Who is Yash Vir Singh: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के युवा जैवलिन थ्रोअर यश वीर सिंह ने अपने करियर का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। राजस्थान के जयपुर से आने वाले 24 वर्षीय एथलीट ने 85.41 मीटर का पर्सनल बेस्ट थ्रो किया। खास बात यह है कि कभी बांस के बने भाले से अभ्यास करने वाले यश आज कॉमनवेल्थ गेम्स के पदक विजेता बन चुके हैं। उनकी सफलता संघर्ष, मेहनत और परिवार के सहयोग की प्रेरणादायक कहानी है।
CWG 2026 में भारत का शानदार प्रदर्शन
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पुरुष जैवलिन थ्रो फाइनल में भारत ने शानदार प्रदर्शन किया। अनुभवी खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर के सीजन बेस्ट थ्रो के साथ सिल्वर मेडल जीता, जबकि यश वीर सिंह ने अपने आखिरी प्रयास में 85.41 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।
इस स्पर्धा का गोल्ड मेडल श्रीलंका के रुमेश थरंगा ने 89.75 मीटर के थ्रो के साथ जीता। भारत ने इस इवेंट में सिल्वर और ब्रॉन्ज दोनों पदक जीतकर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।
पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में उतरे और जीत लिया पदक
यश वीर सिंह के लिए यह पहला कॉमनवेल्थ गेम्स था। फाइनल में उन्होंने शुरुआती पांच प्रयासों के बाद अपने छठे और अंतिम थ्रो में 85.41 मीटर की दूरी तय की, जो उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन साबित हुआ।
इससे पहले उनका पर्सनल बेस्ट 83.72 मीटर था। आखिरी प्रयास में उन्होंने न सिर्फ अपना रिकॉर्ड तोड़ा बल्कि भारत की झोली में एक और पदक भी डाल दिया।
कौन हैं यश वीर सिंह?
राजस्थान के जयपुर में जन्मे यश वीर सिंह का खेल सफर बेहद दिलचस्प रहा है। शुरुआत में उनकी रुचि बास्केटबॉल में थी, लेकिन बाद में उन्होंने जैवलिन थ्रो को अपना करियर बनाने का फैसला किया।
उनके शुरुआती दिन आसान नहीं थे। सीमित संसाधनों के कारण उन्होंने लंबे समय तक बांस से बने भाले से अभ्यास किया। बाद में उन्हें प्रोफेशनल ट्रेनिंग और आधुनिक उपकरण मिले, जिससे उनके प्रदर्शन में लगातार सुधार होता गया।
पिता से मिली जैवलिन की पहली सीख
यश वीर सिंह की सफलता के पीछे उनके पिता राय सिंह का बड़ा योगदान है। राय सिंह खुद राष्ट्रीय स्तर के जैवलिन थ्रो खिलाड़ी रह चुके हैं और उन्होंने बचपन से ही बेटे को इस खेल की बारीकियां सिखाईं।
पिता के मार्गदर्शन और लगातार मेहनत ने यश को राष्ट्रीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
अंडर-20 में तोड़ा था नीरज चोपड़ा का रिकॉर्ड
यश वीर सिंह ने 2022 के इंडियन अंडर-20 फेडरेशन कप में 80 मीटर से अधिक का थ्रो कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा था। इस प्रदर्शन के दौरान उन्होंने नीरज चोपड़ा का मीट रिकॉर्ड भी तोड़ दिया था।
यही वह उपलब्धि थी जिसने उन्हें भारत के सबसे होनहार युवा जैवलिन खिलाड़ियों में शामिल कर दिया।
एशियन चैंपियनशिप से विश्व चैंपियनशिप तक का सफर
साल 2025 में दक्षिण कोरिया के गुमी में आयोजित एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में यश वीर सिंह ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। वहां उन्होंने 82.57 मीटर का थ्रो कर पांचवां स्थान हासिल किया।
इसके बाद विश्व रैंकिंग के आधार पर उनका चयन 2025 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए हुआ, जहां उन्होंने जापान की राजधानी टोक्यो में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के अनुभव ने उन्हें और मजबूत बनाया, जिसका फायदा उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मिला।
भारत के चुनिंदा जैवलिन पदक विजेताओं में शामिल
कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज जीतने के साथ यश वीर सिंह अब उन चुनिंदा भारतीय खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गए हैं जिन्होंने पुरुष जैवलिन थ्रो में पदक जीता है।
- 2010: काशीनाथ नाइक – ब्रॉन्ज
- 2018: नीरज चोपड़ा – गोल्ड
- 2026: नीरज चोपड़ा – सिल्वर
- 2026: यश वीर सिंह – ब्रॉन्ज
संघर्ष से सफलता तक की मिसाल
यश वीर सिंह की कहानी बताती है कि सीमित संसाधन किसी खिलाड़ी के सपनों को रोक नहीं सकते। बांस के भाले से अभ्यास शुरू करने वाला यह युवा खिलाड़ी आज कॉमनवेल्थ गेम्स का पदक विजेता बन चुका है। 24 वर्ष की उम्र में उन्होंने जो उपलब्धि हासिल की है, वह भारतीय एथलेटिक्स के लिए भविष्य की बड़ी उम्मीद मानी जा रही है।


