Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में लगातार दो कारोबारी दिनों की तेजी के बाद सोमवार को फिर भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। ग्लोबल संकेतों के कमजोर होने और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण घरेलू बाजार में बिकवाली हावी हो गई। शुरुआती कारोबार में ही BSE Sensex 700 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि Nifty 50 फिसलकर 24,000 के करीब पहुंच गया।
हालांकि, बाजार की गिरावट के बीच IT सेक्टर ने मजबूती दिखाई और इंडेक्स को सहारा देने की कोशिश की, लेकिन मेटल, फार्मा, ऑटो और बैंकिंग जैसे बड़े सेक्टरों में कमजोरी के कारण बाजार पर दबाव बना रहा।
एक कारोबारी दिन पहले यानी 10 जुलाई को बाजार में शानदार तेजी देखने को मिली थी। उस दिन Sensex 827.57 अंक यानी 1.08% की बढ़त के साथ 77,569.39 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि Nifty 50 244.10 अंक यानी 1.02% चढ़कर 23,206.90 पर पहुंच गया था। लेकिन सोमवार को बाजार ने इस तेजी का बड़ा हिस्सा गंवा दिया।
शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty में बड़ी गिरावट
सोमवार को बाजार खुलते ही निवेशकों की चिंता बढ़ गई। शुरुआती कारोबार में Sensex 711.96 अंक गिरकर 76,857.43 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं Nifty 50 में 206.70 अंकों की गिरावट आई और इंडेक्स 24,000.20 के निचले स्तर तक चला गया।
सुबह करीब 10:30 बजे तक बाजार में कुछ रिकवरी देखने को मिली। इस समय:
- Sensex: 200.69 अंक गिरकर 77,360.70 पर कारोबार कर रहा था।
- Nifty 50: 69.40 अंक की गिरावट के साथ 24,137.50 के स्तर पर था।
ब्रॉडर मार्केट में भी दबाव देखने को मिला। Nifty Midcap 100 और Nifty Smallcap 100 इंडेक्स में आधे फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
Share Market Crash की 4 बड़ी वजहें
1. अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी बाजार की चिंता
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजहों में से एक अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव रहा। भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से दुनियाभर के बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है।
ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दिए गए बयान ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है। अगर यहां किसी तरह की बाधा आती है तो वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ सकता है।
इस वजह से निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनानी शुरू कर दी और भारतीय बाजार में भी बिकवाली बढ़ गई।
2. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा। ब्रेंट क्रूड ऑयल फ्यूचर्स में तेज तेजी देखने को मिली और कीमतें 4% से ज्यादा बढ़कर 79 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं।
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से:
- कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।
- महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
- रुपये पर असर पड़ सकता है।
- विदेशी निवेशकों की चिंता बढ़ सकती है।
यही कारण है कि तेल कीमतों में तेजी को बाजार ने नकारात्मक संकेत के तौर पर लिया।
3. India VIX में बढ़ी हलचल
शेयर बाजार में डर और अस्थिरता को मापने वाले इंडिकेटर India VIX में भी हलचल देखने को मिली।
India VIX बढ़ने का मतलब होता है कि निवेशकों को आने वाले दिनों में बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव की आशंका है। हालांकि कारोबार के दौरान इसमें कुछ नरमी आई और यह 7.63% गिरकर 13.19 के स्तर पर रहा।
फिर भी वैश्विक तनाव और तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों को सतर्क बना दिया है।
4. मेटल और फार्मा शेयरों में कमजोरी
जहां IT सेक्टर ने बाजार को संभालने की कोशिश की, वहीं कुछ प्रमुख सेक्टरों में गिरावट ने दबाव बढ़ा दिया।
सोमवार को:
- निफ्टी IT इंडेक्स में मजबूती देखने को मिली।
- निफ्टी मेटल इंडेक्स में गिरावट रही।
- फार्मा सेक्टर कमजोर रहा।
- निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में भी दबाव देखा गया।
- प्राइवेट बैंक और ऑटो शेयरों में भी कमजोरी रही।
मेटल और फार्मा जैसे बड़े सेक्टरों में बिकवाली का असर पूरे बाजार के सेंटीमेंट पर पड़ा।
IT सेक्टर बना बाजार का सहारा
बाजार की गिरावट के बीच IT शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। अमेरिकी बाजारों में टेक कंपनियों की मजबूती और डॉलर से जुड़े फायदे के कारण IT सेक्टर को सपोर्ट मिला।
हालांकि, सिर्फ IT सेक्टर की तेजी बाजार को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रही क्योंकि बैंकिंग, मेटल और ऑटो जैसे बड़े सेक्टरों में कमजोरी बनी रही।
निवेशकों को आगे किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?
आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से इन संकेतों पर निर्भर करेगी:
- अमेरिका-ईरान तनाव में आगे क्या स्थिति बनती है।
- कच्चे तेल की कीमतों का रुख।
- विदेशी निवेशकों (FII) की खरीद-बिक्री।
- कंपनियों के तिमाही नतीजे।
- रुपये और डॉलर की चाल।
विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए और मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए।
निष्कर्ष
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार की गिरावट केवल घरेलू कारणों से नहीं बल्कि वैश्विक घटनाक्रमों का असर भी है। अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और कुछ सेक्टरों में बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाया।
हालांकि IT सेक्टर की मजबूती यह संकेत देती है कि बाजार में कुछ क्षेत्रों में अब भी खरीदारी का भरोसा बना हुआ है। निवेशकों को आने वाले दिनों में वैश्विक संकेतों और बाजार की दिशा पर नजर रखनी होगी।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन होता है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें। NewsJagran किसी भी निवेश या शेयर खरीदने की सलाह नहीं देता है।


