भारत EV Growth 2026: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों, कम ऑपरेटिंग कॉस्ट, पर्यावरण संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता और सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं के चलते अब देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में पंजीकृत इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या पहली बार 1 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है। इसके साथ ही सरकार चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने के लिए भी बड़े स्तर पर निवेश और योजनाओं पर काम कर रही है।
भारत में EV बाजार ने पकड़ी रफ्तार
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2020 में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी केवल 0.71% थी। वहीं वित्त वर्ष 2026 तक यह बढ़कर 8.26% पहुंच गई है।
यानी केवल छह वर्षों में देश में EV की हिस्सेदारी में 11 गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़े VAHAN पोर्टल के आधार पर तैयार किए गए हैं और बताते हैं कि भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ रहा है।
पहली बार 1 करोड़ के पार पहुंचे इलेक्ट्रिक वाहन
सरकार के अनुसार 26 जुलाई 2026 तक देश में सभी श्रेणियों को मिलाकर 1,00,23,396 इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हो चुके हैं। यह भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
पहले जहां इलेक्ट्रिक वाहन मुख्य रूप से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे महानगरों तक सीमित थे, वहीं अब छोटे शहरों और कस्बों में भी EV की मांग तेजी से बढ़ रही है। इलेक्ट्रिक दोपहिया, तीनपहिया, कारों और कमर्शियल वाहनों की बिक्री में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
क्यों तेजी से बढ़ रही है EV की मांग?
सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता के पीछे कई अहम कारण हैं। इनमें सबसे बड़ा कारण ईंधन की बढ़ती कीमतों के मुकाबले EV का कम खर्चीला संचालन है।
EV अपनाने के प्रमुख कारण
- पेट्रोल और डीजल वाहनों की तुलना में कम ऑपरेटिंग कॉस्ट
- टेलपाइप से धुआं नहीं निकलने के कारण प्रदूषण में कमी
- रखरखाव (मेंटेनेंस) का खर्च कम
- केंद्र और राज्य सरकारों की प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ
- चार्जिंग नेटवर्क का तेजी से विस्तार
- लंबी अवधि में बेहतर बचत
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में बैटरी की कीमतों में गिरावट और नई तकनीकों के आने से इलेक्ट्रिक वाहनों की लागत और कम हो सकती है।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का बड़ा फोकस
इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ सरकार चार्जिंग नेटवर्क को भी मजबूत कर रही है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 31 मार्च 2026 तक देशभर में 52,718 सार्वजनिक EV चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। इसके अलावा सरकार ने निजी कंपनियों को भी चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए प्रोत्साहित किया है।
बिजली मंत्रालय की 2024 की गाइडलाइन के तहत निजी कंपनियां देशभर में EV चार्जिंग स्टेशन स्थापित कर सकती हैं, जिससे आने वाले वर्षों में चार्जिंग सुविधाएं और तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।
हाईवे पर हर 40-60 किलोमीटर पर मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
नितिन गडकरी ने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) अपनी सहयोगी कंपनी नेशनल हाईवेज लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML) के माध्यम से राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर लगभग 40 से 60 किलोमीटर की दूरी पर आधुनिक वे-साइड सुविधाएं विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है।
इन केंद्रों पर यात्रियों और ट्रक चालकों को एक ही स्थान पर कई सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
इन वे-साइड सुविधाओं में शामिल होंगे
- EV चार्जिंग स्टेशन
- पेट्रोल और डीजल पंप
- रेस्टोरेंट और फूड कोर्ट
- स्वच्छ शौचालय
- पीने के पानी की सुविधा
- पार्किंग
- अल्पकालिक ठहरने की व्यवस्था
सरकार का मानना है कि हाईवे पर बेहतर चार्जिंग नेटवर्क बनने से लंबी दूरी की इलेक्ट्रिक यात्रा पहले की तुलना में अधिक आसान और सुविधाजनक होगी।
पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों को मिलेगा फायदा
इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग से न केवल ईंधन आयात पर भारत की निर्भरता कम होगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। इससे देश के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य और नेट-जीरो मिशन को भी मजबूती मिलेगी।
ऑटोमोबाइल उद्योग के जानकारों का मानना है कि यदि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बैटरी तकनीक और सरकारी प्रोत्साहन इसी गति से आगे बढ़ते रहे, तो अगले कुछ वर्षों में भारत दुनिया के सबसे बड़े इलेक्ट्रिक वाहन बाजारों में शामिल हो सकता है।
निष्कर्ष
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार अब शुरुआती दौर से निकलकर तेज विकास के चरण में पहुंच चुका है। 1 करोड़ से अधिक EV का पंजीकरण इस बात का संकेत है कि देश तेजी से स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। सरकार की चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर योजना, हाईवे पर आधुनिक सुविधाओं का विस्तार और निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी आने वाले वर्षों में EV सेक्टर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।


