नई दिल्ली: भारत में रेयर अर्थ मिनरल्स (Rare Earth Minerals) के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा सकता है। कनाडा की क्लाइमेट टेक्नोलॉजी कंपनी Enervoxa भारत में एल्युमीनियम उत्पादन से निकलने वाले वेस्ट ‘रेड मड’ (Red Mud) से रेयर अर्थ एलिमेंट्स निकालने के लिए प्रोसेसिंग प्लांट लगाने की योजना बना रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए कंपनी वेदांता (Vedanta), हिंडाल्को इंडस्ट्रीज (Hindalco Industries) और सरकारी कंपनी नालको (NALCO) के साथ साझेदारी पर चर्चा कर सकती है।
करीब 250 से 350 मिलियन डॉलर (लगभग ₹2,100 करोड़ से ₹3,000 करोड़) की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना भारत को रेयर अर्थ मिनरल्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ चीन के वैश्विक दबदबे को चुनौती देने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।
वेदांता समेत तीन कंपनियों से होगी बातचीत
Enervoxa के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) वंदित वर्मा के अनुसार कंपनी भारत के प्रमुख एल्युमीनियम उत्पादकों के साथ रणनीतिक साझेदारी की संभावनाएं तलाश रही है। इसमें वेदांता, हिंडाल्को और नालको प्रमुख कंपनियां हैं।
उन्होंने बताया कि कंपनी कमर्शियल स्तर के प्लांट के लिए स्ट्रैटेजिक इक्विटी और प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग के जरिए फंड जुटाने की योजना बना रही है। फिलहाल पूर्वी भारत में प्लांट लगाने के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान की जा रही है।
क्या होता है रेड मड?
रेड मड (Red Mud) एल्युमीनियम उत्पादन के दौरान निकलने वाला एक औद्योगिक अवशेष (By-product) है। अब तक इसे बड़े पैमाने पर वेस्ट माना जाता था, लेकिन नई तकनीक की मदद से इसमें मौजूद रेयर अर्थ एलिमेंट्स और अन्य मूल्यवान खनिज निकाले जा सकते हैं।
Enervoxa का दावा है कि उसने रेड मड से रेयर अर्थ निकालने की तकनीक विकसित करने में लगभग 8 साल का शोध और विकास (R&D) किया है।
रेयर अर्थ मिनरल्स क्यों हैं इतने महत्वपूर्ण?
रेयर अर्थ एलिमेंट्स आधुनिक टेक्नोलॉजी और रक्षा क्षेत्र के लिए बेहद अहम माने जाते हैं। इनका उपयोग कई हाई-टेक उत्पादों में किया जाता है, जैसे—
- इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मोटर्स
- स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस
- विंड टर्बाइन
- सेमीकंडक्टर उद्योग
- मिसाइल और रक्षा उपकरण
- एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी
इन मिनरल्स की वैश्विक सप्लाई चेन में फिलहाल चीन का दबदबा है। ऐसे में भारत में इनका उत्पादन बढ़ने से देश की रणनीतिक और औद्योगिक क्षमता मजबूत हो सकती है।
भारत के पास है बड़ा अवसर
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एल्युमीनियम उत्पादक और तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। देश में बॉक्साइट और रेड मड का विशाल भंडार उपलब्ध है, लेकिन अब तक इन्हें उच्च गुणवत्ता वाले रेयर अर्थ उत्पादों में बदलने के लिए पर्याप्त औद्योगिक सुविधाएं नहीं थीं।
यदि यह परियोजना सफल रहती है तो भारत अपने घरेलू संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकेगा और रेयर अर्थ आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
बनेगी इंटीग्रेटेड वैल्यू चेन
Enervoxa केवल रेयर अर्थ एलिमेंट्स तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी रेड मड से निकलने वाले अन्य उपयोगी उत्पादों के लिए भी एक इंटीग्रेटेड वैल्यू चेन विकसित करने की योजना बना रही है।
इन उत्पादों में शामिल हैं—
- आयरन ऑक्साइड
- टाइटेनियम आधारित मटेरियल
- इंडस्ट्रियल पिगमेंट्स
- कोगुलेंट्स
- अन्य महत्वपूर्ण खनिज
इसके लिए कंपनी इंजीनियरिंग कंपनियों, स्टील निर्माताओं और मिनरल प्रोसेसिंग कंपनियों के साथ भी सहयोग तलाशेगी।
सरकार से भी मांगी जाएगी मदद
Enervoxa इस परियोजना के लिए भारत सरकार के सहयोग की भी उम्मीद कर रही है। सरकार पहले ही जवाहरलाल नेहरू एल्युमीनियम रिसर्च डेवलपमेंट एंड डिजाइन सेंटर (JNARDDC) और नीति आयोग (NITI Aayog) के माध्यम से रेड मड से धातु और रेयर अर्थ एलिमेंट्स निकालने पर रिसर्च को बढ़ावा दे रही है।
ऐसे में निजी कंपनियों और सरकारी संस्थानों के बीच सहयोग इस क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल सकता है।
भारत में होगी पूरी प्रोसेसिंग या बनेगा कॉन्संट्रेट?
वंदित वर्मा के मुताबिक कंपनी दो मॉडल पर विचार कर रही है। पहला, रेड मड की पूरी प्रोसेसिंग भारत में ही की जाए। दूसरा, भारत में रेयर अर्थ कॉन्संट्रेट तैयार कर उसे आगे विशेष रिफाइनिंग सुविधाओं में भेजा जाए।
फिलहाल कंपनी भारत के अलावा नॉर्थ अमेरिका, साउथ-ईस्ट एशिया और अन्य एल्युमिना उत्पादक देशों में भी व्यावसायिक अवसरों का मूल्यांकन कर रही है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह परियोजना?
अगर यह परियोजना सफल होती है तो इसके कई बड़े फायदे हो सकते हैं—
- रेयर अर्थ मिनरल्स के घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी।
- चीन पर निर्भरता कम करने में मदद।
- एल्युमीनियम उद्योग के वेस्ट का बेहतर उपयोग।
- नई माइनिंग और प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी को बढ़ावा।
- रोजगार और निवेश के नए अवसर।
- EV, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र की सप्लाई चेन को मजबूती।


