Foreign Investors Investment in India: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने लंबे समय तक बिकवाली करने के बाद जुलाई में भारतीय शेयर बाजार का रुख फिर से किया है। जुलाई के पहले 10 कारोबारी दिनों में एफपीआई ने भारतीय बाजार में करीब ₹24,662 करोड़ का निवेश किया है। इससे बाजार में विदेशी पूंजी की वापसी के संकेत मिल रहे हैं।
भारतीय बाजार में लौटी विदेशी पूंजी
भारतीय शेयर बाजार के लिए जुलाई महीना अब तक सकारात्मक संकेत लेकर आया है। महीनों तक लगातार बिकवाली करने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) अब दोबारा भारतीय इक्विटी बाजार में निवेश करते नजर आ रहे हैं।
जुलाई के पहले 10 दिनों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में 2.59 अरब डॉलर यानी करीब ₹24,662 करोड़ का शुद्ध निवेश किया है। यह बदलाव ऐसे समय आया है जब इससे पहले मार्च से मई के बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से भारी मात्रा में पैसा निकाला था।
मार्च से मई के दौरान एफपीआई ने भारतीय बाजारों से करीब 24 अरब डॉलर से ज्यादा की निकासी की थी। उस समय ऊंचे वैल्यूएशन, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और निवेशकों के बदलते रुख के कारण विदेशी फंड लगातार बिकवाली कर रहे थे।
सेमीकंडक्टर शेयरों में गिरावट से मिला मौका
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, हाल में सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में आई गिरावट ने विदेशी निवेशकों को दोबारा भारत में निवेश का अवसर दिया है।
ग्लोबल टेक सेक्टर में उतार-चढ़ाव और कुछ कंपनियों के शेयरों में करेक्शन के बाद विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार के कई हिस्सों में वैल्यूएशन आकर्षक दिखाई देने लगे हैं।
इसके अलावा रुपये में स्थिरता और भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती ने भी विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में भूमिका निभाई है।
जून में डेट मार्केट पसंद था, जुलाई में इक्विटी पर फोकस
विदेशी निवेशकों का रुख पिछले कुछ महीनों में तेजी से बदला है।
जून महीने में एफपीआई ने मुख्य रूप से भारतीय डेट मार्केट में निवेश किया था। इसकी वजह सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से विदेशी निवेशकों के लिए सॉवरेन बॉन्ड मार्केट तक पहुंच आसान बनाना और कुछ टैक्स संबंधी बाधाओं को कम करना था।
लेकिन जुलाई में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी शेयर बाजार में बढ़ी है।
जुलाई के पहले 10 दिनों में हुए कुल विदेशी निवेश में:
- इक्विटी में करीब 1.6 अरब डॉलर (61% से ज्यादा) निवेश आया।
- आसान निवेश मार्ग (सुलभ रूट) के जरिए करीब 697 मिलियन डॉलर निवेश हुआ।
- सामान्य सीमा के तहत डेट मार्केट में करीब 340 मिलियन डॉलर का निवेश हुआ।
यह दिखाता है कि विदेशी निवेशक अब केवल सुरक्षित डेट इंस्ट्रूमेंट्स तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारतीय कंपनियों के शेयरों में भी अवसर तलाश रहे हैं।
मार्च में हुई थी रिकॉर्ड बिकवाली
साल 2026 की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए विदेशी निवेश के लिहाज से चुनौतीपूर्ण रही थी।
मार्च महीने में एफपीआई ने रिकॉर्ड स्तर पर बिकवाली की थी। अकेले मार्च में विदेशी निवेशकों ने करीब 13.6 अरब डॉलर भारतीय बाजार से निकाले थे।
इसके बाद अप्रैल और मई में भी विदेशी निवेशकों का आउटफ्लो जारी रहा। बढ़ते वैश्विक जोखिम, अमेरिकी बाजारों में अनिश्चितता और भारतीय शेयरों के ऊंचे मूल्यांकन को लेकर चिंता के कारण विदेशी निवेशक सतर्क हो गए थे।
हालांकि जून में स्थिति में सुधार दिखा और एफपीआई ने करीब 531 मिलियन डॉलर का शुद्ध निवेश किया।
जुलाई में हर कारोबारी दिन रहा निवेश सकारात्मक
जुलाई की शुरुआत से ही विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत होता नजर आया है।
1 जुलाई से 10 जुलाई तक हर कारोबारी सत्र में एफपीआई का नेट निवेश सकारात्मक रहा।
इस दौरान सबसे बड़ा निवेश 9 जुलाई को देखने को मिला, जब विदेशी निवेशकों ने एक ही दिन में करीब 978 मिलियन डॉलर भारतीय बाजार में लगाए।
लगातार निवेश से संकेत मिल रहे हैं कि विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार में दोबारा अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की रणनीति अपना रहे हैं।
भारतीय बाजार के लिए क्या हैं संकेत?
विदेशी निवेशकों की वापसी भारतीय शेयर बाजार के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है। एफपीआई निवेश बढ़ने से बाजार में लिक्विडिटी बढ़ती है और बड़े शेयरों में खरीदारी को समर्थन मिलता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं और भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर मजबूत बनी रहती है, तो विदेशी निवेश का यह ट्रेंड आगे भी जारी रह सकता है।
हालांकि, बाजार पर अमेरिका की ब्याज दर नीति, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम का असर बना रहेगा।
निष्कर्ष
मार्च से मई तक भारी बिकवाली करने वाले विदेशी निवेशक अब भारतीय बाजार में फिर से भरोसा दिखा रहे हैं। जुलाई के शुरुआती 10 दिनों में ₹24,662 करोड़ का निवेश इस बदलाव का बड़ा संकेत है।
सेमीकंडक्टर शेयरों में करेक्शन, रुपये की स्थिरता और सरकार की निवेश संबंधी नीतियों ने विदेशी निवेशकों को दोबारा आकर्षित किया है। अगर यह रुझान जारी रहता है तो भारतीय शेयर बाजार को आने वाले समय में विदेशी पूंजी से मजबूती मिल सकती है।


