Persistent Systems Share Price: आईटी सर्विस कंपनी पर्सिस्टेंट सिस्टम्स लिमिटेड के जून 2026 तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे सामने आने के बाद सोमवार को शेयरों में दबाव देखने को मिला। कंपनी का मुनाफा और रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद निवेशकों ने स्टॉक में मुनाफावसूली की, जिसके चलते शेयर दिन के कारोबार में करीब 4% तक गिर गया। वहीं ब्रोकरेज फर्म HSBC ने शेयर पर अपनी ‘Hold’ रेटिंग बरकरार रखते हुए ₹4,610 का टारगेट प्राइस दिया है, जो मौजूदा स्तरों से संभावित गिरावट का संकेत देता है।
Q1 नतीजों के बाद Persistent Systems के शेयर में गिरावट
सोमवार, 3 अगस्त 2026 को Persistent Systems के शेयर बीएसई पर गिरकर ₹5,319.75 के निचले स्तर तक पहुंच गए। कंपनी के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के बावजूद शेयर में बिकवाली का कारण मुनाफे पर मार्जिन दबाव और ब्रोकरेज की सतर्क राय को माना जा रहा है।
जून 2026 तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 13.67% बढ़कर ₹483.04 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी का मुनाफा ₹424.93 करोड़ रहा था।
वहीं कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस 29% बढ़कर ₹4,303.22 करोड़ पहुंच गया, जबकि जून 2025 तिमाही में यह आंकड़ा ₹3,333.58 करोड़ था।
किन सेक्टर से आया सबसे ज्यादा रेवेन्यू?
Persistent Systems के लिए सॉफ्टवेयर, हाई-टेक और उभरते उद्योग (Emerging Industries) सबसे बड़ा रेवेन्यू योगदान देने वाला सेगमेंट रहा।
कंपनी के कुल रेवेन्यू में:
- सॉफ्टवेयर, हाई-टेक और उभरते उद्योगों की हिस्सेदारी: 40.7%
- BFSI (बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस): 34%
- हेल्थकेयर और लाइफ साइंसेज: 25.3%
कंपनी ने बताया कि डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, क्लाउड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े प्रोजेक्ट्स में मांग बनी हुई है।
रिकॉर्ड डील से मजबूत हुआ ऑर्डर बुक
जून तिमाही में Persistent Systems ने अब तक की सबसे बड़ी तिमाही बुकिंग दर्ज की। कंपनी को एक ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनी से 65 करोड़ डॉलर से ज्यादा की बड़ी डील मिली।
इस डील के कारण कंपनी की:
- टोटल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू (TCV): करीब दोगुनी होकर 1.15 अरब डॉलर हो गई।
- एनुअल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू (ACV): पिछली तिमाही के मुकाबले 20.6% बढ़कर 53.68 करोड़ डॉलर पहुंच गई।
कंपनी के कर्मचारियों की संख्या भी 30 जून 2026 तक बढ़कर 28,640 हो गई।
बढ़ते खर्च से मार्जिन पर दबाव
हालांकि कंपनी की आय में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली, लेकिन बढ़ते खर्च ने मुनाफे को प्रभावित किया।
जून 2026 तिमाही में कंपनी का कुल खर्च:
- ₹3,750.76 करोड़ रहा
- जून 2025 तिमाही में खर्च ₹2,832.84 करोड़ था
HSBC के अनुसार, ज्यादा डायरेक्ट कॉस्ट और सेल्स एवं मार्केटिंग खर्च बढ़ने से कंपनी का EBIT मार्जिन दबाव में आया।
कंपनी का EBIT मार्जिन घटकर करीब 16% रह गया, जबकि अनुमान लगभग 16.5% का था।
HSBC ने क्यों दी ‘Hold’ रेटिंग?
ब्रोकरेज फर्म HSBC ने Persistent Systems पर अपनी Hold रेटिंग जारी रखी है और ₹4,610 का टारगेट प्राइस दिया है।
HSBC का मानना है कि:
- कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ उम्मीदों से बेहतर रही।
- रिकॉर्ड डील जीतना सकारात्मक संकेत है।
- ऑर्डर इनफ्लो मजबूत बना हुआ है।
हालांकि ब्रोकरेज ने मुनाफे और मार्जिन को लेकर चिंता जताई है।
HSBC के मुताबिक, कंपनी की 4.1% कॉन्स्टेंट करेंसी ग्रोथ टीसीएस, इंफोसिस, टेक महिंद्रा, एमफैसिस, जेनसर, LTTS और हेक्सावेयर जैसी कई प्रतिस्पर्धी कंपनियों से बेहतर रही है।
एक महीने में 18% चढ़ चुका है शेयर
गिरावट के बावजूद Persistent Systems के शेयर ने हाल के समय में अच्छा प्रदर्शन किया है।
स्टॉक से जुड़ी अहम बातें:
- मार्केट कैप: ₹86,700 करोड़ से ज्यादा
- फेस वैल्यू: ₹5
- 52 सप्ताह का हाई: ₹6,597
- 52 सप्ताह का लो: ₹4,242.65
- एक महीने में तेजी: करीब 18%
कंपनी में जून 2026 के अंत तक प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 30.29% थी।
Persistent Systems Share Price: निवेशकों को क्या करना चाहिए?
Persistent Systems के फंडामेंटल अभी भी मजबूत नजर आ रहे हैं। कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ, बड़े कॉन्ट्रैक्ट और मजबूत ऑर्डर बुक इसके पक्ष में हैं। हालांकि, बढ़ते खर्च और मार्जिन में गिरावट को लेकर निवेशकों को सतर्क रहना होगा।
शॉर्ट टर्म में HSBC का ₹4,610 का टारगेट शेयर पर दबाव दिखा रहा है। वहीं लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कंपनी की ग्रोथ और डिजिटल सर्विसेज की मांग महत्वपूर्ण फैक्टर रहेंगे।
निवेशकों को सलाह है कि वे केवल तेजी या गिरावट देखकर फैसला न लें और कंपनी के अगले तिमाही नतीजों, मार्जिन सुधार और नए ऑर्डर पर नजर रखें।
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