किल्स की पुरानी बहस फिर तेज
जैन की वायरल पोस्ट ने एक बार फिर भारत में डिग्री और स्किल्स को लेकर बहस शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छी शिक्षा और प्रतिष्ठित संस्थान करियर में शुरुआती बढ़त जरूर देते हैं, लेकिन लंबे समय में व्यक्ति की स्किल्स, सीखने की क्षमता और काम का अनुभव ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
हालांकि, हर व्यक्ति के लिए पढ़ाई छोड़ना सही फैसला नहीं हो सकता। सफलता के ऐसे उदाहरण प्रेरणा तो दे सकते हैं, लेकिन इनके पीछे लंबे समय की मेहनत, सही अवसर और विशेष कौशल भी अहम भूमिका निभाते हैं।
निष्कर्ष
लावण्या जैन का दावा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि आधुनिक करियर में डिग्री के साथ-साथ स्किल्स और अनुभव की भूमिका भी बढ़ रही है। हालांकि, किसी भी बड़े करियर फैसले को सिर्फ एक वायरल कहानी देखकर नहीं, बल्कि अपनी परिस्थितियों और लक्ष्यों को ध्यान में रखकर लेना चाहिए।


