महाराष्ट्र के सांगोला जैसे सूखा प्रभावित इलाके में जहां खेती करना हमेशा से चुनौती भरा रहा है, वहीं एक किसान ने अपनी मेहनत और सही फसल के चुनाव से खेती की पूरी तस्वीर बदल दी। कभी लगातार नुकसान झेलने वाले किसान संदीप कदम ने सहजन (मुनगा) की खेती को अपनाकर ऐसा मॉडल तैयार किया, जो आज कई किसानों के लिए प्रेरणा बन गया है।
कम पानी की जरूरत, कम लागत और बाजार में बढ़ती मांग ने सहजन की खेती को संदीप के लिए फायदे का सौदा बना दिया। आज उनके खेत में हर साल करीब 4.2 लाख किलो (420 टन) सहजन का उत्पादन होता है। मौसम के हिसाब से बाजार में सहजन की कीमत 40 से 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है, लेकिन संदीप को औसतन करीब 60 रुपये प्रति किलो का भाव मिल जाता है। उनकी फसल का एक हिस्सा दुबई तक निर्यात भी किया जाता है।
सूखे और नुकसान से परेशान थे संदीप कदम
महाराष्ट्र के किसान संदीप कदम के लिए खेती का सफर आसान नहीं था। बढ़ती लागत, अनिश्चित बारिश और बार-बार खराब होती फसलों ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी थीं। सांगोला क्षेत्र पहले से ही पानी की कमी और सूखे की समस्या से जूझता रहा है। ऐसे में पारंपरिक खेती से अच्छी कमाई करना उनके लिए चुनौती बन गया था।
30Stades की रिपोर्ट के अनुसार, लगातार फसल नुकसान के बाद संदीप ने खेती के तरीके में बदलाव करने का फैसला किया। उन्होंने ऐसी फसल की तलाश शुरू की, जिसमें कम पानी लगे, खर्च कम हो और बाजार में अच्छी मांग हो।
इससे पहले उन्होंने अनार की खेती भी की थी, लेकिन मौसम की मार ने उन्हें काफी नुकसान पहुंचाया। बेमौसम बारिश के कारण अनार की फसल में बैक्टीरियल ब्लाइट और विल्ट जैसी बीमारियां फैलने लगीं। फसल बचाने के लिए बार-बार दवाओं का छिड़काव करना पड़ता था, जिससे लागत लगातार बढ़ती गई।
आखिरकार संदीप ने तय किया कि अब उन्हें ऐसी खेती करनी होगी जो उनके इलाके की परिस्थितियों के अनुकूल हो।
सहजन की खेती ने बदली जिंदगी
संदीप कदम ने सहजन यानी मुनगा की खेती को चुना। सहजन भारत में लंबे समय से इस्तेमाल होने वाली पौष्टिक सब्जी है। इसका उपयोग सब्जी, सांभर, दाल और कई पारंपरिक व्यंजनों में किया जाता है।
सहजन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे दूसरी कई बागवानी फसलों की तुलना में कम पानी की जरूरत होती है। यही कारण है कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों में यह किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बन सकता है।
संदीप ने शुरुआत में पूरी जमीन पर सहजन लगाने का जोखिम नहीं लिया। उन्होंने पहले छोटे स्तर पर इसका परीक्षण किया।
सिर्फ 40 पौधों से शुरू हुई सफलता की कहानी
साल 2010 में संदीप कदम ने तमिलनाडु से ओडीसी (ODC) किस्म के सहजन के बीज मंगवाए। उन्होंने अपने अनार के बाग में खाली जगह पर सिर्फ 40 सहजन के पौधे लगाए।
शुरुआत में यह सिर्फ एक प्रयोग था, लेकिन परिणाम उम्मीद से कहीं बेहतर रहे। संदीप बताते हैं कि इन 40 पौधों से उन्हें करीब 40 हजार रुपये की कमाई हुई।
इस छोटी सफलता ने उनका भरोसा बढ़ाया। उन्हें महसूस हुआ कि सहजन की खेती सूखे इलाके के किसानों के लिए एक मजबूत विकल्प बन सकती है।
धीरे-धीरे उन्होंने खेती का विस्तार करना शुरू किया। पौधों की अच्छी देखभाल के बाद हर पेड़ से सालाना औसतन करीब 60 किलो तक सहजन मिलने लगा।
एक एकड़ से शुरू किया बड़ा उत्पादन
पहले प्रयोग में सफलता मिलने के बाद संदीप ने दिसंबर 2012 में करीब एक एकड़ जमीन पर बड़े स्तर पर सहजन की खेती शुरू की।
उन्होंने अपनी पहली फसल से तैयार किए गए बीजों का इस्तेमाल किया और लगभग 680 पौधे लगाए। पौधों की कतारों के बीच करीब 10 फीट और एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच करीब 6 फीट की दूरी रखी गई।
मई महीने में उनकी पहली व्यावसायिक फसल तैयार हुई। इसमें हर पौधे से औसतन करीब 25 किलो सहजन का उत्पादन मिला।
इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे अपने खेती मॉडल को और मजबूत किया। बेहतर प्रबंधन, बाजार की समझ और खरीदारों के नेटवर्क ने उनकी कमाई को कई गुना बढ़ा दिया।
आज 420 टन तक पहुंचा उत्पादन
आज संदीप कदम के खेत में हर साल करीब 4.2 लाख किलो यानी 420 टन सहजन का उत्पादन होता है।
बाजार में सहजन की कीमत मौसम के अनुसार बदलती रहती है। आमतौर पर यह 40 से 100 रुपये प्रति किलो तक बिकता है। संदीप को औसतन करीब 60 रुपये प्रति किलो का भाव मिल जाता है।
उनकी सफलता का एक बड़ा कारण सीधा बाजार से जुड़ाव भी है। उन्होंने खरीदारों का मजबूत नेटवर्क तैयार किया है, जिससे उन्हें अपनी उपज के लिए बेहतर कीमत मिलती है। इसके अलावा वह सहजन का निर्यात दुबई तक करते हैं।
लाखों का मुनाफा दे रही है सहजन की खेती
संदीप के अनुसार, सहजन की खेती में प्रति एकड़ सालाना खर्च करीब 1.5 लाख रुपये आता है। वहीं एक एकड़ से लगभग 25 लाख रुपये तक की आमदनी हो जाती है।
इस हिसाब से खर्च निकालने के बाद करीब 23.5 लाख रुपये प्रति एकड़ तक का मुनाफा संभव है।
हालांकि इतनी बड़ी कमाई के लिए सिर्फ फसल लगाना ही काफी नहीं है। सही किस्म का चुनाव, वैज्ञानिक तरीके से खेती, बाजार से जुड़ाव और बेहतर प्रबंधन भी जरूरी है।
किसानों के लिए प्रेरणा बनी संदीप की कहानी
संदीप कदम की कहानी बताती है कि खेती में सफलता के लिए सिर्फ पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है। बदलते मौसम और पानी की समस्या के बीच किसानों को ऐसी फसलों की ओर बढ़ना होगा, जो कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन दे सकें।
सहजन जैसी फसलें न केवल कम पानी वाले क्षेत्रों के लिए उपयोगी हैं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने का भी जरिया बन सकती हैं।
सिर्फ 40 पौधों से शुरू हुआ संदीप कदम का सफर आज हजारों किसानों के लिए एक उदाहरण बन चुका है कि सही सोच और मेहनत से सूखे इलाके में भी खेती को फायदे का व्यवसाय बनाया जा सकता है।


