Delhi Protest News: दिल्ली सरकार ने जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदर्शन में शामिल आम लोगों के खिलाफ कोई नई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि, जिन लोगों का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड है या जिनके खिलाफ गंभीर मामले दर्ज हैं, उन्हें इस राहत का लाभ नहीं मिलेगा। वहीं, पहले से गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए लोगों के मामलों की समीक्षा कर पात्र लोगों को राहत देने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
प्रदर्शनकारियों के खिलाफ नहीं दर्ज होंगे नए केस
दिल्ली सरकार के गृह विभाग द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि राष्ट्रीय राजधानी के सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जंतर-मंतर पर हुए हालिया विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ कोई नया मुकदमा दर्ज न किया जाए और न ही नई कानूनी कार्रवाई की जाए।
सरकार का कहना है कि यह कदम शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों को राहत देने के उद्देश्य से उठाया गया है। हालांकि, जिन व्यक्तियों का पहले से आपराधिक इतिहास है या जिनके खिलाफ गंभीर अपराधों के मामले दर्ज हैं, वे इस फैसले के दायरे में नहीं आएंगे।
पहले से गिरफ्तार लोगों के मामलों की होगी समीक्षा
सरकार ने यह भी घोषणा की है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए लोगों के मामलों की समीक्षा की जाएगी। यदि जांच में कोई व्यक्ति राहत पाने का पात्र पाया जाता है, तो उसे जल्द से जल्द रिहा करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस पहले ही 13 एफआईआर दर्ज कर चुकी है और जांच अभी भी जारी है।
CJP ने दी फिर आंदोलन की चेतावनी
विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार के फैसले के बावजूद कहा है कि यदि प्रदर्शन से जुड़े मामलों में दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली गईं, तो वह एक बार फिर जंतर-मंतर पर बड़ा आंदोलन करेगी।
इस बीच दिल्ली सरकार का यह कदम बिहार, असम और महाराष्ट्र सरकारों द्वारा लिए गए समान फैसलों के बाद आया है।
पुलिस का दावा- 2,900 संदिग्ध लोगों की हुई पहचान
सरकार की घोषणा से पहले दिल्ली पुलिस ने दावा किया था कि जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में शामिल करीब 2,900 लोगों की पहचान की गई है, जिनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिनका पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रहा है।
पुलिस के अनुसार, 20 जुलाई से 25 जुलाई के बीच जंतर-मंतर पर मौजूद 2,873 पुरुषों की पहचान फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) और अन्य आधुनिक तकनीकों की मदद से की गई। अब यह जांच की जा रही है कि इनमें से कौन लोग जंतर-मंतर और नई दिल्ली क्षेत्र में हुई हिंसा की घटनाओं में शामिल थे।
कई लोगों पर दर्ज हैं गंभीर आपराधिक मामले
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जिन लोगों की पहचान की गई है, उनमें से 989 व्यक्तियों का रिकॉर्ड गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़ा हुआ है। इनमें हत्या, हत्या की कोशिश, दुष्कर्म, लूट, डकैती, अपहरण, महिलाओं के खिलाफ अपराध, हथियार कानून और नशीले पदार्थों से जुड़े मामले शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार आरोपों का विवरण इस प्रकार है:
- हत्या के मामले – 101
- हत्या की कोशिश – 62
- लूट और डकैती – 284
- दुष्कर्म – 61
- पॉक्सो एक्ट के मामले – 6
- महिलाओं के खिलाफ अपराध – 25
- आर्म्स एक्ट – 229
- झपटमारी – 135
- अपहरण – 19
- नशीले पदार्थों से जुड़े मामले – 67
पुलिस का यह भी कहना है कि इनमें से कई लोग विरोध प्रदर्शन के दौरान एक से अधिक बार जंतर-मंतर पहुंचे थे। फिलहाल उनकी भूमिका की विस्तृत जांच जारी है।
सरकार और पुलिस का रुख अलग-अलग
एक ओर दिल्ली सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को राहत देने का संकेत दिया है, वहीं दूसरी ओर दिल्ली पुलिस हिंसा में शामिल संदिग्ध लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ जांच आगे बढ़ा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि समीक्षा प्रक्रिया के बाद कितने लोगों को राहत मिलती है और हिंसा से जुड़े मामलों में जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।


