भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) लगातार तीसरे सप्ताह बढ़ा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 17 जुलाई 2026 को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 1.08 अरब डॉलर बढ़कर 676.24 अरब डॉलर हो गया। इससे पहले वाले सप्ताह में भी विदेशी मुद्रा भंडार में 96.4 करोड़ डॉलर (0.964 अरब डॉलर) की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।
हाल के महीनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में विदेशी मुद्रा की बचत, आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की बात कह चुके हैं। लगातार बढ़ता विदेशी मुद्रा भंडार भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत माना जा रहा है।
लगातार तीसरे सप्ताह दर्ज हुई बढ़ोतरी
आरबीआई के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 17 जुलाई को समाप्त सप्ताह में भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 676.24 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इससे पहले यह 675.16 अरब डॉलर था। लगातार तीन सप्ताह तक हुई इस वृद्धि से यह संकेत मिलता है कि देश की बाहरी वित्तीय स्थिति पहले के मुकाबले अधिक मजबूत हो रही है।
हालांकि, यह भंडार अभी भी रिकॉर्ड स्तर 728.49 अरब डॉलर से नीचे है, जो 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में दर्ज किया गया था।
रिकॉर्ड स्तर से क्यों घटा था विदेशी मुद्रा भंडार?
इस साल फरवरी के अंत में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर 728.49 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। लेकिन इसके बाद पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के कारण रुपये पर दबाव बढ़ गया।
रुपये में अत्यधिक गिरावट रोकने के लिए आरबीआई को विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करते हुए डॉलर की बिक्री करनी पड़ी। इसी वजह से कई सप्ताह तक विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट देखने को मिली। अब एक बार फिर लगातार बढ़ोतरी से यह संकेत मिल रहा है कि स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है।
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (FCA) में बड़ा इजाफा
विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा Foreign Currency Assets (FCA) होता है।
17 जुलाई को समाप्त सप्ताह में:
- विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 4.55 अरब डॉलर बढ़कर 551.06 अरब डॉलर हो गईं।
- एफसीए में डॉलर के अलावा यूरो, ब्रिटिश पाउंड, जापानी येन जैसी प्रमुख विदेशी मुद्राएं भी शामिल होती हैं।
- इन मुद्राओं की विनिमय दरों में बदलाव का असर भी एफसीए के मूल्य पर पड़ता है।
यही कारण है कि कई बार डॉलर मजबूत या कमजोर होने से भी विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों के मूल्य में बदलाव दिखाई देता है।
गोल्ड रिजर्व में आई बड़ी गिरावट
जहां विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में बढ़ोतरी हुई, वहीं भारत के स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) के मूल्य में गिरावट दर्ज की गई।
आरबीआई के अनुसार:
- स्वर्ण भंडार का मूल्य 3.48 अरब डॉलर घटकर 101.75 अरब डॉलर रह गया।
- यह गिरावट मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैल्यूएशन परिवर्तन के कारण मानी जा रही है।
हालांकि, भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में गोल्ड रिजर्व अभी भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।
SDR में हुई बढ़ोतरी
समीक्षाधीन सप्ताह में भारत के Special Drawing Rights (SDR) में भी हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
- एसडीआर 4.4 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.67 अरब डॉलर हो गया।
एसडीआर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा सदस्य देशों को उपलब्ध कराया जाने वाला एक अंतरराष्ट्रीय रिजर्व एसेट है, जिसका उपयोग वैश्विक वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में किया जाता है।
IMF में भारत का रिजर्व पोजिशन घटा
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार,
- आईएमएफ (IMF) में भारत की रिजर्व पोजिशन 3.2 करोड़ डॉलर घटकर 4.76 अरब डॉलर रह गई।
यह बदलाव सामान्य वित्तीय समायोजन और अंतरराष्ट्रीय रिजर्व प्रबंधन का हिस्सा माना जाता है।
विदेशी मुद्रा भंडार क्यों होता है महत्वपूर्ण?
विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक मजबूती का अहम पैमाना माना जाता है। इसके प्रमुख लाभ हैं:
- आयात भुगतान करने की क्षमता मजबूत रहती है।
- रुपये की विनिमय दर को स्थिर रखने में मदद मिलती है।
- वैश्विक आर्थिक संकट के समय सुरक्षा कवच का काम करता है।
- विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ता है।
- अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में देश की साख मजबूत होती है।
भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार ऊर्जा, कच्चे तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं के आयात को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
आगे क्या संकेत मिल रहे हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विदेशी निवेश का प्रवाह मजबूत बना रहता है, निर्यात में सुधार जारी रहता है और वैश्विक बाजारों में स्थिरता बनी रहती है, तो आने वाले महीनों में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार फिर से नए उच्च स्तर की ओर बढ़ सकता है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर इंडेक्स और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर भी इसकी दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।
नोट: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न मंचों से विदेशी मुद्रा बचाने, आयात पर निर्भरता कम करने और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने की अपील की है। हालांकि, विदेशी मुद्रा भंडार में हुई यह वृद्धि सीधे तौर पर उनकी अपील का परिणाम है, ऐसा आधिकारिक रूप से नहीं कहा गया है।


