Harsh Goenka on India Per Capita Income: आरपीजी ग्रुप के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने भारत की प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि 2026 में श्रीलंका, वियतनाम और फिलीपींस जैसे एशियाई देश अपर-मिडल-इनकम कैटेगरी में पहुंच गए हैं, जबकि भारत अभी भी इस लक्ष्य से काफी पीछे है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भारत की मजबूत युवा आबादी, तेज आर्थिक विकास और सुधारों के कारण भविष्य को लेकर वे आशावादी हैं।
भारत की प्रति व्यक्ति आय पर हर्ष गोयनका की चिंता
In 2026, 4 Asian nations achieved upper-middle-income status, including Sri Lanka,Vietnam & Philippines, while India didn’t, by a wide margin. Sad 😞!
Yet I’m optimistic because:
1. World’s largest young workforce
2. Fastest-growing major economy
3. Manufacturing and… pic.twitter.com/8ZM0O4YCtk
— Harsh Goenka (@hvgoenka) July 16, 2026 दिग्गज उद्योगपति और आरपीजी ग्रुप के चेयरमैन हर्ष गोयनका सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अक्सर आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय साझा करते रहते हैं। अपने हालिया पोस्ट में उन्होंने भारत की प्रति व्यक्ति आय की तुलना एशिया के अन्य देशों से करते हुए चिंता व्यक्त की।
गोयनका ने लिखा कि 2026 में श्रीलंका, वियतनाम और फिलीपींस समेत चार एशियाई देशों ने अपर-मिडल-इनकम का दर्जा हासिल कर लिया, जबकि भारत अभी भी इस श्रेणी से काफी दूर है। उन्होंने इसे “दुख की बात” बताया।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत के भविष्य को लेकर उनकी उम्मीदें बरकरार हैं।
भारत को लेकर क्यों हैं आशावादी?
हर्ष गोयनका का मानना है कि भारत के पास कई ऐसी ताकतें हैं जो आने वाले वर्षों में देश को तेजी से आगे बढ़ा सकती हैं। उन्होंने भारत की कई सकारात्मक खूबियों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि भारत के पास:
- दुनिया की सबसे बड़ी युवा वर्कफोर्स है।
- दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है।
- मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर लगातार मजबूत हो रहा है।
- इंफ्रास्ट्रक्चर में रिकॉर्ड निवेश हो रहा है।
- डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर दुनिया के लिए उदाहरण बन चुका है।
- स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है।
- आर्थिक सुधार (Structural Reforms) जारी हैं।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राजनीतिक स्थिरता और नीतियों में निरंतरता देखने को मिल रही है।
गोयनका का कहना है कि यही कारण हैं जिनकी वजह से भारत आने वाले समय में बड़ी आर्थिक छलांग लगा सकता है।
श्रीलंका ने कैसे की वापसी?
हाल ही में विश्व बैंक (World Bank) ने श्रीलंका को दोबारा अपर-मिडल-इनकम कैटेगरी में शामिल किया है।
दिलचस्प बात यह है कि:
- वर्ष 2019 में श्रीलंका पहली बार इस श्रेणी में पहुंचा था।
- लेकिन आर्थिक संकट और डिफॉल्ट जैसी परिस्थितियों के कारण 2022 में उसे इस श्रेणी से बाहर कर दिया गया।
- इसके बाद आर्थिक सुधारों और स्थिरता के चलते 2025 में श्रीलंका की अर्थव्यवस्था लगभग 5% की दर से बढ़ी, जिसके आधार पर उसे फिर से अपर-मिडल-इनकम देशों की सूची में शामिल किया गया।
यह वापसी श्रीलंका के लिए एक बड़ी आर्थिक उपलब्धि मानी जा रही है।
वर्ल्ड बैंक कैसे तय करता है देशों की आय श्रेणी?
विश्व बैंक हर वर्ष देशों को उनकी प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (Gross National Income – GNI per capita) के आधार पर चार वर्गों में बांटता है।
इन श्रेणियों में शामिल हैं:
- हाई इनकम
- अपर-मिडल इनकम
- लोअर-मिडल इनकम
- लो इनकम
यह वर्गीकरण पिछले कैलेंडर वर्ष की प्रति व्यक्ति GNI के अनुमान के आधार पर किया जाता है। इस बार की रिपोर्ट में 218 देशों को शामिल किया गया है और यह वर्गीकरण अगले वर्ष तक वैश्विक संदर्भ के रूप में इस्तेमाल होगा।
भारत बनाम श्रीलंका, वियतनाम और फिलीपींस
प्रति व्यक्ति आय के मामले में भारत अभी भी कई एशियाई देशों से पीछे है।
| देश | अनुमानित प्रति व्यक्ति आय (डॉलर) |
|---|---|
| श्रीलंका | लगभग 5,000 डॉलर |
| वियतनाम | लगभग 5,115 डॉलर |
| फिलीपींस | लगभग 4,443 डॉलर |
| भारत | लगभग 2,813 डॉलर |
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत को अपर-मिडल-इनकम श्रेणी तक पहुंचने के लिए अभी लंबा सफर तय करना होगा।
भारत के सामने क्या है सबसे बड़ी चुनौती?
भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, लेकिन बड़ी आबादी के कारण प्रति व्यक्ति आय बढ़ाना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रोजगार सृजन, उत्पादकता, विनिर्माण और निर्यात में लगातार सुधार होता रहा तो आने वाले वर्षों में भारत भी अपर-मिडल-इनकम देशों की श्रेणी में पहुंच सकता है।
निष्कर्ष
हर्ष गोयनका की टिप्पणी भारत की आर्थिक क्षमता पर सवाल नहीं, बल्कि प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने की चुनौती की ओर ध्यान दिलाती है। श्रीलंका, वियतनाम और फिलीपींस जैसे देशों की प्रगति यह दिखाती है कि सही आर्थिक नीतियों और सुधारों से तेज़ बदलाव संभव है। वहीं भारत के पास विशाल युवा आबादी, मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, बढ़ता मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और स्थिर नीतिगत माहौल जैसी खूबियां हैं, जो भविष्य में देश को उच्च आय वाले देशों की दिशा में आगे बढ़ा सकती हैं।


