SEBI PMS New Rules Proposal: भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इन बदलावों का मकसद तेजी से बढ़ रही PMS इंडस्ट्री को अधिक लचीला, आधुनिक और निवेशकों के लिए आकर्षक बनाना है। नए प्रस्ताव लागू होने के बाद पोर्टफोलियो मैनेजर्स को निवेश के ज्यादा विकल्प मिलेंगे, जिसमें विदेशी शेयरों और अन्य अंतरराष्ट्रीय सिक्योरिटीज में निवेश भी शामिल होगा। इसके अलावा न्यूनतम निवेश राशि घटाने और नई MF-PMS कैटेगरी शुरू करने का भी प्रस्ताव दिया गया है।
Highlights
- सेबी ने PMS नियमों में बदलाव के लिए कंसल्टेशन पेपर जारी किया।
- सुझाव और आपत्तियां भेजने की अंतिम तारीख 13 अगस्त तय की गई है।
- पोर्टफोलियो मैनेजर्स को विदेशी सिक्योरिटीज में निवेश की अनुमति मिल सकती है।
- न्यूनतम निवेश सीमा 50 लाख रुपये से घटाकर 25 लाख रुपये करने का प्रस्ताव।
- PMS इंडस्ट्री का AUM बढ़कर 42.61 लाख करोड़ रुपये पहुंचा।
क्यों बदल रहा है PMS का रेगुलेटरी फ्रेमवर्क?
सेबी का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) सेक्टर में जबरदस्त वृद्धि हुई है। निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और बदलते निवेश माहौल को देखते हुए मौजूदा नियमों की समीक्षा जरूरी हो गई है।
इसी उद्देश्य से सेबी ने Portfolio Managers Regulations, 2020 में संशोधन के लिए कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। बाजार के प्रतिभागी और आम लोग 13 अगस्त तक अपने सुझाव दे सकते हैं।
तेजी से बढ़ा PMS इंडस्ट्री का आकार
सेबी के आंकड़ों के अनुसार, PMS इंडस्ट्री ने पिछले सात वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है।
- 31 मई 2026 तक AUM: 42.61 लाख करोड़ रुपये
- अप्रैल 2019 में AUM: 18.07 लाख करोड़ रुपये
- 2020 में पोर्टफोलियो मैनेजर्स: 226
- अब पोर्टफोलियो मैनेजर्स: 515
- कुल PMS क्लाइंट्स: 2.19 लाख
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि हाई नेटवर्थ निवेशकों के बीच PMS की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है।
निवेश के विकल्प होंगे और व्यापक
सेबी ने प्रस्ताव दिया है कि पोर्टफोलियो मैनेजर्स को केवल मौजूदा निवेश विकल्पों तक सीमित न रखकर उन्हें लिस्ट होने वाली (To Be Listed) सिक्योरिटीज में भी निवेश की अनुमति दी जाए।
इससे फंड मैनेजर्स निवेशकों के लिए बेहतर अवसरों का लाभ उठा सकेंगे और पोर्टफोलियो में अधिक विविधता ला पाएंगे।
विदेशी शेयरों और सिक्योरिटीज में भी कर सकेंगे निवेश
नए प्रस्ताव के तहत PMS फंड मैनेजर्स को विदेशी बाजारों में निवेश की अनुमति देने का सुझाव दिया गया है।
इन निवेश विकल्पों में शामिल होंगे—
- विदेशी स्टॉक एक्सचेंजों में सूचीबद्ध शेयर
- विदेशी लिस्टेड डेट सिक्योरिटीज
- ओवरसीज म्यूचुअल फंड्स
- अन्य पात्र विदेशी सिक्योरिटीज
हालांकि, यह निवेश FEMA (Foreign Exchange Management Act) के नियमों के तहत ही किया जाएगा।
विदेश में निवेश से पहले क्लाइंट की सहमति होगी जरूरी
सेबी ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई पोर्टफोलियो मैनेजर विदेशी सिक्योरिटीज में निवेश करना चाहता है, तो उसे पहले संबंधित निवेशक की स्पष्ट सहमति लेनी होगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य निवेशकों की पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
अनलिस्टेड डेट सिक्योरिटीज में भी मिलेगा निवेश का अवसर
प्रस्ताव के अनुसार, पोर्टफोलियो मैनेजर्स अपने क्लाइंट्स की कुल संपत्ति का अधिकतम 10% हिस्सा Investment Grade Unlisted Debt Securities में निवेश कर सकेंगे।
इससे निवेश पोर्टफोलियो को अधिक विविध बनाने में मदद मिलेगी।
MF-PMS नाम से नई कैटेगरी शुरू करने का प्रस्ताव
सेबी ने Mutual Fund Only PMS (MF-PMS) नाम से नई श्रेणी शुरू करने का भी प्रस्ताव रखा है।
इस कैटेगरी में फंड मैनेजर्स को केवल निम्न निवेश साधनों में निवेश की अनुमति होगी—
- म्यूचुअल फंड
- एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF)
- स्पेशलाइज्ड इनवेस्टमेंट फंड (SIF)
इसका उद्देश्य उन निवेशकों को प्रोफेशनल पोर्टफोलियो मैनेजमेंट उपलब्ध कराना है जो सीधे शेयरों में निवेश नहीं करना चाहते।
न्यूनतम निवेश सीमा घट सकती है
वर्तमान में PMS में निवेश के लिए न्यूनतम 50 लाख रुपये का निवेश आवश्यक है।
सेबी ने MF-PMS कैटेगरी के लिए इस सीमा को घटाकर 25 लाख रुपये करने का प्रस्ताव रखा है।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो अधिक निवेशकों के लिए प्रोफेशनल पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सेवाओं तक पहुंच आसान हो जाएगी।
म्यूचुअल फंड और PMS के बीच कम होगा अंतर
सेबी का मानना है कि प्रस्तावित बदलाव लागू होने के बाद PMS और म्यूचुअल फंड के निवेश विकल्पों के बीच का अंतर काफी हद तक कम हो जाएगा।
इससे निवेशकों को अधिक लचीलापन, बेहतर विविधीकरण और वैश्विक निवेश अवसरों तक पहुंच मिल सकती है।
निवेशकों के लिए क्या होंगे फायदे?
यदि सेबी के ये प्रस्ताव लागू होते हैं, तो निवेशकों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिल सकते हैं—
- विदेशी बाजारों में निवेश का अवसर
- पोर्टफोलियो में बेहतर विविधीकरण
- प्रोफेशनल फंड मैनेजमेंट की व्यापक सुविधा
- MF-PMS के जरिए कम न्यूनतम निवेश पर प्रवेश
- निवेश के अधिक विकल्प और बेहतर जोखिम प्रबंधन
निष्कर्ष
सेबी का यह प्रस्ताव भारतीय PMS इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा सुधार माना जा रहा है। विदेशी निवेश की अनुमति, नई MF-PMS कैटेगरी, निवेश विकल्पों का विस्तार और न्यूनतम निवेश सीमा घटाने जैसे कदम इस सेक्टर को अधिक प्रतिस्पर्धी और निवेशक-अनुकूल बना सकते हैं। फिलहाल यह प्रस्ताव कंसल्टेशन स्टेज में है और 13 अगस्त तक सुझाव मांगे गए हैं। अंतिम नियम लागू होने के बाद ही इन बदलावों का वास्तविक प्रभाव देखने को मिलेगा।


