Unlisted Shares Investment: आईपीओ से पहले अनलिस्टेड शेयर खरीदकर मोटा मुनाफा कमाने का सपना हर बार सच नहीं होता। हाल के कई बड़े IPO ने यह साबित कर दिया है कि अनलिस्टेड मार्केट में ऊंचे दाम पर निवेश करना निवेशकों के लिए महंगा सौदा बन सकता है। कई चर्चित कंपनियों के IPO अपने अनलिस्टेड मार्केट प्राइस से 30% से 50% तक डिस्काउंट पर आए, जिससे पहले से निवेश करने वालों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
IPO से पहले अनलिस्टेड शेयर खरीदना क्यों पड़ सकता है महंगा?
पिछले कुछ वर्षों में अनलिस्टेड शेयरों में निवेश का चलन तेजी से बढ़ा है। कई निवेशक यह सोचकर प्री-IPO शेयर खरीद लेते हैं कि कंपनी के शेयर बाजार में लिस्ट होते ही उन्हें बड़ा मुनाफा मिलेगा। लेकिन हालिया आंकड़े बताते हैं कि यह रणनीति हर बार सफल नहीं होती।
असलियत यह है कि कई लोकप्रिय कंपनियों के IPO उनके अनलिस्टेड मार्केट में चल रहे भाव से काफी कम कीमत पर लॉन्च हुए। इससे उन निवेशकों को बड़ा झटका लगा जिन्होंने ऊंचे दाम पर अनलिस्टेड शेयर खरीदे थे।
SBI Funds IPO ने तोड़ दी निवेशकों की उम्मीदें
हालिया उदाहरण SBI Funds Management का है।
- जून 2026 में अनलिस्टेड मार्केट में शेयर का भाव करीब 850 रुपये तक पहुंच गया था।
- लेकिन IPO का ऑफर प्राइस केवल 574 रुपये प्रति शेयर तय हुआ।
- यानी IPO अपने अनलिस्टेड भाव से करीब 32% डिस्काउंट पर आया।
जिन निवेशकों ने यह सोचकर ऊंचे दाम पर शेयर खरीदे थे कि IPO और महंगा आएगा, उन्हें बड़ा नुकसान झेलना पड़ा।
सेबी भी लगातार कर रही है सतर्क
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) भी समय-समय पर निवेशकों को अनलिस्टेड शेयरों में निवेश को लेकर सतर्क रहने की सलाह देता रहा है।
सबसे बड़ी समस्या है लिक्विडिटी
अनलिस्टेड मार्केट में खरीदार और विक्रेता बेहद सीमित होते हैं। ऐसे में किसी शेयर की वास्तविक कीमत का पता लगाना आसान नहीं होता।
अधिकांश वेबसाइट केवल Indicative Price दिखाती हैं। इसका मतलब यह नहीं कि उसी कीमत पर वास्तविक सौदा हो रहा हो। इसलिए निवेशक कई बार वास्तविक मूल्य से कहीं अधिक कीमत पर शेयर खरीद लेते हैं।
प्राइस डिस्कवरी भी रहती है बड़ी चुनौती
लिस्टेड शेयरों में हर सेकंड खरीद-बिक्री होती रहती है, जिससे बाजार भाव पारदर्शी रहता है।
लेकिन अनलिस्टेड मार्केट में—
- ट्रेडिंग बहुत सीमित होती है।
- वास्तविक लेनदेन की जानकारी सार्वजनिक नहीं होती।
- अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग कीमत दिखाई देती है।
- निवेशक सही वैल्यू का अनुमान नहीं लगा पाते।
यही कारण है कि इस बाजार में प्राइस डिस्कवरी की प्रक्रिया कमजोर मानी जाती है।
केवल SBI Funds ही नहीं, कई बड़े IPO रहे डिस्काउंट पर
पिछले कुछ वर्षों में कई चर्चित कंपनियों के IPO अनलिस्टेड मार्केट के मुकाबले भारी डिस्काउंट पर आए।
| कंपनी | अनलिस्टेड प्राइस | IPO प्राइस | अनुमानित डिस्काउंट |
|---|---|---|---|
| SBI Funds Management | ₹850 | ₹574 | 32% |
| HDB Financial | ₹1,200-1,250 | ₹700-740 | करीब 40% |
| Policybazaar (PB Fintech) | ₹1,800 | ₹940-980 | करीब 45% |
| Tata Technologies | ₹950 | ₹475-500 | करीब 47% |
| UTI AMC | ₹1,100 | ₹552-554 | लगभग 50% |
| Delhivery | काफी ऊंचा | IPO प्राइस काफी कम | करीब 50% |
| Waaree Energies | ₹2,700-2,750 | ₹1,427-1,503 | करीब 45% |
AGS Transact का मामला भी बना सबक
AGS Transact के शेयर जनवरी 2022 में अनलिस्टेड मार्केट में लगभग 550 रुपये तक पहुंच गए थे।
लेकिन कंपनी का IPO केवल 185-195 रुपये प्रति शेयर के दायरे में आया। इससे स्पष्ट हो गया कि केवल अनलिस्टेड मार्केट की कीमत देखकर निवेश करना कितना जोखिम भरा हो सकता है।
निवेशक आखिर कहां करते हैं गलती?
कई निवेशक यह मान लेते हैं कि—
- IPO आने वाला है।
- कंपनी का नाम बड़ा है।
- अनलिस्टेड शेयर लगातार महंगे हो रहे हैं।
- इसलिए अभी खरीद लेना चाहिए।
लेकिन IPO का मूल्यांकन कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, बाजार की स्थिति, निवेशकों की मांग और मर्चेंट बैंकरों की वैल्यूएशन प्रक्रिया के आधार पर तय होता है, न कि केवल अनलिस्टेड मार्केट की कीमत के आधार पर।
अनलिस्टेड शेयर खरीदने से पहले रखें इन बातों का ध्यान
यदि आप अनलिस्टेड शेयरों में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो इन बातों को जरूर ध्यान में रखें—
- केवल बढ़ती कीमत देखकर निवेश न करें।
- कंपनी के वित्तीय नतीजों और बिजनेस मॉडल का विश्लेषण करें।
- लिक्विडिटी के जोखिम को समझें।
- यह मानकर निवेश न करें कि IPO हमेशा प्रीमियम पर आएगा।
- निवेश से पहले विश्वसनीय वित्तीय सलाहकार की राय लें।
निष्कर्ष
अनलिस्टेड शेयरों में निवेश आकर्षक जरूर दिख सकता है, लेकिन इसमें जोखिम भी उतना ही बड़ा होता है। हाल के SBI Funds, HDB Financial, Tata Technologies, PB Fintech, UTI AMC और Waaree Energies जैसे उदाहरण बताते हैं कि केवल IPO से पहले मुनाफे की उम्मीद में निवेश करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।
यदि आप इस बाजार में निवेश करना चाहते हैं तो केवल प्रचार, हाइप या अनलिस्टेड प्राइस के आधार पर फैसला लेने के बजाय कंपनी की वास्तविक वैल्यू, बिजनेस क्षमता और जोखिम का पूरा आकलन करना अधिक समझदारी होगी।


