नई दिल्ली: भारत में छोटे कारोबार (Small Business) करने वालों की वित्तीय जरूरतें तेजी से बढ़ रही हैं और इसके साथ ही बिजनेस लोन की मांग में भी उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का स्मॉल बिजनेस क्रेडिट पोर्टफोलियो 13.4 फीसदी की सालाना वृद्धि के साथ 49.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि एमएसएमई (MSME) सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था में पहले से अधिक मजबूत भूमिका निभा रहा है।
क्रेडिट ब्यूरो CRIF High Mark और SIDBI की संयुक्त ‘CRIF-SIDBI Small Business Spotlight Report’ के चौथे संस्करण में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, छोटे व्यापारियों के बीच औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से लोन लेने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि देश में अकेले व्यवसाय (Sole Proprietorship) चलाने वाले उद्यमियों ने इस वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान दिया है।
हाईलाइट्स
- स्मॉल बिजनेस लोन पोर्टफोलियो बढ़कर 49.2 लाख करोड़ रुपये पहुंचा।
- वित्त वर्ष 2026 में 13.4% की सालाना वृद्धि दर्ज।
- सक्रिय (Active) बिजनेस लोन खातों की संख्या बढ़कर 7.5 करोड़ हुई।
- अकेले कारोबार करने वाले उद्यमियों की हिस्सेदारी पोर्टफोलियो में 80%।
- Loan Against Property (LAP) सबसे बड़ा बिजनेस लोन प्रोडक्ट बना।
- उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश ने सबसे तेज ग्रोथ दर्ज की।
अकेले कारोबार करने वाले उद्यमी बने ग्रोथ की सबसे बड़ी वजह
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में एक व्यक्ति द्वारा संचालित छोटे व्यवसाय (Sole Proprietorship Businesses) स्मॉल बिजनेस क्रेडिट मार्केट की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं।
- कुल बिजनेस लोन पोर्टफोलियो में इनकी हिस्सेदारी लगभग 80 फीसदी है।
- सक्रिय लोन खातों (Active Loans) में इनकी हिस्सेदारी 87 फीसदी से अधिक दर्ज की गई है।
इससे साफ है कि स्वरोजगार और छोटे व्यापार करने वाले लोग अब औपचारिक बैंकिंग चैनलों से वित्त जुटाने में पहले की तुलना में अधिक भरोसा दिखा रहे हैं।
7.5 करोड़ सक्रिय लोन खाते, रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा क्रेडिट
मार्च 2026 तक देश में छोटे कारोबारियों के सक्रिय लोन खातों की संख्या 7.5 करोड़ तक पहुंच गई। यह दर्शाता है कि बैंक, एनबीएफसी और अन्य वित्तीय संस्थान अब एमएसएमई सेक्टर को पहले से कहीं अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की विभिन्न एमएसएमई योजनाएं, डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म और आसान ऋण प्रक्रिया ने भी इस वृद्धि को गति दी है।
Loan Against Property सबसे लोकप्रिय विकल्प
रिपोर्ट के मुताबिक, छोटे कारोबारियों के बीच Loan Against Property (LAP) सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला वित्तीय उत्पाद बना हुआ है।
मार्च 2026 तक कुल स्मॉल बिजनेस क्रेडिट पोर्टफोलियो में विभिन्न प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी इस प्रकार रही—
| लोन प्रोडक्ट | हिस्सेदारी |
|---|---|
| Loan Against Property (LAP) | 27.1% |
| बिजनेस लोन | 24.8% |
| वर्किंग कैपिटल प्रोडक्ट | 22.8% |
मार्च 2025 में LAP की हिस्सेदारी 25.5 फीसदी थी, जो एक साल में बढ़कर 27.1 फीसदी हो गई। इससे स्पष्ट है कि संपत्ति के बदले सुरक्षित ऋण (Secured Lending) की मांग लगातार बढ़ रही है।
किन राज्यों में सबसे ज्यादा बढ़ा बिजनेस लोन?
देशभर में छोटे बिजनेस लोन का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा राज्यों में केंद्रित है।
रिपोर्ट के मुताबिक—
- देश के टॉप 10 राज्यों की कुल हिस्सेदारी 72 फीसदी रही।
- उत्तर प्रदेश ने 18.5% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की।
- आंध्र प्रदेश में 16.5% की सालाना ग्रोथ रही।
- तमिलनाडु मजबूत और परिपक्व स्मॉल बिजनेस क्रेडिट मार्केट के रूप में उभरा।
तमिलनाडु में छोटे कारोबारियों का कुल लोन पोर्टफोलियो 11.6 फीसदी बढ़कर 4.6 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। साथ ही राज्य में एसेट क्वालिटी में भी सुधार दर्ज किया गया है, जो बेहतर ऋण पुनर्भुगतान क्षमता का संकेत देता है।
MSME सेक्टर को मिलेगा और बल
विशेषज्ञों का मानना है कि देश में डिजिटल बैंकिंग, ऑनलाइन लोन अप्रूवल, सरकारी गारंटी योजनाओं और बढ़ते उद्यमिता माहौल के कारण आने वाले वर्षों में स्मॉल बिजनेस क्रेडिट मार्केट और तेजी से बढ़ सकता है।
यदि यह रफ्तार बनी रहती है तो भारत का एमएसएमई सेक्टर रोजगार सृजन, निर्यात और आर्थिक विकास में पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
निष्कर्ष
स्मॉल बिजनेस लोन पोर्टफोलियो का लगभग 50 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। खासतौर पर अकेले व्यवसाय करने वाले उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी यह दर्शाती है कि देश में स्वरोजगार और छोटे कारोबार को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से लगातार मजबूती मिल रही है। आने वाले समय में आसान ऋण उपलब्धता और सरकारी समर्थन से यह क्षेत्र और तेज गति से आगे बढ़ सकता है।


