Middle East Crisis: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार की चिंता बढ़ा दी है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका उसके ऊर्जा ढांचों पर बड़ा हमला करता है तो वह संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, कतर और इजरायल के तेल एवं गैस ठिकानों को निशाना बना सकता है। यदि ऐसा होता है तो अगले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सप्लाई बाधित होने की आशंका से ब्रेंट और WTI क्रूड दोनों में बड़ी तेजी आ सकती है।
अमेरिका-ईरान तनाव ने बढ़ाई बाजार की बेचैनी
मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को दी गई कड़ी चेतावनियों के बाद तेहरान ने भी सख्त रुख अपनाया है। ईरान का कहना है कि यदि अमेरिका उसके ऊर्जा संयंत्रों या रणनीतिक ठिकानों पर हमला करता है तो वह केवल जवाबी कार्रवाई ही नहीं करेगा, बल्कि अमेरिका के सहयोगी देशों के ऊर्जा ढांचों को भी निशाना बना सकता है।
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर और इजरायल में मौजूद तेल और गैस से जुड़े प्रमुख प्रतिष्ठान संभावित जवाबी कार्रवाई के दायरे में हो सकते हैं। ऐसे बयान ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है।
अगले सप्ताह क्रूड ऑयल में क्यों आ सकती है बड़ी तेजी?
दुनिया के कुल तेल उत्पादन और निर्यात का बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से आता है। यदि इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य टकराव बढ़ता है या तेल एवं गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला होता है तो वैश्विक सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी स्थिति में:
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई घटने की आशंका बढ़ जाएगी।
- निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर रुख करेंगे।
- तेल कंपनियां जोखिम प्रीमियम जोड़ना शुरू कर सकती हैं।
- ब्रेंट और WTI क्रूड की कीमतों में अगले सप्ताह तेज उछाल देखने को मिल सकता है।
जुलाई में पहले ही 24% तक चढ़ चुका है कच्चा तेल
तेल बाजार पहले से ही मजबूत रुख में है। पिछले सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार को भी क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई।
शुक्रवार का क्लोजिंग भाव
- WTI Crude: 84.67 डॉलर प्रति बैरल
- Brent Crude: 87.94 डॉलर प्रति बैरल
जुलाई महीने के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 24% की तेजी दर्ज की गई, जो इस बात का संकेत है कि बाजार पहले से ही भू-राजनीतिक जोखिमों को लेकर सतर्क है।
गोल्डमैन सैक्स ने दी बड़ी चेतावनी
वैश्विक निवेश बैंक Goldman Sachs का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है तथा प्रमुख समुद्री मार्गों या तेल आपूर्ति पर असर पड़ता है, तो ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है।
हालांकि बैंक का यह भी अनुमान है कि यदि हालात सामान्य होते हैं तो वित्त वर्ष की चौथी तिमाही तक ब्रेंट क्रूड लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल और अगले वर्ष 75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ सकता है।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
यदि क्रूड ऑयल लंबे समय तक महंगा बना रहता है तो:
- भारत का आयात बिल बढ़ सकता है।
- रुपये पर दबाव बढ़ने की संभावना रहती है।
- पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बन सकता है।
- महंगाई बढ़ने का जोखिम पैदा हो सकता है।
- सरकार की वित्तीय योजनाओं और तेल विपणन कंपनियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
निवेशकों और बाजार की नजर अगले सप्ताह पर
कमोडिटी बाजार के जानकारों का कहना है कि अगले सप्ताह निवेशकों की नजर अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले घटनाक्रम पर रहेगी। यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है या मध्य पूर्व के तेल एवं गैस प्रतिष्ठानों पर किसी प्रकार की सैन्य कार्रवाई होती है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है।
वहीं यदि कूटनीतिक प्रयास सफल रहते हैं और तनाव कम होता है तो तेल की कीमतों में राहत भी मिल सकती है। ऐसे में आने वाला सप्ताह वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत जैसे आयातक देशों के लिए बेहद अहम रहने वाला है।


