**HighLights
- वारी एनर्जीज के शेयर में 6% से अधिक की गिरावट
- Q1 नतीजों के बाद EBITDA मार्जिन में आई कमी से निवेशक चिंतित
- इनपुट लागत 63.5% बढ़ने से मुनाफे के मार्जिन पर दबाव
- राजस्व 79% और शुद्ध लाभ 14% बढ़ने के बावजूद शेयर में बिकवाली
नई दिल्ली: सोलर सेक्टर की प्रमुख कंपनी Waaree Energies के शेयर गुरुवार (30 जुलाई) को शुरुआती कारोबार में 6% से अधिक टूट गए। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 (Q1 FY27) के पहली तिमाही के नतीजों में राजस्व और शुद्ध लाभ में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की, लेकिन बढ़ती इनपुट लागत के कारण EBITDA मार्जिन में आई गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसी वजह से बाजार खुलते ही शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली।
6% से ज्यादा टूटा Waaree Energies का शेयर
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के अनुसार, गुरुवार को Waaree Energies का शेयर करीब 6.4% गिरकर ₹2,561 के इंट्राडे लो तक पहुंच गया। इससे पहले बुधवार को कंपनी का शेयर ₹2,736.20 पर बंद हुआ था।
हालांकि शुरुआती गिरावट के बाद शेयर में कुछ रिकवरी देखने को मिली और यह लगभग ₹2,589.60 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया, लेकिन दिनभर निवेशकों का रुझान कमजोर बना रहा।
क्यों डगमगाया निवेशकों का भरोसा?
कंपनी ने 29 जुलाई को बाजार बंद होने के बाद अपनी अप्रैल-जून तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे जारी किए थे। पहली नजर में कंपनी के वित्तीय आंकड़े मजबूत दिखाई दिए, लेकिन निवेशकों का फोकस सीधे कंपनी के EBITDA मार्जिन पर गया।
विश्लेषकों के अनुसार, सोलर मॉड्यूल और अन्य कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण कंपनी की लागत तेजी से बढ़ी, जिससे ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव आया। यही वजह रही कि अच्छे राजस्व और मुनाफे के बावजूद बाजार ने नकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
इनपुट लागत में 63.5% की बड़ी बढ़ोतरी
कंपनी की कंसोलिडेटेड वित्तीय रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में इनपुट मटीरियल (Raw Material) की लागत बढ़कर ₹4,843.93 करोड़ हो गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹2,962.43 करोड़ थी।
यानी कंपनी की सामग्री लागत में 63.5% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई। लागत बढ़ने का सीधा असर कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन पर पड़ा।
शुद्ध लाभ में 14% की बढ़ोतरी
हालांकि लागत बढ़ने के बावजूद कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 14% बढ़कर ₹850 करोड़ पहुंच गया।
कंपनी ने बताया कि इस लाभ में अमेरिका में मिले एक महत्वपूर्ण कानूनी फैसले का भी योगदान रहा। US Supreme Court द्वारा ट्रंप प्रशासन के दौरान लगाए गए कुछ टैरिफ को गैर-कानूनी घोषित किए जाने के बाद कंपनी को IEEPA (International Emergency Economic Powers Act) के तहत वसूली गई रेसिप्रोकल ड्यूटी की वापसी से जुड़ी आय का लाभ मिला, जिसे तिमाही आय में शामिल किया गया।
79% बढ़ा कंपनी का रेवेन्यू
वारी एनर्जीज का कुल ऑपरेशंस से राजस्व (Revenue from Operations) सालाना आधार पर 79% बढ़कर ₹7,932 करोड़ पहुंच गया।
इसके पीछे कंपनी के सोलर कारोबार की मजबूत मांग रही।
- Solar PV बिजनेस से राजस्व: 91% की बढ़ोतरी
- EPC कॉन्ट्रैक्ट रेवेन्यू: 55% की बढ़ोतरी
- बिजली उत्पादन से आय: 9% की गिरावट
कंपनी का कहना है कि सोलर मॉड्यूल और EPC प्रोजेक्ट्स की मजबूत मांग से कारोबार में तेजी बनी हुई है, हालांकि लागत का दबाव निकट भविष्य में चुनौती बना रह सकता है।
आगे निवेशकों की नजर किन बातों पर रहेगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाली तिमाहियों में निवेशक खासतौर पर इन बिंदुओं पर नजर रखेंगे—
- EBITDA मार्जिन में सुधार होता है या नहीं।
- कच्चे माल की लागत में कमी आती है या नहीं।
- अमेरिका और अन्य निर्यात बाजारों से ऑर्डर फ्लो कैसा रहता है।
- कंपनी की लाभप्रदता (Profitability) में स्थायी सुधार देखने को मिलता है या नहीं।
यदि कंपनी लागत नियंत्रण में सफल रहती है, तो मजबूत ऑर्डर बुक और बढ़ती सोलर मांग भविष्य में शेयर के लिए सकारात्मक साबित हो सकती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें दी गई जानकारी निवेश सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


